प्रो. सुरेश शर्मा ,लेखक घुमारवीं से हैं

वर्तमान भौतिकवादी जीवन में सभी को योग एवं संगीत की आवश्यकता, महत्त्व तथा मूल्य का बोध हो रहा है। ईश्वर के द्वारा प्रदत्त इन दोनों जीवन अमूल्य निधियों का लाभ लेकर तन तथा मन को बाह्य एवं आंतरिक रूप से स्वस्थ एवं सुंदर बनाया जा सकता है। सभी निरोगी हों, सभी स्वस्थ रहें, यही भारतीय

यह गीत प्रदेश की संस्कृति तथा लोगों की भावनाओं को व्यक्त करता है। इस गीत की रचना पर भी गहन चिंतन एवं मंथन किया गया है… भारतवर्ष में कई राज्यों ने आधिकारिक रूप से अपने राज्य गीत को घोषित किया है जिनमें ग्यारह राज्य तथा एक केन्द्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इन राज्य गीतों को

बेटियों के लिए भयमुक्त वातावरण तथा बेटों के लिए संस्कार युक्त जीवन सामाजिक सौहार्द, शांति तथा समरसता के लिए बहुत ही आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति में विचारों की शुद्धता, मानसिक पवित्रता तथा आचरण में व्यावहारिकता आवश्यक है… किसी ज़माने में बहुत कम लड़कियां शिक्षण संस्थाओं में शिक्षा ग्रहण करती थी। विभिन्न विभागों में महिला कर्मचारियों

प्राध्यापकों के आक्रोश तथा नाराज़गी को अविलंब दूर किया जाना ज़रूरी है। अब आवश्यकता शिक्षा क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू कर व्यवहार में लाकर इसे सफल बनाने की है… हिमाचल प्रदेश में सरकार के अधीनस्थ कार्य कर रहे सभी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के सभी वित्तीय लाभ मिल चुके हैं, लेकिन प्रदेश

प्रदेश के इन युवा संगीत साधकों का दर्द समझा जाना चाहिए। इसी बहाने प्रदेश की जनता को भी अपने बच्चों को संगीत जैसे विषय को पढ़ाने का अवसर मिलेगा… संगीत के बिना जीवन अधूरा है या यूं कहें कि संगीत के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जाती है। संगीत के बिना शिक्षा, शिक्षण संस्थानों,

यह हत्यारे की व्यक्तिगत मानसिक विकृति है। सामाजिक रूप से बेटियों पर इस तरह के अत्याचार हमें सोचने पर मजबूर करते हैं। यह घटना बच्चों, युवतियों तथा महिलाओं की सुरक्षा में खतरे का संकेत है। ऐसे अपराधों में बालिकाओं को सचेत रहने के लिए जागरूक करना चाहिए… रोजी-रोटी, व्यापार, कारोबार तथा मेहनत-मजदूरी तथा अनेक उद्योगों

वर्तमान आधुनिकता, भौतिकवाद तथा उपभोक्तावादी संस्कृति में जीवन के आसमान की ऊंचाइयों को छूने का प्रयास करते हुए गांव के हाट, बाट तथा घराट से भी हमारा परिचय होना चाहिए। गांव की मिट्टी तथा सांस्कृतिक परिवेश से सभी को हमेशा जुड़े रहना चाहिए… हिमाचल प्रदेश देवी-देवताओं की धरती है। यहां पर आयोजित होने वाले मेले,

अभिभावक अपने घर पर एक अच्छा शैक्षिक वातावरण तैयार कर सकते हैं। उन्हें चाहिए कि वे बच्चों की तुलना न करें, उन पर गुस्सा न करें। अपनी आशाओं तथा आकांक्षाओं को बच्चों के ऊपर न थोपें। बच्चों पर अनावश्यक रूप से दबाव भी नहीं डालना चाहिए… सफलता एक दिन में नहीं मिलती। इसके लिए निरंतर

लता दीदी की स्मृति में प्रदेश सरकार द्वारा घोषित ‘लता मंगेशकर संगीत महाविद्यालय’ तथा ‘लता मंगेशकर स्मृति राज्य सम्मान’ की घोषणा इस महान गायिका को सच्ची श्रद्धांजलि है… भारतीय शिक्षण परंपरा में संगीत से संस्कार तथा संस्कार से संस्कृति को सहेजने का कार्य बहुत ही महत्त्वपूर्ण माना गया है। बीसवीं शताब्दी में भारतीय शास्त्रीय संगीत

इस पहाड़ी सुंदर प्रदेश की अपनी एक प्रभावशाली सांस्कृतिक नीति होनी चाहिए। प्रदेश में समग्र कलाओं के विकास, लोक कलाओं के संरक्षण, कलाकारों के आर्थिक संवर्धन के लिए एक संयुक्त, समग्र, संतुलित तथा सशक्त सांस्कृतिक नीति की महती आवश्यकता है… साधारणतः जनमानस में संस्कृति को सहेजने, संरक्षण तथा संवर्धन की चर्चा होती रहती है। संस्कृति