हिमाचल में खेल विंग कब खुलेंगे : भूपिंदर सिंह, राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

Bhupinder Singh राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक By: भूपिंदर सिंह, राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक Oct 16th, 2020 12:06 am

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी बिलासपुर व ऊना में विभिन्न खेलों के लिए छात्रावास चलाए हैं। बिलासपुर से महिला कबड्डी में पहले स्वर्गीय दौलत व उसके बाद रतन ठाकुर ने अच्छा प्रशिक्षण कार्यक्रम चला कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अच्छे परिणाम दिए हैं। एशिया स्तर पर पदक विजेता रितू नेगी सहित कई महिला खिलाडि़यों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इसके अलावा भी कई प्रशिक्षक व खिलाड़ी हैं जिनकी उपलब्धियां शानदार रही हैं। हिमाचल प्रदेश के दूरदराज शिक्षा संस्थानों में भी उपलब्ध खेल सुविधा के अनुसार खेल विंग खुलने चाहिए। इससे यहां खेलों को गति मिलेगी…

हिमाचल प्रदेश में पहले से चल रहे खेल छात्रावासों के अतिरिक्त और कई जगह खेल छात्रावास खोलने के लिए बहुत अधिक धन व संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। हिमाचल प्रदेश में पहाड़ अधिक होने के कारण यहां एक स्थान पर बड़े मैदान खेल के लिए उपलब्ध नहीं हो सकते हैं। इसलिए कई खेलों के लिए एक जगह खेल छात्रावास बनाना  कठिन कार्य है। इसलिए यहां पर सुविधा व प्रतिभा के अनुसार खेल विंग कामयाब हो सकते हैं। पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के तत्कालीन खेल निदेशक डा. राज कुमार ने विश्वविद्यालय परिसर व विभिन्न महाविद्यालय में खेल सुविधा के अनुसार खेल विंग चलवा कर अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय खेलों की प्रतिष्ठित मौलाना अबुल कलाम ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया था। पंजाब ने एक समय खेल विंगों के माध्यम से खेलों में श्रेष्ठतम स्थान प्राप्त किया हुआ था। प्रतिभा व सुविधा के अनुसार हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में भी सरकार खेल विंग खोलती है तो भविष्य में  हिमाचल के खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। हिमाचल प्रदेश के कई महाविद्यालयों के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल ढांचा तैयार खड़ा यूं ही बेकार हो रहा है। इस कॉलम के माध्यम से पहले भी इस विषय पर बार-बार लिखा जा चुका है, मगर सरकार का रवैया उदासीन रहा है। खेल विंगों के लिए सरकार को न तो खेल ढांचा खड़ा करना पड़ता है और  न ही नया छात्रावास बनाना पड़ता है। केवल खेल विशेष का प्रशिक्षक और खिलाडियों के लिए खुराक व रहने का प्रबंध करना होता है जो आसानी से बहुत कम धन राशि खर्च करके हो सकता है। राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर, धर्मशाला व बिलासपुर में एथलेटिक्स के विंग आसानी से चल सकते हैं क्योंकि यहां तीनों जगह सिंथेटिक ट्रैक हैं। स्कूलों में भी यहां पर एथलेटिक्स की नर्सरियां स्थापित हो सकती हैं।

ऊना तथा मंडी में तैराकी के लिए तरणताल उपलब्ध हैं। शिलारू व ऊना में एस्ट्रोटर्फ  हाकी के बिछी हुई है। हिमाचल प्रदेश में विभिन्न खेलों का स्तर राज्य में खेल छात्रावासों के खुलने के बाद काफी सुधरा है। स्कूली स्तर पर खेल छात्रावासों को आज से तीन दशक पहले शुरू कर दिया गया था। पपरोला के बास्केटबॉल खेल छात्रावास ने एक समय तक अच्छे परिणाम दिए हैं। हाकी में माजरा स्कूली खेल छात्रावास की लड़कियों ने पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय स्कूली खेलों में हिमाचल प्रदेश को पदक तालिका में स्थान दिलाया है।

यदि इन लड़कियों को एस्ट्रोटर्फ  मिलता है तो बात कुछ और हो सकती है। क्या इस खेल छात्रावास को फिडिंग रख कर अच्छे खिलाडि़यों को एस्ट्रोटर्फ पर प्रशिक्षण के लिए ऊना में एक और नया स्कूल स्तर पर लड़के व लड़कियों के लिए छात्रावास जल्द ही हिमाचल प्रदेश का शिक्षा विभाग खोल नहीं सकता है।  स्कूल स्तर की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिमाचल प्रदेश का प्रदर्शन सम्मानजनक खेल छात्रावासों के कारण रहता है। हिमाचल प्रदेश में स्कूली स्तर पर पपरोला में लड़कों के लिए बास्केटबॉल, सुंदरनगर व नादौन में लड़कों की हाकी, माजरा में लड़कियों के लिए हाकी में खेल छात्रावास चल रहे हैं। वालीबॉल में स्कूली स्तर पर प्रशिक्षण का अच्छा प्रबंध है। मतियाणा व रोहडू में लड़कों को तथा कोटखाई में लड़कियों के लिए खेल छात्रावासों को वर्षों पहले से शुरू किया गया है। महाविद्यालय स्तर पर खेल विंग न होने के कारण हमारे अधिकतर खिलाड़ी पड़ोसी राज्यों के खेल विंगों को पलायन कर जाते हैं। स्कूली खेल छात्रावासों में अच्छे प्रशिक्षकों के साथ-साथ खेल सुविधाओं में काफी सुधार की जरूरत है। हिमाचल प्रदेश में भारतीय खेल प्राधिकरण ने तीस वर्ष पहले शिलारू में विशेष खेल क्षेत्र योजना के अंतर्गत खेल छात्रावास शुरू किया था जो राष्ट्रीय स्तर पर अच्छे परिणाम देने के बावजूद बंद हो गया था। उसी समय बिलासपुर व धर्मशाला में भारतीय खेल प्राधिकरण ने खेल छात्रावासों की शुरुआत की और ये आज तक चल रहे हैं। बिलासपुर में साई के तत्कालीन वॉलीबाल प्रशिक्षक स्वर्गीय एनके शर्मा ने  बंगाणा क्षेत्र के सुरजीत सहित कई अंतरराष्ट्रीय खिलाडि़यों को तराश कर भविष्य के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। कबड्डी में साई प्रशिक्षकों में नंदलाल ठाकुर ने अपने कार्यकाल में अच्छा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया है। एथलेटिक्स में स्वर्गीय बलदेव सिंह, जीआर मेहता व स्वर्गीय सतीश कुमार ने यहां से अच्छे धावक व धाविकाओं को प्रशिक्षित कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर का सफर तय करवाया है। अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी पद्मश्री व अर्जुन अवार्ड से सम्मानित अजय ठाकुर, धावक अमन सैनी व स्वर्गीय कमलेश कुमारी बिलासपुर साई खेल छात्रावास की देन हैं।

धर्मशाला खेल छात्रावास से साई प्रशिक्षक मेहर चंद वर्मा ने कबड्डी में पूजा ठाकुर व कविता ठाकुर को एशियायी खेलों के स्वर्ण पदक विजेता टीम का सदस्य बनने का सफर अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम से पूरा करवाया है। एथलीट प्रशिक्षक केहर सिंह पटियाल का प्रशिक्षण कार्यक्रम भी काफी सफल रहा है। धाविका सीमा ने एशिया स्तर पर कांस्य पदक जीता है तथा यूथ ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी बिलासपुर व ऊना में विभिन्न खेलों के लिए छात्रावास चलाए हैं। बिलासपुर से महिला कबड्डी में पहले स्वर्गीय दौलत व उसके बाद रतन ठाकुर ने अच्छा प्रशिक्षण कार्यक्रम चला कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अच्छे परिणाम दिए हैं। एशिया स्तर पर पदक विजेता रितू नेगी सहित कई महिला खिलाडि़यों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इसके अलावा भी कई प्रशिक्षक व खिलाड़ी हैं जिनकी उपलब्धियां शानदार रही हैं। हिमाचल प्रदेश के दूरदराज शिक्षा संस्थानों में भी उपलब्ध खेल सुविधा के अनुसार खेल विंग खुलने चाहिए। हिमाचल प्रदेश में अधिक से अधिक खेल विंग खुलते हैं तो यहां खेलों को गति मिलेगी।

ईमेलःbhupindersinghhmr@gmail.com

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