हवाई अड्डे के लिए सरकार की प्रतिबद्धता

By: Dec 16th, 2019 12:08 am

कर्म सिंह ठाकुर

लेखक, सुंदरनगर से हैं

हवाई अड्डे के निर्माण के लिए जिला हमीरपुर के जाहू नामक स्थल की चर्चाएं भी खूब सुर्खियों में रहीं, लेकिन आखिरकार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा केंद्रीय सत्ता को विश्वास में लेकर मंडी जिला के बल्ह नामक स्थल पर इसके निर्माण के लिए राजी कर ही दिया…

काफी लंबे समय से प्रदेश की हसीन वादियां अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे का इंतजार कर रही हैं। आखिरकार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का ड्रीम प्रोजेक्ट धरातल पर उतरने के अंतिम चरण पर खड़ा है। जब-जब माननीय मुख्यमंत्री केंद्र सरकार के मंत्रियों से रू-ब-रू हुए उन्होंने मंडी में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण का पुरजोर समर्थन किया। कई बार इस हवाई अड्डे के निर्माण के लिए जिला हमीरपुर के जाहू नामक स्थल की चर्चाएं भी खूब सुर्खियों में रहीं, लेकिन आखिरकार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा केंद्रीय सत्ता को विश्वास में लेकर मंडी जिला के बल्ह नामक स्थल पर इसके निर्माण के लिए राजी कर ही दिया। कुछ दिन पहले ही टेक्निकली खामी के कारण बल्ह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के चयनित स्थल को लेकर बयानबाजी सिर चढ़कर बोल रही है लेकिन माननीय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा स्पष्ट कर दिया गया कि 2 माह के भीतर एग्रीमेंट साइन करके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।

अब देखना दिलचस्प होगा कि टेक्निकल खामियों को किस तरह से दूर किया जाता है। केंद्र सरकार शत-प्रतिशत इसके निर्माण का खर्चा उठाने के लिए भी तैयार हो गई है। इस हवाई अड्डे के चालू होने पर केंद्र व राज्य हिस्सेदारी 51ः49 की होगी। हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। इस दृष्टि से केंद्र सरकार द्वारा इस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण का खर्चा उठाना प्रदेश के लिए सुखद तथा बड़ी खबर है। हाल ही में जयराम सरकार द्वारा धर्मशाला में अंतरराष्ट्रीय स्तर की इन्वेस्टर मीट में करीब 93,000 करोड़ रुपय के निवेश के सफल आयोजन के बाद दूसरा मास्टर स्ट्रोक अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे के निर्माण के रूप में खेला है जो कि उनकी राजनीतिक परिपक्वता को धरातल से जोड़ता है, लेकिन इन दो बड़े कार्यों की सफलता इनके सही तथा विधिवत स्थापन से ही निर्धारित होगी।

वर्तमान समय में हिमाचल प्रदेश में शिमला, कुल्लू तथा कांगड़ा में तीन अड्डे हैं। काफी लंबे समय से प्रदेश के इन तीन हवाई अड्डों के विस्तार की रूप रेखाएं भी बन रही थीं, लेकिन धरातल पर पहुंचने में सफल नहीं हो पाई। इसी परिप्रेक्ष्य में रेल मार्ग भी हिमाचल में छुक-छुक तक ही सीमित रहा। दूसरी तरफ जलमार्ग के माध्यम से सरकार कुछ नवीन कदम उठाने की रूपरेखा बना रही है, लेकिन इन्हें भी विकसित होने में समय लगेगा। प्रदेश का करीब 98 प्रतिशत आवागमन सड़क के माध्यम से ही होता है। ऐसे में अन्य विकल्पों को दुरुस्त करना हिमाचल के भविष्य के लिए अति आवश्यक हो गया है, लेकिन विकास के नए आयाम स्थापित करने के लिए आर्थिकी का होना अनिवार्य होता है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश को  केंद्र सरकार तथा बड़े-बड़े उद्यमियों के निवेश की सख्त आवश्यकता है।

हिमाचल की आर्थिक स्थिति तथा बेरोजगारी के आंकड़े दिन प्रतिदिन बेलगाम होते जा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश में उपलब्ध संसाधनों तथा प्राकृतिक सौंदर्य का दीदार करवाने के लिए बेहतर आवागमन का मार्ग होना अति आवश्यक है। यदि पर्यटन की दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को देखा जाए तो आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश की पर्यटन नगरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और रोजगार के नवीन साधन भी सृजित होंगे। हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता यूरोप के अति सुंदर शहरों के समतुल्य है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर का हवाई अड्डा हिमाचल के बीचों-बीच स्थित मंडी जिला में निर्मित होता है तो निश्चित तौर पर हिमाचल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी होगा। इस अड्डे के निर्माण के लिए करीब 3000 बीघा जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। मंडी जिला में बल्ह घाटी में जहां पर भूमि चयन का चयन किया गया है, इस घाटी को ‘मिनी पंजाब’ के नाम से भी जाना जाता है। मिनी पंजाब इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां की भूमि पंजाब की भूमि की तरह सोना उगलती है। यहां के किसान अपनी भूमि से हर वर्ष करोड़ों रुपए का फल-सब्जी का उत्पादन करते हैं, लेकिन विकास के लिए प्रदेश वासी बड़ी-बड़ी कुर्बानियां देने के लिए भी तैयार रहते हैं।

भाखड़ा बांध, पौंग बांध, कोलडैम बांध तथा टू लेन रोड निर्माण में अनेकों परिवारों को विस्थापन की पीड़ा झेलनी पड़ी है। अब बारी मंडी जिला के बल्ह वासियों की है। चलो प्रदेश के विकास के लिए यदि विस्थापन भी करना पड़े तो शायद प्रदेशवाशी खुशी-खुशी से कर लेंगे, लेकिन यदि उसी विस्थापन पर राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम शुरू हो जाए तो शायद उन किसानों को सबसे ज्यादा दुख होता है जो उस भूमि को अपनी मां के समतुल्य मानते हैं तथा कई सदियों से कृषि व्यवस्था से ही अपने परिवार का जीवन-यापन करते आ रहे हैं। सरकार को ऐतिहासिक विस्थापन के मुद्दों से सबक लेते हुए बल्ह घाटी के किसानों को उचित तथा समय पर मुआवजा, नवीन कालोनियों, स्कूलों, निवास स्थलों के निर्माण की व्यवस्था बिना किसी राजनीतिक नफा-नुकसान से करनी होगी।

मुख्यमंत्री का संबंध भी मंडी जिला से ही है और ऐसे परिवार से रहा है जिसका मुख्य व्यवसाय कृषि तथा बागबानी ही रहा है तो माननीय मुख्यमंत्री से भी निवेदन रहेगा कि किसान की पीड़ा को भी समझें ताकि उन्हें किसी तरह बड़े विस्थापन का दर्द न झेलना पड़े तथा हवाई अड्डे की निर्माण के लिए तथा सुचारू संचालन के लिए विस्थापित परिवारों को ही नौकरी में वरीयता देने का प्रावधान प्रमुखता से होना चाहिए।

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