बुजुर्गों के लिए वरदान पंचवटी योजना : जीवन धीमान, लेखक नालागढ़ से हैं

By: Jul 9th, 2020 12:06 am

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जीवन धीमान

लेखक नालागढ़ से हैं

इन पार्कों में औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही यहां पैदल पथ, मनोरंजन के उपकरण और अन्य बुनियादी सुविधाएं देने का भी प्रयास किया जाएगा। 14वें वित्त आयोग में न्यूनतम एक बीघा की समतल भूमि से ही इन बागीचों का निर्माण होगा। योजना के जरिए मनरेगा के मजदूरों को कामकाज मिलेगा, जिसके जरिए उनका भी भरण-पोषण होगा। सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सभी 78 खंडों में मनोरंजक स्थान बनाने को 100 पंचवटी पार्क और उद्यान स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है…

बुढ़ापा जीवन का अंतिम पड़ाव है और इस पड़ाव में जीवन असक्त हो जाता है। कार्य करने की क्षमता कमजोर हो जाती है। भरण-पोषण के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। यही निर्भरता वृद्धों की समस्याओं की मूल है। शारीरिक एवं आर्थिक दृष्टि से घुटन होने लगती है। उम्र बढ़ने से बुढ़ापे में स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं। 60 की उम्र के बाद आम तौर पर मान लिया जाता है कि अब तो रिटायर्ड हो गए। मतलब अब थकान भरा बोझिल जीवन जीने का समय आ गया। लेकिन ऐसे लोगों की कमी नहीं, जो 70-80 साल में भी बिलकुल फिट दिखते हैं और अपने दैनिक कार्यों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहते। बढ़ती उम्र के साथ हर व्यक्ति के मन में आशंका रहने लगती है कि बुढ़ापा आने वाला है, कुछ बदलाव तो उम्र के साथ होते हैं। लेकिन खराब जीवन शैली तथा शारीरिक श्रम के अभाव में व्यक्ति कुछ समस्याओं को खुद निमंत्रण देता है। उनकी समस्याएं भी अलग होती हैं। हिमाचल प्रदेश में बहुत सारी सरकारी लोक कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं। जैसे कि मुख्यमंत्री पेंशन योजना, छात्रवृत्ति प्रोत्साहन योजना, बेरोजगारी भत्ता, सीएम आवास योजना, मुफ्त जन स्वास्थ्य योजना, युवा आजीविका योजना, हिम केयर हैल्थ स्कीम आदि। इन सभी योजनाओं से आम नागरिकों को बहुत फायदा हुआ है। परंतु कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इन योजनाओं के बारे में समय से नहीं जान पाते, जिसके कारण उन्हें इन सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी इलाका है। ऊबड़-खाबड़ रास्ते और ऊंचाई होने की वजह से यहां सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों को ही होती है। अपनी भरपूर जवानी में कार्य करने के बाद हर शख्स चाहता है कि उसका बुढ़ापा आसानी से गुजरे। लेकिन वे अपनी वृद्ध अवस्था के चलते घर में ही कैद होकर रह जाते हैं। ऐसे में सरकार का उद्देश्य इन बुजुर्गों को मनोरंजन की जगह के साथ-साथ सेहतमंद रखने का है। तभी तो पंचवटी योजना की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के वरिष्ठ नागरिकों के लिए पंचवटी योजना का शुभारंभ किया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को मनोरंजन के साथ पार्क और बागीचों की सुविधा उपलब्ध करवाना है। पंचवटी योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के प्रत्येक विकास खंड में सभी आवश्यक सुविधाओं से लैस पार्क और उद्यान स्थापित करेगी। राज्य सरकार चालू वित्त वर्ष में राज्य में ऐसे 100 पार्क खोलने पर विचार कर रही है। इस योजना में प्रत्येक बागीचे के निर्माण पर पांच से 10 लाख रुपए का खर्चा आएगा। हिमाचल प्रदेश में बनाए जाने वाले इन पार्कों के निर्माण के जरिए बुजुर्गों को एक ऐसी जगह  दी जाएगी, जहां वे अपने खाली समय में अपनी सेहत का ध्यान रख सकें।

इन पार्कों में औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही यहां  पैदल पथ, मनोरंजन के उपकरण और अन्य बुनियादी सुविधाएं देने का भी प्रयास किया जाएगा। 14वें वित्त आयोग में न्यूनतम एक बीघा की समतल भूमि से ही इन बागीचों का निर्माण होगा। योजना के जरिए मनरेगा के मजदूरों को कामकाज मिलेगा, जिसके जरिए उनका भी भरण-पोषण होगा। सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सभी 78 खंडों में मनोरंजक स्थान बनाने को 100 पंचवटी पार्क और उद्यान स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पंचायतीराज और ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र कंवर के अनुसार इन पार्कों पर प्रारंभिक कार्य कुछ जगह पर शुरू किया गया है। हर पार्क में अत्याधुनिक व्यायाम और मनोरंजन के उपकरण, एक मीटर चौड़ा और 150 मीटर लंबा जॉगिंग ट्रैक, पैदल चलने का ट्रैक, योग और ध्यान की कक्षाओं के लिए एक विशेष स्थान, महिलाओं और पुरुषों के लिए शौचालय और सोलर लाइट होगी। इसका उद्देश्य उनकी स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ नागरिकों की जीवन प्रत्याशा में सुधार करना है। इसे ग्रामीण विकास की मनरेगा योजना के तहत क्रियान्वित किया जाएगा। प्रदेश में चालू वित्त वर्ष में ही 100 बागीचों का निर्माण किया जाएगा। इसके पहले चरण का शुभारंभ आठ जून 2020 को किया गया था। पहले चरण में जिला मंडी के विकास खंड गोहर में पार्कों के निर्माण को भूमि चिन्हित की गई है। पंचवटी योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका बेहतर होगी। पार्कों में औषधीय पौधे जैसे नीम, आंवला, तुलसी और एलोवेरा लगाए जाएंगे, जिनका उचित इस्तेमाल हो सकेगा। राज्य की 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में ही रहती है, लिहाजा इस योजना का लाभ सबसे अधिक भी उन्हें होगा। कोरोना के समय में जहां लोग दूसरे राज्यों से अपने राज्यों में पलायन कर चुके हैं, ऐसे में इस योजना के जरिए मनरेगा के मजदूरों को काम मिलेगा जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। आशा करनी चाहिए कि इस योजना के जरिए बुजुर्गों को वे सभी सुविधाएं मिल जाएंगी जिनकी जरूरत इस अवस्था में सभी को होती है। इसके जरिए बुजुर्ग लोग अपना बुढ़ापा हंसते-खेलते बिता सकेंगे और वे तनाव से भी दूर रहेंगे। इस योजना का क्रियान्वयन तीव्र गति से होना चाहिए।

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