आत्मकथा: घोटाला उजागर करते ही कैसे छोड़ना पड़ा था केंद्रीय मंत्री पद

By: Feb 25th, 2021 12:08 am

पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की आत्मकथा का हर पन्ना नेताओं पर मारने लगा विषैले डंक, उपलब्धियों के गौरव पर पार्टी ने डाला पानी

सुशील, जयदीप — दिल्ली, पालमपुर

पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की आत्मकथा कई राजनीतिक विस्फोट करने जा रही है। ‘निज पथ का अविचल पंथी’ के जैसे-जैसे पन्ने खोल रहे हैं, कई छुपे राज बाहर निकल रहे हैं। जीवनकाल में जिस तरह हर घटना पर बेबाकी से राय रखी, पुस्तक में भी वैसे ही संस्मरण मिल रहे हैं। किताब का सबसे अहम हिस्सा यह बता रहा है कि शांता कुमार ने अपने पूर्ववर्ती केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडु के कार्यकाल के दौरान करीब 190 करोड़ रुपए के कथित घोटाले को किस तरह बेनकाब किया है। शांता कुमार बता रहे हैं जैसे ही उन्होंने बताया कि कैसे सरकार को भारी चूना लगा है, उन्हें वाजपेयी कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा था। चूंकि उन्होंने 2019 में राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी। लिहाजा आज वह ऐसा खुलासा कर सके।

 वैंकेया देश के उपराष्ट्रपति पद पर आसीन हैं। इसके अलावा, कोरोना काल के दौरान उन्होंने लगातार 40 दिनों तक सोशल मीडिया पर जो पोस्ट लिखी थीं, उनका उल्लेख भी किया गया है। शांता कुमार मुख्यमंत्री के पद से हटकर कुछ वर्षों बाद उस समय का मूल्यांकन अधिक अच्छी तरह से कर पाए हैं। शांता कुमार ने लिखा है कि उनके मुख्यमंत्री पद के पहले अढ़ाई साल की अवधि की सबसे बड़ी विडंबना यह थी कि जहां एक ओर पार्टी भयंकर अनुशासनहीनता की शिकार होकर टूटती रही, वहीं दूसरी ओर सरकार के जनहित के विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा अद्वितीय मील के पत्थर स्थपित किए गए। शांता कुमार का मानना है कि सरकार की उपलब्धियां जितनी गौरवशाली थीं, पार्टी का व्यवहार उतना ही निंदनीय था। उन्हें हैरानी होती है कि वैसी पार्टी की सरकार द्वारा इतने प्रशंसनीय कार्य कैसे संभव हुए।

 1980 की केंद्र की जनता पार्टी की सरकार को लोकसभा चुनाव में मिली हार के पीछे शांता कुमार मनोवैज्ञानिक कारण बताते हैं। शांता कुमार के अनुसार देश की जनता ने 1977 में पहली बार अपनी इस शक्ति को पहचाना था कि वह इतने बड़े देश की सरकार को बदलने में समर्थ हैं। शांता कुमार ने 1980 में भाजपा सरकार गिरने से पहले उस शाम का जिक्र भी किया है, जब शत्रुघ्न सिन्हा अदाकारा रीना राय के साथ उनसे मिलने ‘शैलकुंज’ आए थे। तब शांता कुमार ने हालात समझते हुए शत्रुघ्न सिन्हा से कहा, ‘सरकार जाती है तो जाए, पर आप कल सुबह ब्रेकफास्ट करने हमारे घर आइए’। उस समय शत्रुघ्न सिन्हा ने उनसे कहा था, ‘सीएम और नो सीएम, आई एम विद यू।’ शांता कुमार लिखते हैं कि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को भाषण में कहा था कि हमने जनता को सरकार बदलने का तरीका सिखाया है। अब इसका पहला प्रयोग हमारे ही विरुद्ध होगा। शांता कुमार ने माना है कि जनता पार्टी के व्यवहार से लोग क्षुब्ध हो गए थे।

तीन दिन दिल्ली में रहे एडमिट

अस्पताल सूत्रों ने खुलासा किया है कि दिल्ली प्रवास के दौरान शांता कुमार की तबीयत अचानक बिगड़ी। उन्हें राममनोहर लोहिया अस्पताल ले जाना पड़ा। उन्हें सांस लेने में तकलीफ और मानसिक थकान बताई गई। लिहाजा अस्पताल में भर्ती कर उनके स्वास्थ्य की जांच की गई। सूत्रों ने कोविड-19 के पुनः आसार और लक्षणों का खंडन किया है। शांता कुमार को 2-3 दिन अस्पताल में रखा गया।

अपनी नाकामियों पर भी खूब लिखा

यह किताब उनकी दिवंगत पत्नी संतोष शैलजा की स्मृति और श्रद्धांजलि से खास तौर पर जुड़ी है। यह शांता की आत्मकथा का अनछुआ पहलू भी है, किताब में उन्होंने अपनी उपलब्धियों और नाकामियों को संकलित किया है। किताब का लेखन बीती 12 दिसंबर को संपन्न हुआ, जिसे  उनकी पत्नी ने तराशा और लिखा था। किताब 450 पन्नों में समाई है और मूल्य 950 रुपए है। किताब का प्रकाशन ‘किताब घर’ ने किया है।

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