ई-लर्निंग से ई-पीटीएम तक हिमाचल

ई-पीटीएम के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई की जानकारी प्राप्त करने के साथ-साथ उपरोक्त प्रश्नों पर भी विचार करने तथा सरकार एवं विभागीय स्तर पर संवेदनशील होकर समाधान करने की आवश्यकता है…

वैश्विक संचार क्रांति ने वर्तमान जीवन की परिभाषा ही बदल कर रख दी है। संचार का तात्पर्य ही भाव, विचार, जानकारी, ज्ञान तथा सूचनाओं को दूसरों तक पहुंचाना या स्थानांतरित करना है। सभी क्षेत्रों में ज्ञान के प्रेषण में संचार के विभिन्न साधन माध्यम बन चुके हैं। शिक्षा, विज्ञान, सूचना, प्रौद्योगिकी, व्यवसाय, उद्योग, बैंक, स्टॉक मार्केट तथा अन्य सभी कार्य क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से कार्य हो रहा है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी के समय में हर व्यक्ति मोबाइल, लैपटॉप, टैब, कंप्यूटर के माध्यम से दुनिया को मुट्ठी में कर चुका है। दुनिया की सब जानकारी उसकी जेब में है। पढ़ा-लिखा व्यक्ति ई-लर्निंग के माध्यम से विभिन्न ज्ञान की जिज्ञासाओं को शांत कर रहा है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी के इस युग में संचार माध्यमों का जाल सा बिछ गया है। मूलतः इंटरनेट के विभिन्न संचार माध्यमों से किसी भी स्थान तथा समय पर प्राप्त की जाने वाली कोई भी जानकारी ‘ई-लर्निंग’ है। जहां पर भगौलिक दूरियां तथा अध्यापन में आने वाली समस्याएं चुटकी में समाप्त हो रही हैं, इसलिए सामान्य प्रशासन तथा ज्ञान के क्षेत्र में ऑनलाइन कोर्सेज़, ऑनलाइन डिग्री के लिए ऑनलाइन कार्यक्रमों का प्रचलन हो गया है। आज प्रत्येक क्षेत्र में ई-मेल, ई-पास, ई-कॉमर्स, ई-बिज़नेस, ई-टेलिंग, ई-गवर्नेंस, ई-कम्युनिकेशन, ई-बुक्स, ई-फॉर्म, ई-शॉपिंग, ई-क्राइम, ई-स्पोर्ट्स, ई-वॉलेट आदि अनेकों शब्दों का प्रयोग हो रहा है जिसमें ‘ई’ का अर्थ ‘इलेक्ट्रॉनिक्स’ है। इस संचार क्रांति ने दुनिया के सभी व्यक्तियों, काम-धंधों तथा कार्य प्रणालियों पर अपना आधिपत्य कर लिया है। आज सभी तरह के सरकारी आदेश, व्यवसाय तथा सूचनाएं विभिन्न संचार माध्यमों से लोगों के पास पहुंच रही हैं। वर्तमान में ई-न्यूज़, ई-पत्रिकाएं तथा ई-शोध पत्रिकाएं छप रही हैं। फेसबुक, व्हाट्सएप, मैसेंजर तथा इंस्टाग्राम से दुनिया का हर व्यक्ति जुड़ा हुआ है। अनेकों इंटरनेट तथा मोबाइल कंपनियां अरबों-खरबों रुपए का व्यवसाय कर रही हैं। वैश्विक कोरोना महामारी से पूर्व भारतीय शिक्षाविदों तथा विद्वानों की दृष्टि में संचार क्रांति के अग्रदूत मोबाइल को हानिकारक माना जाता था। बाल्यकाल तथा किशोरावस्था में विभिन्न विषयों की सही जानकारी न होने के कारण इसे पाठशालाओं में बच्चों के लिए निषेध किया जाता था।

 पाठशाला में मोबाइल ले जाने तथा प्रयोग करने पर दंड का प्रावधान तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई होती थी। वर्तमान में इस बारे लोगों का दृष्टिकोण, व्यवहारिकता तथा उपयोगिता बदल चुकी है। अब मोबाइल के बिना शिक्षण संस्थानों में कोई भी कार्य नहीं हो सकता। संक्रमण की इस जानलेवा महामारी ने बच्चों, अध्यापकों, कक्षा तथा पाठशाला के वास्तविक क्रियाकलापों की दूरी को समाप्त कर दिया है। अब ‘एक्चुअल टीचिंग’ के स्थान पर संचार माध्यमों से ‘वर्चुअल टीचिंग’ हो रही है। ‘गूगल’ ज्ञान देवता के रूप में प्रतिष्ठित हो चुके हैं। इस दिशा में इस समय ये सभी इलेक्ट्रॉनिक यंत्र धरती के लिए वरदान बन कर प्रकट हुए हैं जिनके कारण बहुत अधिक संभावित नुकसान की भरपाई हो रही है। ई-लर्निंग से पूरा शिक्षण-प्रशिक्षण हो रहा है। गूगल मीट, जूम, व्हाट्सएप, मोबाइल कॉल तथा वीडियो कॉल से ही ऑनलाइन स्टडी हो रही है। विद्यार्थी, अध्यापक, अभिभावक, शिक्षा तथा प्रशासनिक अधिकारी संचार क्रांति से जुड़ कर पूर्ण लाभ उठा रहे हैं। इस वर्तमान युग तथा परिस्थिति में जब ई-लर्निंग हो रही है तो ऑनलाइन परीक्षाएं होकर अब ई-पीटीएम भी हो रही है। हिमाचल प्रदेश की सभी सरकारी पाठशालाओं में चार से नौ जून तक ई-पीटीएम आयोजित की जा रही है जिसे ‘शिक्षक-अभिभावक संवाद’ का नाम दिया गया है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर द्वारा इस संवाद का शुभारंभ तथा समापन किया जाएगा। इस छह दिवसीय कार्यक्रम में अध्यापकों द्वारा अभिभावकों से संपर्क साध कर शिक्षा विभाग के कार्यक्रमों ‘हर घर पाठशाला’, ‘प्रश्नोत्तरी’, ऑनलाइन कक्षाओं में आ रही समस्याओं, शिक्षा की गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों को आने वाली परेशानियों की जानकारी प्राप्त की जा रही है।

 इस संवाद में बच्चों की शारीरिक, मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक स्थिति पर भी चर्चा की जा रही है। अविभावकों से उनके बच्चों में इस वैश्विक महामारी के दौरान किसी भी व्यवहार एवं आचरण में आए परिवर्तन तथा शिक्षा में सुधार एवं गुणवत्ता लाने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं, इस बारे पूछा जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में विपरीत परिस्थितियों में शिक्षा तंत्र तथा अध्यापकों द्वारा किए गए प्रयास निःसंदेह सराहनीय हैं, लेकिन प्रभावी शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए अभी बहुत से व्यावहारिक प्रश्नों का उत्तर ढूंढा जाना अति आवश्यक है : 1. क्या प्रदेश में सभी अभिभावक पढ़े-लिखे तथा जागरूक हैं? 2. क्या सभी अभिभावकों के पास एंड्राइड मोबाइल उपलब्ध हैं? 3. क्या अभिभावक कक्षा के समय मोबाइल को बच्चों को दे पाते हैं? 4. क्या प्रदेश के सभी जनजातीय, दूरदराज तथा अन्य सभी क्षेत्रों में नेट कनेक्टिविटी है? 5. क्या अभिभावक बच्चों को स्कूल से दिए गए कार्य का अवलोकन कर पाने में सक्षम हैं? 6. क्या दिहाड़ी-मजदूर, छोटा-मोटा काम-धंधा, चूल्हा-चौका, खेतीबाड़ी करने वाले अभिभावक घर में एक से अधिक मोबाइल रख पाते होंगे? 7. क्या वर्तमान परिस्थितियों में व्यक्ति रोजी-रोटी के लिए संघर्षरत मोबाइल रिचार्ज करवाने में आर्थिक रूप से सक्षम होगा? 8. क्या मोबाइल पर पूरा दिन ऑनलाइन शिक्षण से बच्चों की शारीरिक, मानसिक तथा मनोवैज्ञानिक समस्या पर कोई प्रभाव पड़ा होगा? ई-पीटीएम के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई की जानकारी प्राप्त करने के साथ-साथ उपरोक्त प्रश्नों पर भी विचार तथा सरकार एवं विभागीय स्तर पर संवेदनशील होकर समाधान करने की आवश्यकता है। इस समय अभिभावकों को भी जागरूक रह कर अपने बच्चों के सुखद भविष्य के लिए अध्यापकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने की आवश्यकता है।

प्रो. सुरेश शर्मा

लेखक नगरोटा बगवां से हैं

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