विश्व जल बनाम जनता कर्फ्यू दिवस

By: Mar 23rd, 2020 12:06 am

कंचन शर्मा

लेखिका, शिमला से हैं

जनता कर्फ्यू के बावजूद हमारे डाक्टर,  पुलिस, मिलिट्री, भिन्न-भिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, पत्रकार, राशन, दूध, मेडिकल शाप में अनेक वालंटियर अपनी जान जोखिम में डालकर  मानवता की सेवा में लगे हैं, उनको हम सबका शत-शत नमन। क्योंकि ‘जल’  धरती पर जीने के लिए सबसे आवश्यक तत्त्व है और अगर हम घरों में बंद हो जाएं तो जलापूर्ति कैसे हो! इसी के मद्देनजर जल शक्ति विभाग मुस्तैदी, सावधानी व सुरक्षित तरीके से आमजन को जल वितरण के लिए मुस्तैदी से डटा है…

इस वर्ष जल शक्ति विभाग हिमाचल प्रदेश 22 मार्च ‘विश्व जल दिवस’ को बहुत बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी में था। गौरतलब है कि भारत सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ यानी वर्ष 2024 तक हर घर नल के मद्देनजर हिमाचल प्रदेश, देश में अव्वल चल रहा है, लेकिन कोरोना वायरस के  खिलाफ  जंग के चलते 22 मार्च को भारत की जनता कर्फ्यू दिवस मना रहा है जो जायज है क्योंकि जान है तो जहान है। एक ओर जहां कोरोना मुक्ति आंदोलन चल रहा है व प्रधानमंत्री द्वारा जहां लोगों से संकल्प, संयम व साधना से स्वयं को साधकर संपूर्ण मानवजाति को बचाने का आहवान किया है उसका पुरजोर समर्थन करते हुए आज हम सब घरों में सुरक्षित हैं, वहीं दूसरी ओर विश्व जल दिवस पर जल की स्थिति पर भी बात करना जरूरी है क्योंकि ‘जल है तो जीवन है’। आज जब पूरा विश्व कोरोना महामारी की चपेट में है, ऐसे खराब समय में भी जनता कर्फ्यू के बावजूद हमारे डाक्टर,  पुलिस, मिलिट्री, भिन्न-भिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, पत्रकार, राशन, दूध, मेडिकल शाप में अनेक वालंटियर अपनी जान जोखिम में डालकर  मानवता की सेवा में लगे हैं, उनको हम सबका शत-शत नमन। क्योंकि ‘जल’  धरती पर जीने के लिए सबसे आवश्यक तत्त्व है और अगर हम घरों में बंद हो जाएं तो जलापूर्ति कैसे हो! इसी के मद्देनजर जल शक्ति विभाग मुस्तैदी, सावधानी व सुरक्षित तरीके से आमजन को जल वितरण के लिए मुस्तैदी से डटा है। आमजन को जल की आपूर्ति होती रहे इसके लिए जल शक्ति मंत्री, हिमाचल प्रदेश द्वारा कोरोना से सावधान रहते हुए, स्वयं कार्यालय व जल स्रोतों की स्वच्छता का ध्यान रखते हुए पानी की आपूर्ति को जारी रखने के आदेश दिए हैं। इसी के तहत जल शक्ति विभाग हिमाचल प्रदेश के सभी मंडलों के अधीन जल स्रोतों, भंडारणों की साफ-सफाई तो करवाई ही जा रही है, साथ में कार्यालयों को सैनेटाइज किया जा रहा है। आमजन से विशेष अनुरोध किया जाता है कि पानी की किसी भी समस्या हेतु कार्यालय में न आकर फोन पर बात करें क्योंकि घर से बाहर निकलना मतलब अपने, अपने परिवार व समाज को मौत की ओर धकेलना है। मुझे स्वयं अपने विभाग पर गर्व है जो संकट की इस घड़ी में आज एक कर्मचारी, अधिकारी या जन-प्रतिनिधि के रूप में नहीं बल्कि मानव सेवा की भावना से सुरक्षित तरीके से कार्य कर रहा है। हालांकि कोरोना का खौफ हम सबको भी उतना ही है जितना हर एक को। साथ में आज के दिन विशेष तौर पर ‘विभाग’ जनता कर्फ्यू का समर्थन कर रहा है जो कोरोना चेन तोड़ने के लिए अत्यावश्यक है। क्योंकि संपूर्ण विश्व जल संकट के दौर से भी गुजर रहा है और 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के साथ ‘विश्व जल दिवस’ है जिसका उद्देश्य आवाम को स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है। साथ में जल संरक्षण का भी पुरजोर समर्थन करना है। कोरोना वायरस से यह विश्व निपट ले तो अगली समस्या जल की उपलब्धता ही है। जल के बाहुल्य से नीले ग्रह की संज्ञा पाने वाली पृथ्वी पर 71 प्रतिशत पानी है जिसमें 97 प्रतिशत पानी महासागरों, सागरों में है जो पीने योग्य नहीं है। बचा 3 प्रतिशत जल ग्लेशियरों, भू-जल के रूप में विद्यमान है जो हमें उपलब्ध  नहीं है। नदियों के प्रदूषण के चलते हमने पीने योग्य पानी का एक बहुत बड़ा हिस्सा खो दिया है। बचे एक प्रतिशत पानी  को हमने जनसंख्या विस्फोट, अंधाधुंध औद्योगिकीकरण, अनदेखी व लापरवाही के चलते पीने योग्य नहीं रखा है और इसमें से केवल 0.03 प्रतिशत पानी  ही उपयोग  में लिया जा पा रहा है। हर घर नल के चलते प्राकृतिक स्रोतों की अनदेखी से प्राकृतिक स्त्रोत सूख चुके हैं। ‘बड़े-बड़े तालाब’ कार पार्किंग, स्टेडियम व खेल के मैदानों में तबदील हो चुके हैं। नदियों के प्रदूषण में भारत नंबर वन चल रहा है। गांव, शहर की बावडि़यों की साफ-सफाई की परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है व आमजन जल के प्रति अपने कर्त्तव्य को भूलकर केवल जल से संबंधित विभागों पर आश्रित हो चुका है। आज बहुत जरूरी हो चुका है कि हम जल के महत्त्व को समझें। जल की उपलब्धता जहां हर मानव का अधिकार है वैसे ही जल की बूंद-बूंद बचाना भी अपना मौलिक कर्त्तव्य समझें। वर्षा जल संग्रहण को महत्त्व दें। अपने प्राकृतिक स्रोतों की सामूहिक साफ-सफाई की परंपरा को दोबारा शुरू करें। पानी का दुरुपयोग तो करें ही नहीं, साथ में पीने योग्य पानी का सिंचाई, गाडि़यां धोने या  शौचालयों में उपयोग करने से बचें क्योंकि स्वच्छ जल उपलब्ध करवाने में  सरकार के करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। इसके लिए वर्षा जल संग्रहण घर-घर, गांव-गांव महत्त्व देना होगा ताकि जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो। इतिहास गवाह है  कि जब-जब भी मनुष्य ने प्रकृति के संसाधनों की अनदेखी की, अवहेलना व दुरुपयोग किया उसे इसके परिणाम भुगतने पड़े हैं। नहीं तो आज के दिन हम कोरोना वायरस के डर से घरों में बंद न होकर सामान्य जीवन उत्सव मना रहे होते। जल को लेकर भी यही विश्व धारणा बन चुकी है कि अगर मनुष्य जल के प्रति लापरवाह रहा तो तृतीय विश्व युद्ध तो होगा ही, साथ में कोरोना वायरस से भी भयंकर  स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे। 

-संपादक

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