कोरोना वायरस लड़ाई एकता से संभव

सुखदेव सिंह By: May 11th, 2021 12:07 am

आज देश की हालत किस कद्र नाजुक बनती जा रही कोई सोचने को तैयार नहीं है। राजनीतिक रैलियों का आयोजन करवाकर सरकारें स्वयं के बनाए हुए नियमों को तोड़कर जनता को लापरवाही बरतने के लिए प्रेरित करती रही है। नियमों की दुहाई देने वाले ही अगर उन्हें तोड़ें, तो जनता से फिर क्या सहयोग किए जाने की उम्मीद रखी जा सकती है। एक तरफ  दो गज दूरी, मास्क बहुत जरूरी पहनने के लिए जनता को जागरूक कर रहे, वहीं चुनावी आयोजनों में हजारों की एकत्रित भीड़ उन्हीं नियमों की धज्जियां उड़ाए, तो संकरण रोग पर अंकुश कैसे पाया जा सकता है…

कोरोना वायरस अब दिनोंदिन विश्व के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। कोरोना वायरस की वैक्सीन लगवाए जाने के बावजूद भी लोगों को स्वास्थ्य विभाग की और से पॉजिटिव बताया जाना भी कई तरह की भ्रांतियां पैदा कर रहा है। आज हर किसी की जुवान पर सिर्फ  कोरोना का खौफ ही सुना जा सकता है। पिछले एक वर्ष में जितने भी लोगों की मृत्यु हुई ज्यादातर को सिर्फ कोरोना वायरस का रोगी बताना भी कई सवाल खड़े करता है। टीवी, कैंसर से पीडि़त मरीजों का मृत्यु तदोपरांत पोस्टमार्टम किया जा सकता मगर कोरोना वायरस से पीडि़तों का क्यों नहीं। क्या यही मान लिया जाए कि कोरोना वायरस शुरू होते ही अन्य बीमारियों से विश्व मुक्त हो रहा है। कोरोना वायरस का प्रकोप ठीक दो विश्व युद्धों के समान ही समझा जा सकता है, जिसमें लाखों लोग मौत का ग्रास बने थे। उस समय भी विश्व देशों ने एकता बनाकर आपसी फूट की लड़ाई से निजात पाई थी।

आज भी हालात ठीक वैसे ही बन चुके कि पूरे विश्व को एकता अपनानी होगी तभी आगामी पीढि़यों को बचाया जा सकता है। प्रत्येक देश कोरोना वायरस के खिलाफ  लड़ाई अपने तरीके से लड़ने में मशगूल है। आम जनमानस की सुरक्षा आखिर किस तरह की जाए विश्व देश धीरे-धीरे एकजुट होकर इस दानव से लड़ने की तैयारी में जुट चुके हैं। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए पच्चीस देशों के प्रतिनिधि विश्व स्वास्थ्य संगठन सौजन्य से इस महामारी से लड़ने की रणनीति बना रहे हैं। वर्ल्ड लीडरों का मत है कि नई तकनीक, सुझावों, जांच प्रक्रिया में तेजी लाने और वैक्सीन की रफ्तार तेज किए जाने से महामारी का अंत संभव हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए आए दिन नई गाइडलाइंस जारी किए जाने की वजह से विश्व की एकता कायम रखना भी आसान काम नहीं है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस के शुरुआती दौर में अनेक बार अपनी हिदायतें बदली। नतीजतन सरकारों और उसकी मशीनरी में सदैव असमंजस की स्थिति बरकरार बनी रही है। जान है तो जहान है, आज यही सोच अपनाने की जरूरत है। कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के लिए कल तक हम लोग एक विशेष समुदाय के लोगों पर दोषारोपण करते रहे जो कि गलत बात थी। आज देश की हालत किस कद्र नाजुक बनती जा रही कोई सोचने को तैयार नहीं है। राजनीतिक रैलियों का आयोजन करवाकर सरकारें स्वयं के बनाए हुए नियमों को तोड़कर जनता को लापरवाही बरतने के लिए प्रेरित करती रही है। नियमों की दुहाई देने वाले ही अगर उन्हें तोड़ें, तो जनता से फिर क्या सहयोग किए जाने की उम्मीद रखी जा सकती है। एक तरफ  दो गज दूरी, मास्क बहुत जरूरी पहनने के लिए जनता को जागरूक कर रहे, वहीं चुनावी आयोजनों में हजारों की एकत्रित भीड़ उन्हीं नियमों की धज्जियां उड़ाए, तो संकरण रोग पर अंकुश कैसे पाया जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि कोरोना वायरस पॉजिटिव आने वालों को तुरंत घरों में आइसोलेट किया जाए। सामाजिक दूरी का विशेष ध्यान रखा जाए और 72 घंटों का अंतराल होना बहुत जरूरी है। कोरोना वायरस जांच की गति में तेजी लाई जाए जिससे संक्रमण रोग की चेन तोड़ी जा सके। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने इस बाबत 28 राज्यों को कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। पर्यावरण बदलाव के चलते लोग हृदयघात जैसी बीमारियों से अब मर रहे हैं। सच्चाई तो यह कि इस वजह से लोगों में अब सांस लेने की दिक्कतें बढ़ना भी शुरू हो चुकी हैं। मास्क मुंह पर बांधें रखने से आक्सीजन ग्रहण किए जाने की मुश्किलें बढ़ रही और इनसान कई बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। वैक्सीन का ईजाद जब तक नहीं हुआ था तब तक मास्क को एकमात्र इस बीमारी से बचाव का विकल्प माना जा सकता था। कोरोना वायरस की वजह से लोगों के कामकाज पर विपरीत असर पड़ा है। आज हालात ऐसे बन चुके कि गरीब आदमी अपना पेट भरे या फिर मुंह पर बांधने के लिए किसी मास्क की खरीददारी करे। केंद्र सरकार और चिकित्सकों के अथक प्रयासों से कोरोना वायरस वैक्सीन का निर्माण करके आज भारत आत्मनिर्भर बन पाया है। वैक्सीन के नाम पर भी राजनीति किए जाने से नेताओं को परहेज किए जाने की जरूरत है।

कोरोना वायरस वैक्सीन लगाने की वजह से इनसान का शरीर पूरी तरह इस वायरस से लड़ने के काबिल बन जाता है। बदलते रहन, सहन और खान-पान की वजह से लोगों का शरीर में इम्युनिटी सिस्टम पूरी तरह से काम नहीं कर रहा, नतीजतन लोग बीमारियों से जूझ रहे हैं। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को चिकित्सीय जांच तदोपरांत ही यह वैक्सीन लगानी चाहिए। वैक्सीन लगवाने तदोपरांत व्यक्ति को बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द, उल्टियां, दस्त, एलर्जी, खांसी तनाव, कमजोरी, वैक्सीन लगाने वाली जगह में सोजिश आदि कुछ समस्याएं होना चिकित्सकों ने बताई हैं। विश्व देश आज वैक्सीन अभियान चलाकर अपनी जनता की सुरक्षा कर रहे हैं। मगर केवल मात्र अपने देश में नकारात्मक सोच के मालिक कोरोना वायरस की वैक्सीन के खिलाफ  बोलकर लोगों को भ्रमित किए जाने में लगे जो कि शर्मनाक बात है। चिकित्सक मान चुके की कोरोना वैक्सीन लगाए जाने से शरीर पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ता बशर्ते लोग गंभीर बीमारियों से ग्रसित नहीं होने चाहिए। मानवता की सुरक्षा की चिंता करते हुए सरकारों को अब राजनीतिक आयोजनों पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाकर कोविड के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करवाना चाहिए।

सुखदेव सिंह

लेखक नूरपुर से हैं

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