नीरू घास जिसने पहाड़ी पशु को बनाया वर्ल्ड क्लास

By: Dec 27th, 2020 12:08 am

पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय में अपना फोरेज गार्डन तैयार हो गया है, जिसमें एक से बढ़कर एक घास लहलहा रहा है। पेश है यह खबर…

हिमाचल की ऊंची चोटियों पर कुछ ऐसे घास होते हैं, जिनके चरने से पहाड़ी पशुओं का मीट विश्व स्तरीय आंका जाता है। इन्हीं घासों को सहेजने के लिए कृषि विश्वविद्यालय ने अनूठा प्रयोग किया है। अपनी माटी के लिए हमारे सीनियर जर्नलिस्ट जयदीप रिहान ने कृषि विश्वविद्यालय का दौरा किया। वहां पता चला कि यूनिवर्सिटी ने अपना फोरेज गार्डन तैयार किया है, जिसमें ऊंची चोटियों पर पाए जाने वाले घास हैं। मसलन इसमें नीरू घास प्रमुख है। यह वह घास है, जिसके खाने से पहाड़ी पशु का मांस वर्ल्ड क्लास आंका गया है। यूनिवर्सिटी की पहल कामयाब हो रही है, जिससे आने वाले समय में हमारे किसान और बागबान भाइयों को यह घास आसानी से मिल सकेगा। हमारी टीम ने कुलपति हरिंद्र कुमार चौधरी से बात की। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में फोरेज गार्डन किसानों का बड़ा मददगार साबित होगा। इस गार्डन में कई तरह की किस्मों के हैल्दी घास तैयार किए जाएंगे, ताकि हिमाचल में पशुधन को और मजबूत और समृद्ध किया जा सके।

पालमपुर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी का फोरेज गार्डन तैयार, ऊंची चोटियों पर होने वाला नीरू घास बना आकर्षण

9 करोड़ किसानो के बैंक खाते में आया 18  हज़ार करोड़

सांसद के बोल, किसानों की बेहतरी के लिए काम कर रही है केंद्र की भाजपा सरकार  

मंडी- देश के नौ करोड़ किसानों के बैंक खातों में प्रधानमंत्री किसान निधि योजना के माध्यम से 18 हजार करोड़ रुपए केंद्र सरकार ने जमा करवा दिए हैं। 25 दिसंबर शुक्रवार को केंद्र सरकार ने देश के नौ करोड़ किसानों को यह सौगात दी। इस बात की जानकारी देते हुए सांसद राम स्वरूप शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों की सीधे तौर पर मदद की है। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों ने किसानों का शोषण किया तथा हमेशा बिचौलिए और दलालों के बीच में फंसा के रखा था। 2013-14 में खाद्यान्न उत्पादन 265.05 मिलियन टन था, जो 2019-20 में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज करते हुए 296.65 मिलियन टन हो गया है। 2013.14 में कृषि बजट 21933 था, जिसे बढ़ाकर 2019-20 में 134399 करोड़ रुपए किया गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना वृद्धि की गई है, जबकि किसानों के लिए एमएसपी का भुगतान समय पर किया गया। 22.57  करोड़ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। पीएम किसान निधि योजना के माध्यम से 15 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 95979 करोड़ रुपए अब तक केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फ सल बीमा योजना के तहत 6-6 करोड़ किसानों को 8700 करोड़ का भुगतान किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की भलाई के लिए कृषि बिल पारित किया। यह किसान हितैषी बिल विपक्षी दलों को रास नहीं आ रहा है तथा वह किसानों को भ्रम जाल में डालकर इसका विरोध करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश का 90 फीसदी किसान नए कृषि बिल के समर्थन में है। इस बिल से जहां किसानों को बिचौलियों और दलालों से निजात मिलेगी, वहीं अपनी फसल को खुले बाजार में भी बेच सकते है।

किसान सम्मान निधि की रिकवरी पर कटघरे में हिमाचल सरकार

कांग्रेस ने पूछा, वोट की खातिर बिना पड़ताल डाले थे दो-दो हजार

शिमला, धर्मशाला। हिमाचल में 11 हजार 853 परिवारों से किसान सम्मान निधि के पैसे की रिकवरी होनी है। पड़ताल में पता चला है कि ये वे परिवार हैं, जो किसान सम्मान निधि के सालाना छह हजार रुपए के लिए डिजर्व नहीं करते थे, लेकिन उन्होंने इस निधि के लिए अप्लाई किया। अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व आरडी धीमान ने बताया कि सरकार अब इस पैसे की रिकवरी करने जा रही है। यह कुल रिकवरी 11 करोड़ 55 लाख बनती है। दूसरी ओर इस मसले पर प्रदेश में राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस रिकवरी को गलत ठहराया है। हिमाचल कांग्रेस ने बड़ा सवाल उठाते हुए प्रदेश सरकार से पूछा है कि आखिर उस समय बिना पड़ताल के क्यों पैसा लोगों के खाते में डाल दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उस समय भाजपा सरकार ने लोगों से लोकसभा चुनावों में वोट पाने की खातिर ऐसा किया था। जनता भाजपा को कभी माफ नहीं करेगी।

पत्ते पीले पड़ते ही निकाल लें अदरक का बीज नौणी यूनिवर्सिटी ने दिया किसानों को अचूक मंत्र

हिमाचल के लिए अदरक की फसल बड़े मायने रखती है, लेकिन सड़न रोग से इसके बीज का बड़ा हिस्सा बेकार हो जाता है। प्रदेश के हजारों किसानों की उधेड़बुन को खत्म करने के लिए अपनी माटी लाई है यह खास खबर

हिमाचल में किसान अकसर शिकायत करते हैं कि अदरक के बीज को सड़न लग गई है। बीज के सड़ने से दो नुकसान होते हैं। एक तो बीज कम रह जाता है, दूसरे आगामी फसल के बंपर होने की गारंटी छिन जाती है। अपनी माटी टीम के पास लगातार किसान ऐसी शिकायत लेकर भाई संपर्क कर रहे थे। इस पर हमारी टीम ने नौणी यूनिवर्सिटी का दौरा किया। वहां हमारी सहयोगी मोहिनी सूद ने वैज्ञानिक डा. मनीष शर्मा से बात की। डा मनीष ने कहा कि गट्ठियों के तुड़ान के समय किसान भाइयों को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि गट्ठियों के भंडारण से पैदावार कई गुना बढ़ सकती है। सड़न का एक ही कारण है और वह है गट्ठियों का भंडारण न होना। डा. मनीष ने कहा कि अदरक कि गट्ठियों को तब निकालना चाहिए, जब उसके ऊपर के कुछ पत्ते हरे और कुछ पत्ते पीले हो जाएं। इसके अलावा अदरक को पाला पड़ने से पहले ही निकाल लेना चाहिए। पाले से फसल को काफी नुकसान होता है। इसके बाद 50 लीटर पानी के टब में उचित मात्रा में फफूंदी नाशक को 125 ग्राम मात्रा में डाले।  गट्ठियों के उपचार करने के लिए उन्हें 48 घंटों के लिए छाया में सुखाना है। ऐसा करने से बीज सुरक्षित रहेगा। तो किसान भाइयो, आपको कैसी लगी हमारी यह स्टोरी। हमें जरूर अपना फीडबैक दें।

रिपोर्टः निजी संवाददाता, नौणी

एक किलो अदरक पर आता है 40 रुपए खर्च पर सिरमौरी अदरक बिक रहा आठ रुपए

इसे सिरमौर जिला के किसानों का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि इस बार उनके अदरक को भाव नहीं मिल पा रहा है। जिला में लगातार तेजी से अदरक के दाम गिर रहे हैं। पचास से कम होते होते अब सिरमौर के अदरक के दाम आठ से दस रुपए किलो तक आ गए हैं। किसानों का कहना है कि एक किलो अदरक पर 40 रुपए खर्च आता है। ऐसे में आठ रुपए किलो फसल बिकने से उन्हें भारी घाटा हो रहा है। कई किसानों का कहना है कि काश, अदरक का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय हो जाए, तो हिमाचल में इस फसल की यूं दुर्गति न हो। किसानों का कहना है कि बीते वर्ष मार्च माह में अदरक की फसल 70 प्रति किलो तक बिकी थी, लेकिन इन दिनों हालत खराब है। कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन इसमें मेहनतकश किसानों का क्या दोष। खैर, कुछ किसान अदरक को खाती में पारंपरिक तरीके से स्टोर कर रहे हैं। सवाल फिर वहीं है। अगर किसानों को सम्मानजनक रेट मिल जाए, तो यह सारा झंझट ही खत्म हो जाए।  दूसरी ओर किसान सभा के जिला अध्यक्ष रमेश वर्मा ने मांग उठाई है कि अदरक का समर्थन मूल्य 50 रुपए किलो होना चाहिए।

देश भर में एमएसपी के मसले पर किसान आंदोलन चल रहा है। प्रदेश के सिरमौर जिला से भी अदरक के कम दामों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य के मसले को बुलंद कर दिया है

कोरोना ने नौकरी छीन ली, पर  मशरूम उगाकर किया कमाल

कहते हैं अगर एक द्वार बंद हो जाए,तो भगवान दस नए द्वार खोल देता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है कांगड़ा जिला में भवारना इलाके के एक नौजवान ने। पेश है यह खबर

कोरोना काल में बहुत से लोगों की नौकरी छिन गई है, तो क इयों के कारोबार का भट्ठा बैठ गया है, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर अपने आप को फिर से स्टैंड कर लिया है।   अपनी माटी के इस अंक में हमारे सीनियर जर्नलिस्ट जयदीप रिहान आपको ऐसे ही एक युवा से मिलाने जा रहे हैं। भवारना निवासी नीरज कटोच करीब डेढ़ दशक से दिल्ली में नौकरी कर रहे थे। कोविड का समय आया तो वह भी नौकरी से हाथ धो बैठे और वापस लौट आए। नीरज निराश नहीं हुए और उन्होंने जून  माह से दैहण में एक भवन लेकर उसमें मशरुम उगाना शुरू कर दिया। पहले ट्रायल में शानदार नतीजे मिले, तो अब नीरज ने उत्साहित होकर मशरूम की कामर्शियल खेती करने की ठान ली है। इसमें भी उन्हें खूब कामयाबी मिल रही है। इस प्रोजेक्ट के जरिए नीरज ने क्षेत्र के तीन युवकों को भी काम दिया है और लोगों को नई राह दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह आने वाले समय में मशरूम की मार्केटिंग की भी व्यवस्था करेंगे।

 रिपोर्टः कार्यालय संवाददाता, पालमपुर

किसानों को मिटटी झाड़कर दी जा रही प्याज की पनीरी, एक कनाल में पड़ेगी 10 किलो की जरूरत

प्रदेश में इन दिनों प्याज की पनीरी को रोपने का दौर है। इस मसले को लेकर अपनी माटी टीम ने किसानों के लिए प्याज की पनीरी का हिसाब किताब खंगालने का प्रयास किया है। पेश है हमीरपुर से यह खबर

हिमाचल में इन दिनों प्याज की पनीरी रोपने का दौर है। किसान भाई लगातार खेतों में या तो पनीरी रोप रहे हैं या फिर खेत तैयार कर रहे हैं। प्याज की पनीरी को लेकर हमारी टीम ने हमीरपुर के कृषि विज्ञान केंद्र बड़ा का दौरा किया। बड़ा केंद्र में करीब 15 क्विंटल प्याज की पनीरी तैयार हुई है। यह पनीरी किसानों को 150 रुपए किलो दी जा रही है।  खास बात यह कि किसानों को पनीरी मिट्टी झाडक़र दी जा रही है। ऑर्गेनिक तरीके से तैयार पनीरी में बीमारियां कम लगने की आशंका है। किसान दिसंबर व जनवरी माह में प्याज की पनीरी लगा सकेंगे। एक किलो प्याज की पनीरी एक मरले भूमि में लगा सकते हैं और एक कनाल भूमि में 15 से 20 किलो पनीरी की जरूरत पड़ेगी। बहरहाल इस पनीरी की डिमांडहमीरपुर के अलावा कांगड़ा, ज्वालामुखी और मंडी जिला से भी आ रही है। इस केंद्र पर किसानों का भरोसा बढ़ रहा है।

 रिपोर्टः निजी संवाददाता, बड़ा

चलाहर-गुलाड में नकदी फसलों से किसान मालामाल

मंडी — प्रदेश फसल विविधीकरण  प्रोत्साहन परियोजना के जिला प्रबंधक  डा. नवनीत सूद का कहना है कि चलाहर से गुलाड़ परियोजना के कुछ प्रगृतिशील किसान कन्हैया लाल, सतीश कुमार और नरेंद्र कुमार ने खरीफ  2020 में पांच बीघा, 3-5 बीघा, चार बीघा में टमाटर उगाकर 5.5  लाख, चार लाख और 4.5 लाख कमाए। इस वर्ष रबी 2020 में कन्हैया लाल ने दस बीघा में, सतीश कुमार ने 5-5 बीघा  और नरेंद्र कुमार ने 5 बीघा में मटर उगा कर सब्जियों के अंतर्गत क्षेत्र को बढ़ाया है। इनका कहना है कि वे लोग अगले वर्ष सब्जियों के अंतर्गत और क्षेत्र बढ़ाएंगे और दूसरों को भी प्रोत्साहित करेंगे।

सीधे खेत से

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