प्रशिक्षक कैडर के साथ अन्याय क्यों? : भूपिंद्र सिंह, राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

Bhupinder Singh राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक By: भूपिंद्र सिंह, राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक Sep 4th, 2020 12:06 am

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

50 प्रतिशत युवा संयोजक व 25 प्रतिशत पद हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरे जाते हैं। प्रशिक्षक बनने की योग्यता बहुत कठिन है। स्नातक डिग्री के साथ जो प्रतिभागी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हो या तीन बार वरिष्ठ राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व किया हुआ हो या शारीरिक शिक्षा में स्नातकोत्तर डिग्री के साथ अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में खेला हो, उसके बाद राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान में प्रवेश परीक्षा पास कर एक वर्ष के कठिन प्रशिक्षण व शिक्षण के बाद प्रशिक्षक बनता है। पिछली बार हुई भर्ती में  विभाग ने नियमों को ठेंगा दिखा कर छह सप्ताह में प्रशिक्षण पूरा किए सर्टिफिकेट कोर्स वाले को प्रशिक्षक भर्ती कर दिया है…

किसी भी विषय को सही तरीके से पढ़ाने के लिए उस विषय का शिक्षक जरूरी होता है, उसी तरह हर खेल को सिखाने के लिए उस  खेल का प्रशिक्षक चाहिए होता है। विद्यालयों व महाविद्यालयों में नियुक्त शारीरिक शिक्षा के शिक्षक इस कार्य को नहीं कर सकते हैं। इसलिए अलग से राज्यों में खेल विभागों का गठन हुआ। आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल परिणाम अपने उच्च स्तर तक पहुंच गए हैं। इस स्तर को प्राप्त करने के लिए राज्य में जहां जिस-जिस खेल की सुविधा उपलब्ध है, वहां पर उस खेल का प्रशिक्षक नियुक्त होना चाहिए। आज हिमाचल प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर विभिन्न खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्ले फील्ड उपलब्ध हैं। वहां पर सम्मानजनक तरीके से प्रशिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश के इस विभाग में प्रशिक्षकों की पदोन्नति व पूर्व सैनिक आरक्षित पदों पर नियुक्त प्रशिक्षकों का दशकों बाद भी वेतन निर्धारण नहीं हुआ है।

हिमाचल प्रदेश में खेलों के उत्थान के लिए अस्सी के दशक के शुरू में हिमाचल प्रदेश युवा सेवाएं एवं खेल विभाग का गठन हुआ। इस विभाग में निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप निदेशक, जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारियों, प्रशिक्षकों, एकनिष्ठ प्रशिक्षकों व युवा संयोजकों के पद सृजित हैं।  विभाग का कार्य प्रदेश में युवा गतिविधियों व खेलों का विकास करना है। हिमाचल प्रदेश में यह विभाग खेल  प्रशिक्षण, खेलों के लिए आधारभूत ढांचा व राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता होने पर नगद पुरस्कार व अवार्ड देने के लिए बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश के इस विभाग का निदेशक प्रशासनिक सेवा से ही अधिकतर नियुक्त होता रहा है, केवल विशेष परिस्थितियों में ही आज तक दो बार ही विभागीय अधिकारी निदेशक पद तक पहुंच पाए हैं। उपनिदेशक और कभी-कभी संयुक्त निदेशक पद तक विभाग के प्रशिक्षक व युवा  संयोजक पदोन्नत होकर पहुंच जाते हैं। इन विभागीय अधिकारियों को अधिक तकनीकी जानकारी होती है। हाल ही में हुई एक उपनिदेशक की सेवानिवृत्ति के बाद आज हिमाचल प्रदेश युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के पास कोई भी उपनिदेशक नहीं है। नियमित जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारी भी केवल चार ही जिलों में हैं। राज्य के शेष जिलों में कामचलाऊ अधिकारी बिठा रखे हैं। सरकार को चाहिए कि जल्दी ही उपनिदेशक के पद पर नियमित पदोन्नति की जाए तथा जिलों में भी नियमित अधिकारी हों। इस समय जो प्रशिक्षक जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारी के पद पर तदर्थ कार्य कर रहे हैं, उन्हें एकमुश्त नियमों में छूट देकर नियमित अधिकारी बना दिया जाए। विभाग में नाममात्र के प्रशिक्षक हैं।

अधिकतर खेलों में तो एक भी प्रशिक्षक पूरे जिले के लिए उपलब्ध नहीं है। विभाग में जो प्रशिक्षक नियुक्त हैं, उन्हें कनिष्ठ प्रशिक्षक के पद पर नियुक्ति मिली है। उसके बाद वे सेवानिवृत्ति तक भी प्रशिक्षक नहीं बन पाए हैं। विभाग में नियुक्त प्रशिक्षकों को जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारी पद पर पदोन्नति के लिए केवल 25 प्रतिशत ही कोटा है। 50 प्रतिशत युवा संयोजक व 25 प्रतिशत पद हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरे जाते हैं। प्रशिक्षक बनने की योग्यता बहुत कठिन है। स्नातक डिग्री के साथ जो प्रतिभागी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हो या तीन बार वरिष्ठ राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व किया हुआ हो या शारीरिक शिक्षा में स्नातकोत्तर डिग्री के साथ अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में खेला हो, उसके बाद राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान में प्रवेश परीक्षा पास कर एक वर्ष के कठिन प्रशिक्षण व शिक्षण के बाद प्रशिक्षक बनता है। पिछली बार हुई भर्ती में  विभाग ने नियमों को ठेंगा दिखा कर छह सप्ताह में प्रशिक्षण पूरा किए सर्टिफिकेट कोर्स वाले को प्रशिक्षक भर्ती कर दिया है। सेवा नियमों में एक समय एमपीएड के साथ कंडैंस कोर्स जो छह माह का होता था, उसे पास किया हुआ प्रशिक्षक के पद के लिए योग्य था, न कि छह सप्ताह का सर्टिफिकेट कोर्स किया हुआ। भविष्य में इस तरह का गोलमाल नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे हिमाचल प्रदेश की खेल जगत में काफी खिल्ली उड़ी है। हिमाचल प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह प्रदेश में नियुक्त कनिष्ठ प्रशिक्षकों को पांच साल के बाद प्रशिक्षक के पद पर पदोन्नत कर 50 प्रतिशत कोटा जिला अधिकारी पद पर पदोन्नति के लिए दिया जाए, क्योंकि प्रशिक्षकों की संख्या बहुत अधिक है। अगर हर खेल में जिला स्तर पर पांच प्रशिक्षक भी हों तों प्रशिक्षकों की संख्या सौ से भी अधिक जा सकती है।

इसके मुकाबले बारह जिलों में बारह ही युवा संयोजक नियुक्त हैं। इस तरह देखा जाए तो यह प्रशिक्षकों के साथ बहुत अन्याय है। प्रदेश में विभिन्न खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्ले फील्ड तो पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में बन गई थी, मगर उनका न तो सही रखरखाव है और न ही उन पर उस स्तर का प्रशिक्षण कार्यक्रम हो रहा है। हिमाचल प्रदेश में युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के दो खेल छात्रावास बिलासपुर व ऊना में कुछ चुनिंदा खेलों के लिए आधा-अधूरा प्रशिक्षण दे रहे हैं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करवाने वाले प्रशिक्षकों की कमी व प्रबंधन में अव्यवस्था साफ  देखी जा सकती है। उत्कृष्ट खेल परिणाम दिलाने वाले प्रशिक्षक बहुत कम हैं। कई वर्षों के गहन शिक्षण व प्रशिक्षण के अनुभव वाला प्रशिक्षक ही राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जिताने की क्षमता रखता है। इसलिए आज भारत सरकार व कई राज्य अपने यहां नियमित अनुभवी विशेषज्ञ प्रशिक्षक न होने के कारण अनुभवी विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को अपने यहां उच्च खेल परिणाम देने वाले प्रशिक्षण केंद्रों में अनुबंधित कर रहे हैं। राज्य के इस विभाग में प्रशिक्षकों के साथ न्याय करने के लिए इनके भर्ती व पदोन्नति नियमों में संख्या अनुपात में संशोधन करना बहुत जरूरी  है।

ईमेलः bhupindersinghhmr@gmail.com

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