पर्यटन मित्र साबित हो नई नीति

अनुज कुमार आचार्य

लेखक, बैजनाथ से हैं

आजादी के बाद से अपने अस्तित्व में आने और 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल होने के बाद से विकास के मामले में हिमाचल प्रदेश ने एक लंबी छलांग लगाई है। अपने सीमित वित्तीय संसाधनों के बावजूद लगभग प्रत्येक सरकार ने हिमाचल को अपने पैरों पर खड़ा करने तथा भारत के बड़े राज्यों के मध्य अनेक पैमानों पर सर्वश्रेष्ठ साबित करने में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन नीति-2019 को अधिसूचित कर दिया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में पर्यटन का समग्र विकास करना है…

हिमाचल प्रदेश को प्रकृति से विरासत में अद्भुत सौंदर्य, सुंदर प्राकृतिक वातावरण और दृश्यावलियां, स्वास्थ्यवर्धक जलवायु, परिवेश और मौसम प्राप्त है। आजादी के बाद से अपने अस्तित्व में आने और 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल होने के बाद से विकास के मामले में हिमाचल प्रदेश ने एक लंबी छलांग लगाई है। अपने सीमित वित्तीय संसाधनों के बावजूद लगभग प्रत्येक सरकार ने हिमाचल को अपने पैरों पर खड़ा करने तथा भारत के बड़े राज्यों के मध्य अनेक पैमानों पर सर्वश्रेष्ठ साबित करने में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन नीति-2019 को अधिसूचित कर दिया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में पर्यटन का समग्र विकास करना है। इस नई पर्यटन नीति में ईको पर्यटन, जैविक कृषि, स्नो, झील, साहसिक, धार्मिक, संस्कृति एवं धरोहर, स्वास्थ्य एवं वैलनेस तथा फिल्म पर्यटन जैसे महत्त्वपूर्ण पहलुओं और थीम के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन की लगभग 10 फीसदी हिस्सेदारी है और इसे बढ़ाने की जरूरत है। हिमाचल प्रदेश को विदेशी एवं घरेलू पर्यटकों के लिए पसंदीदा गंतव्य स्थल बनाने की राह में कुछ एक चुनौतियां भी हैं। पर्यटन की बात करें तो एक तरफ भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों में बढ़ोतरी हुई है तो वहीं हिमाचल प्रदेश आने वाले विदेशी और घरेलू पर्यटकों में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2017 में हिमाचल प्रदेश में कुल 1,91,30,541 घरेलू पर्यटक घूमने आए थे तो वहीं 2018 में पर्यटकों की आमद घटकर 1,60,93,935 रह गई। वर्ष 2017 की अवधि में विदेशी पर्यटकों की संख्या 4,70,992 थी जो वर्ष 2018 में घटकर 3,56,568 रह गई। यानी विदेशी पर्यटकों में 24.29 प्रतिशत और घरेलू पर्यटकों के मामले में 15.87 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। पूरे भारतवर्ष में पर्यटक आगमन के मामले में हिमाचल की रैंकिंग 14 वें स्थान पर है। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग के पास इस समय कुल 3382 होटल और 1656 होमस्टे पंजीकृत हैं। पंजीकृत गाइड्स की संख्या 1314 और ट्रैवल एजेंसियों की संख्या 3297 है। वर्तमान समय में हिमाचल के होटलों में 91223 और होमस्टे में 9144 बिस्तरों की व्यवस्था है। प्रदेश सरकार द्वारा एशियन डिवेलपमेंट बैंक की वित्तीय सहायता से 619 करोड़ की पर्यटन को विकसित करने वाली योजनाओं पर काम चल रहा है।

इसके अलावा ‘नई राहें नई मंजिलें’ योजना के अंतर्गत प्रदेश के अनछुए पर्यटक स्थलों को विकसित करने की दिशा में प्रगति हो रही है। हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में लोक निर्माण विभाग, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग और वन विभाग के विश्राम गृह मौजूद हैं। इन विश्राम गृहों में पर्यटकों तथा आम जनता को आसानी से कमरा उपलब्ध होने की सुविधा नहीं होने के कारण प्रायः यह विश्रामगृह खाली रहते हैं, अधिकतर विश्राम गृहों में खाने-पीने, हीटर, गर्म पानी और साफ.-सुथरे बिस्तरों की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण वहां गंदगी का आलम दिखाई देता है। चौकीदारी व्यवस्था होने के कारण देर-सवेर आने वाले पर्यटकों को गेट के बाहर से ही कमरा न होने का बहाना या परमिट लेकर आइए जैसी मांग के चलते कमरा देने से इनकार कर दिया जाता है। इस व्यवस्था को तुरंत बदलने की जरूरत है। सरकार को चाहिए कि वह पीडब्ल्यूडी, फोरेस्ट तथा  आईपीएच के विश्रामगृहों की व्यवस्था को सुधारे और उनकी सुविधाओं में इजाफा करे। इतना ही नहीं, इन विश्रामगृहों के संचालन के लिए अलग विभाग बनाकर किसी युवा आईएएस अधिकारी के नियंत्रण में इन विश्रामगृहों के कमरों को पर्यटकों को सस्ती दरों पर ऑनलाइन सुविधा पर आधारित बुकिंग व्यवस्था के आधार पर आसानी से उपलब्ध करवाया जाए। सरकार को चाहिए कि वह इन विश्रामगृहों के व्यावसायिक इस्तेमाल की व्यवस्था को यकीनी बनाए। इसी प्रकार धर्मशाला, शिमला,  मनाली और डलहौजी में सारागढ़ी सराय अमृतसर की तर्ज पर सुंदर होटल बनाए जाएं और ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था द्वारा वहां पर पर्यटकों के लिए साफ.-सुथरे कमरे और अच्छी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। इसके अलावा ज्यादा भीड़-भाड़ वाले मझोले और बड़े शहरों में मल्टीस्टोरी पार्किंग व्यवस्था होनी चाहिए। पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को ट्रैफिक जाम से निजात दिलवाई जाए। सभी छोटे-बड़े कस्बों तथा शहरों में हथियारबंद पुलिस गश्त की माकूल व्यवस्था हो ताकि असामाजिक, शराबी और शरारती तत्त्वों में खौफ रहे। यह समय का तकाजा है कि टेक्नोलॉजी के इस युग में सरकारी क्षेत्र में पहले से उपलब्ध और तैयार सुविधाओं को हिमाचल प्रदेश घूमने आने वाले पर्यटकों को ऑनलाइन सिस्टम द्वारा पहले से ही भुगतान करके उन सुविधाओं का लाभ उठाने हेतु विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है। हिमाचल प्रदेश सरकार यदि गंभीरता से अपनी नई पर्यटन नीति को लागू करती है तो निश्चित तौर पर इससे प्रदेश की आर्थिकी को बल मिलेगा और हिमाचल प्रदेश, भारत में पहले स्थान पर पसंदीदा पर्यटक गंतव्य स्थल के रूप में उभर कर सामने आएगा। सरकार को चाहिए कि सरकारी क्षेत्र के सभी विश्रामगृहों का संचालन व्यक्तिगत बुकिंग के स्थान पर ऑनलाइन प्रणाली द्वारा किया जाए। इसके अतिरिक्त प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में नई व्यवस्थाओं का भरपूर प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा विदेशी और घरेलु पर्यटकों को हिमाचल प्रदेश में घूमने आने के लिए आकर्षित किया जा सके।

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