नगर परिषद में शामिल होगा कांगणीधार!

सरकार की प्रस्तावित योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए कदम उठाना जरूरी

मंडी -मंडी शहर के साथ लगते कांगणीधार जंगल को बचाने के लिए जहां एक तरफ शहर के कई संगठन प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर परिषद मंडी ने कांगणीधार को पंचायत क्षेत्र से अलग करवाने की मुहिम शुरू कर दी है, ताकि नगर परिषद के अधीन आने के बाद यहां पर विभिन्न सरकारी योजनाओं को आसानी से अमलीजामा पहनाया जा सके। वहीं पंचायत क्षेत्र से बाहर होने के बाद वन अधिकार समितियों से भी अनुमति की जरूरत नहीं रहेगी और उक्त वन क्षेत्र में निर्भर लोगों के विरोध का भी सामना नहीं  क रना पडे़गा। हालांकि स्वयं नगर परिषद के कुछ पार्षद भी इस जंगल के संरक्षण का प्रस्ताव पारित कर चुके हैं, लेकिन अब नगर परिषद ने कांगणीधार जंगल को पंचायत क्षेत्र से बाहर करवाने की मुहिम छेड़ दी है।  उल्लेखनीय है कि कांगणीधार जंगल को मंडी शहर का आक्सीजन सिलेंडर कहा जाता है और यही वजह है कि स्थानीय लोग व कई संगठन कांगणीधार में निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। लोगों की मांग है कि कांगणीधार जंगल की भूमि विभिन्न विभागों व अन्य योजनाओं के लिए न दी जाए। बता दें कि इस समय आधा दर्जन से अधिक योजनाएं कांगणीधार में सरकार ने प्रस्तावित कर रखी हैं। इनमें से शिवधाम प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी योजना है, जिसे कांगधीधार में बनाया जाना है। नगर परिषद ने इस बारे में शहर के साथ लगती दुदर पंचायत से आग्रह किया है कि वह इसे लेकर एक प्रस्ताव पारित करके सरकार व प्रशासन को दे, ताकि इस कार्य को आगे बढ़ाया जा सके। नगर परिषद मंडी की अध्यक्ष सुमन ठाकुर ने कहा कि कांगणीधार में शिवधाम व ऑडिटोरियम बनाने के लिए इसे नगर परिषद में शामिल किया जाना जरूरी है। इसलिए उपायुक्त मंडी को भी एक पत्र लिखा गया है, ताकि इस धार को नगर परिषद में शामिल करने का प्रस्ताव पंचायत द्वारा भेजा जा सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मंडी जिला से हैं और वह इस समय मंडी जिला के लिए नई-नई योजनाएं लाने में लगे हुए हैं। कई बड़े प्रोजेक्ट यहां पर आ रहे हैं, जो मंडी नगर परिषद व मंडी जिला और शहर के लोगों का सौभाग्य है। शिवधाम का बनना मंडी के लिए मुख्यमंत्री का एक अमूल्य तोहफा है। इसी दिशा में कांगणीधार को नगर परिषद क्षेत्र में लाए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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