कर्ज घटाने का फार्मूला सुझाए बजट

अनुज कुमार आचार्य

लेखक, बैजनाथ से हैं

सरकार को पहले यहां के निवासियों की पुनर्वास योजना पर काम करने की जरूरत है। पंजाब के मुकाबले हिमाचल में फोरलेनिंग सड़कों के निर्माण पर न के बराबर काम हुआ है, जो राज्य की विकास संभावनाओं पर विपरीत असर डालने के लिए पर्याप्त है…

हिमाचल प्रदेश पर्वतीय प्रदेश है और मैदानी राज्यों के विपरीत यहां की भौगोलिक परिस्थितियां नितांत भिन्न हैं। इसी प्रकार यहां विकास कार्यों को सिरे चढ़ाने के लिए वित्तीय जरूरतें भी अधिक हैं। अप्रैल 1948 में हिमाचल प्रदेश बनने और 25 जनवरी 1971 से पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल करने के बाद विकास के मामले में हिमाचल प्रदेश ने अन्य राज्यों के मुकाबले एक लंबी छलांग लगाई है, तथापि अभी भी बहुत कुछ होना बाकी है। ब्रॉडगेज ट्रेन न होने के कारण इस पर्वतीय राज्य में सड़कें ही जीवन रेखा का आधार हैं। वहीं गगल स्थित कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तारीकरण की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी रोष है।  सरकार को पहले यहां के निवासियों की पुनर्वास योजना पर काम करने की जरूरत है। पंजाब के मुकाबले हिमाचल में फोरलेनिंग सड़कों के निर्माण पर न के बराबर काम हुआ है, जो राज्य की विकास संभावनाओं पर विपरीत असर डालने के लिए पर्याप्त है। बढ़ती आबादी और परिवहन जरूरतों के अनुसार बैजनाथ जैसे बस अड्डे छोटे हैं और बसों के भारी बेड़ों को संभालने के लिए अपर्याप्त हैं। सड़कें वही पुरानी हैं, लेकिन वाहनों की बढ़ती भीड़ दिन-प्रतिदिन होती दुर्घटनाओं में इजाफा कर रही है। कस्बों-शहरों के नियोजित विकास के लिए बजटीय अवलंबन की जरूरत है। अनधिकृत निर्माण और अवैध कब्जों पर प्रहार हो। पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक पर कंट्रोल, पॉल्यूशन कंट्रोल, चौड़ी सड़कें, गांव-कस्बों की  गलियों का सुधारीकरण, स्ट्रीट लाइट, खेल मैदान, पार्क की व्यवस्था, सीवरेज लाइन, कूड़ा-कचरा निपटान संयंत्रों की स्थापना जैसी सामान्य जरूरतों के लिए बजट का आबंटन समय की मांग है। हिमाचल की भौगोलिक संरचना से कुछ व्यावहारिक दिक्कतें जरूर हैं, लेकिन विकास का पहिया तो घुमाना ही पड़ेगा।  इसी बीच वर्ष 2020-21 के लिए 15 वें वित्त आयोग की सामने आई रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश सरकार का हौसला बढ़ाने वाली है। हिमाचल प्रदेश को केंद्रीय करों के 41 फीसदी हिस्से में से 799 फीसदी आबंटन के हिसाब से कुल मिलाकर 19309 करोड़ रुपए मिलेंगे। प्रदेश में कुल 3226 पंचायतें, 54 शहरी स्थानीय निकाय और दो नगर निगम हैं, लेकिन बढ़ती आबादी और पर्यटकों, प्रवासी मजदूरों के कारण मौजूदा व्यवस्था चरमराती दिखती है, जिसमें व्यापक स्तर पर सुधार अपेक्षित है। जैसे पेयजल आपूर्ति, पार्किंग, कूड़ा कचरा संयंत्रों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर समाधान मांगते हैं। निचले स्तर पर शासन को लोकतांत्रिक बनाने में स्थानीय निकायों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती है। महात्मा गांधी का मानना था कि यदि गांव नष्ट हो गए तो, भारत भी नष्ट हो जाएगा।  अत: गांव की उन्नति, विकास और प्रगति पर भारत की उन्नति संभव है। चूंकि पंचायती राज संस्थाओं द्वारा कृषि,भूमि सुधार,लघु सिंचाई, जल प्रबंध,पशुपालन, डेयरी, कुक्कुट पालन,  मत्स्यन,लघु वनोपज,ग्रामीण आवास, खादी, पेयजल, ईधन, पशु चारा, शिक्षा वाचनालय,   स्वास्थ्य और स्वच्छता, परिवार कल्याण, महिला और बाल-विकास आदि कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक संचालित किया जा सकता है। लिहाजा 15वें वित्त आयोग द्वारा शहरी और ग्रामीण निकायों के लिए प्रस्तावित बजट का सफल उपयोग हो, इसकी रूपरेखा भी सरकार को बजट में शामिल करनी चाहिए। हाल ही में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बैजनाथ की बिनवा नदी में कूड़ा कचरा फेंकने के लिए बैजनाथ-पपरोला नगर पंचायत पर 7. 50 लाख रुपयों का जुर्माना लगाया है। इस प्राचीन नदी का पानी पीने के अलावा सिंचाई के लिए भी प्रयुक्त होता है। नगर पंचायत बने चार साल हो चुके हैं, विकास कार्य ठप हैं। सरकार इस प्रकार के निकायों के पुनर्गठन पर भी विचार करे ताकि विकासात्मक कार्यों के लिए जारी बजट राशि का समय पर सही इस्तेमाल हो सके और नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। राइजिंग हिमाचल-ग्लोबल ‘इन्वेस्टर मीटÓ के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री जयराम सरकार द्वारा किए गए गंभीर प्रयास राज्य का खजाना भरने और प्रदेश के बेरोजगारों के लिए राज्य के भीतर ही रोजगार के अवसर मुहैया करवाने की दिशा में सार्थक प्रयास के रूप में सामने आए हैं। हिमाचल प्रदेश अपने पूर्ण राज्यत्व वर्ष के स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है। अब वक्त है उन संकल्पों का निर्धारण हो जिन पर चलकर प्रदेश विकसित हिमाचल बनने की राह पर अग्रसर हो। नए एयरपोर्ट बनें, फोरलेनिंग सड़कों पर काम शुरू हो। सरकार आवश्यकता के अनुसार ही नए भवनों के निर्माण पर राशि खर्च करे, खर्चे घटाए जाएं और कर्ज उठाने की प्रवृत्ति से बचने पर फोकस होना चाहिए। साल दर साल अनेक नईं घोषणाओं को करने की परिपाटी से बचते हुए सरकार को चाहिए कि पहले से घोषित सैकड़ों योजनाओं के क्रियान्वयन का रिपोर्ट कार्ड सामने लाकर केवल उन्हीं योजनाओं की घोषणाओं पर अमल करे जिनसे सीधे-सीधे प्रदेश की जनता को लाभ पहुंचता हो। कर्र्ज घटाने और आय बढ़ाने के उपायों का जिक्र भी इस बजट में यदि सरकार सामने रखे तो भला इससे बड़ी पारदर्शिता और क्या होगी।

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखको´ से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्टï, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे। 

-संपादक

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