तवज्जो की आस में कर्मचारियों की मांगें

अनुज कुमार आचार्य

लेखक, बैजनाथ से हैं

प्रदेश में अपना वेतन आयोग न होने के कारण प्रदेश के कर्मचारियों को पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने का इंतजार करना पड़ता है और इस बार उनका यह इंतजार कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया है, क्योंकि पंजाब सरकार ने राज्य वेतन आयोग का कार्यकाल 30 जून 2020 तक बढ़ाया हुआ है। बीते कुछ वर्षों से हिमाचली अभिभावकों ने येन केन प्रकारेण कर्ज आदि लेकर अपनी संतानों को अच्छी और महंगी शिक्षा दिलवाने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखी है। इसलिए भी कर्मचारी वर्ग अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए उठाए गए ऋण और उसके ऊपर लगने वाले भारी भरकम ब्याज से जल्दी निजात पाने के लिए प्रदेश में भी सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द लागू होते देखना चाहते हैं…

भारत सरकार के कर्मचारियों के लिए सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू हुए 4 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारी अभी भी अपने लिए पंजाब पैटर्न पर आधारित वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने की बाट जोह रहे हैं। प्रदेश में अपना वेतन आयोग न होने के कारण प्रदेश के कर्मचारियों को पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने का इंतजार करना पड़ता है और इस बार उनका यह इंतजार कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया है, क्योंकि पंजाब सरकार ने राज्य वेतन आयोग का कार्यकाल 30 जून 2020 तक बढ़ाया हुआ है। बीते कुछ वर्षों से हिमाचली अभिभावकों ने येन केन प्रकारेण कर्ज आदि लेकर अपनी संतानों को अच्छी और महंगी शिक्षा दिलवाने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखी है। इसलिए भी कर्मचारी वर्ग अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए उठाए गए ऋण और उसके ऊपर लगने वाले भारी भरकम ब्याज से जल्दी निजात पाने के लिए प्रदेश में भी सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द लागू होते देखना चाहते हैं।

पिछले दिनों मुख्य सचिव अनिल खाची ने अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के एक गुट के नेताओं से मुलाकात में सकारात्मक संकेत देते हुए कहा था कि वह मुख्यमंत्री के साथ जल्दी चर्चा कर केंद्रीय वेतनमान को हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों के लिए भी लागू करवाने का प्रयास करेंगे। वैसे भी हिमाचल प्रदेश सरकार का रवैया अपने कर्मचारियों के प्रति हमेशा सकारात्मक रहता आया है और सरकार समय-समय पर डीए की किस्त जारी करने के साथ 21 फीसदी अंतरिम राहत भत्ता भी अपने कर्मचारियों को दे चुकी है। लिहाजा यदि हिमाचल प्रदेश सरकार सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को अपने यहां लागू करती है तो इससे कोई ज्यादा वित्तीय बोझ हिमाचल सरकार पर नहीं पड़ने वाला है। हालांकि यह भी सत्य है कि वर्तमान समय में प्रदेश पर लगभग 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज का भार भी है। 15वें वित्त आयोग की टीम हिमाचल की आर्थिक स्थिति का आंकलन करके और जायजा लेकर जा चुकी है। इस बार हिमाचल को 15वें वित्त आयोग से पहले के मुकाबले 30 से 40 फीसदी ज्यादा बजट मिलने की उम्मीद है। 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों से 5 साल की अवधि में हिमाचल प्रदेश को 72 हजार करोड़ रुपए केंद्र से मिले थे। वर्तमान जयराम सरकार अपने आर्थिक संसाधनों को बढ़ाने के दृष्टिगत हाल ही में धर्मशाला में 93,000 करोड़ रुपए के निवेश के वाले ‘एमओयू’ से संबंधित ‘राइजिंग हिमाचल-ग्लोबल इन्वेस्टर मीट’ का सफलतापूर्वक आयोजन कर चुकी है।

यद्यपि इन एमओयू के धरातल पर साकार रूप लेने और इनके वास्तविक परिणाम सामने आने में कुछ समय जरूर लगेगा। हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों की कुछ अन्य मांगें भी हैं जिन्हें सरकार से तवज्जो की आस है। जैसे प्रदेश के कर्मचारियों की जेसीसी की बैठक समय पर न होने के चलते सरकार के साथ संवाद के अभाव में कर्मचारी हित से जुड़े कई मुद्दे अपना हल होने की बाट जोह रहे हैं। इधर भूतपूर्व सैनिकों की पे-फिक्सेशन का मसला हो या अनुबंध पर लगे कर्मचारियों की नियुक्ति की तिथि से सीनियोरिटी दिए जाने का मामला अथवा पुरानी पेंशन बहाली के लिए संघर्षरत कर्मचारी। सभी कर्मचारी बेसब्री से जल्दी से जल्दी अपनी मांगों को हल होते देखना चाहते हैं। 4-9-14 वेतन वृद्धि के मामले में स्पष्टता का अभाव होने के कारण तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, इसका निराकरण होना चाहिए। इसके अलावा कर्मचारियों की अन्य प्रमुख मांगों में प्रोमोशन पर दो साल बाद मिलने वाली ग्रेड पे की शर्त को खत्म करने के साथ अनुबंध से नियमित होने वाले कर्मियों को साल में दो बार नियमित करने के बजाय जैसे-जैसे कर्मचारी की अनुबंध सेवा के तीन वर्ष पूरे होते जाएं उन्हें उसी तिथि से नियमित किया जाना चाहिए प्रमुख हैं। वैसे तो सरकार को चाहिए कि अनुबंध आधार वाली प्रथा पर अब विराम लगना चाहिए और प्रदेश सरकार सीधे नियमित आधार पर नौकरी देने की नीति लेकर आए। केंद्र की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों की सेवानिवृति आयु को भी बढ़ाकर 60 वर्ष किए जाने की तत्काल आवश्यकता है ताकि देरी से नौकरी पर लगने वाले कर्मियों को अपनी पारिवारिक तथा सामाजिक जिम्मेवारियों को पूरा करने में कुछ आर्थिक लाभ हो पाए। प्रदेश सरकार के मुखिया जयराम ठाकुर कर्मचारियों को प्रदेश के विकास में अहम भागीदार मानते हुए उन्हें सरकार की रीढ़ की हड्डी करार दे चुके हैं। लिहाजा कर्मचारियों के कल्याण के प्रति सरकार अपने दायित्व को समझते हुए यदि कर्मचारियों की लंबित मांगों का समाधान करती है और केंद्रीय सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को हिमाचल में भी लागू करती है तो इससे न केवल महंगाई के दौर में कर्मचारियों को कुछ राहत मिलेगी और कर्मचारियों का सरकार के प्रति भरोसा भी  बरकरार रहेगा ।

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