हिमाचल देवभूमि है, रणभूमि नहीं

हिमाचल आने वाले प्रत्येक पर्यटक से प्रदूषण फैलाने का टैक्स वसूलना चाहिए। साथ में ही आपदा प्रबंधन के अंतर्गत भी रकम वसूली जानी चाहिए, ताकि इनकी वजह से, हो न हो, कभी प्रदेश में आपदा या कोई अन्य संकट उत्पन्न हो जाए तो जरूरतमंदों की सहायता हो सके। तब जाकर इन्हें अक्ल आएगी कि क्या होता है पैसे के दम पर हुड़दंगबाजी मचाना! हिमाचल प्रदेश सरकार को भी आवश्यक है कि अपनी पर्यटन नीति में बदलाव करे तथा एक मानक नियमावली पर्यटकों के लिए जारी हो। जो इन मानकों को पूरा करेगा तथा विशेष टैक्स अदा करेगा, वही यहां आ पाएगा अन्यथा हिमाचल को गूगल पर ही देखे…

हिमाचल प्रदेश एक ऐसा रमणीय प्रदेश है जो पूरे विश्व में अपनी संस्कृति व ईमानदार रवैये और यहां के प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विश्व प्रसिद्ध व प्रख्याति प्राप्त है। पर्यटन की दृष्टि से हिमाचल पर्यटकों की हर एक आवश्यकता का केन्द्र रहता है, चाहे वो संस्कृति को समझना हो, साधारण पर विशेष रहन-सहन व पहनावे को जानना हो या मंदिरों में जाना हो या फिर सबसे विशेष बर्फ या ऊंची चोटियों से संपूर्ण प्राकृतिक सौंदर्य को निहारना हो, सबकी पहली पसंद हिमाचल प्रदेश ही होता है क्योंकि यहां के लोग इतने सहयोगात्मक प्रवृत्ति के हैं कि कई पर्यटक तो लोगों के घरों में भी रहते हैं तथा ईमानदारी के मामले में हिमाचली समाज जैसी पृष्टभूमि किसी अन्य समाज में नहीं है। हिमाचली लोग कभी किसी को कुछ नहीं बोलते, बल्कि जरूरत पड़ने पर पूरा सहयोग भी करते हैं, लेकिन पिछले दो-तीन सालों में और सबसे ज्यादा तो इस वर्तमान दौर में बाहर से आने वाले पर्यटकों ने हिमाचल को गंद डालने वाली एक जगह, हुड़दंगबाजी मचाने और हथियारों के साथ यहां के लोगों के साथ मारपीट करना, दुकानदारों के साथ दुर्व्यवहार करने के साथ-साथ पहाड़ों को प्रदूषित करने का प्रचलन जंगल की आग की तरह फैलता जा रहा है। ये लोग मानसिक संक्रमण से ग्रसित प्रतीत होते हैं, मानो जिनका दिमाग काम न करता हो।

 कहने को तो देश वर्तमान समय में कोरोना से लड़ रहा है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। आधे से ज्यादा लोग तो हिमाचल के मनाली और शिमला में कोरोना की तीसरी लहर को जल्दी लाने के लिए अपना योगदान दे रहे हैं। आज एक तरफ मनाली में जहां लोगों को होटलों में कमरे नहीं मिल रहे हैं, ऐसा ही रहा तो दो महीने के बाद अस्पतालों में कमरे नसीब नहीं होंगे और फिर यही वर्क फ्रॉम होम की जगह वर्क फ्रॉम हिमाचल अलग ही खेमे के तथाकथित बुद्धिजीवी फेसबुक, ट्विटर पर लंबे-चौड़े लेख लिखकर सरकार को कोसेंगे। चलो मान भी लिया जाए कि हिमाचल आकर पर्यटक अपनी लंबी थकान से तरोताजा महसूस करने आते हैं। यह एक मत हो सकता है, लेकिन यही पर्यटक जब तलवारें लेकर सड़कों पर हुड़दंगबाजी मचाए, आमजन को परेशान करे, खुले में शराब पीएं, दुकानदारों को सामान लेने के बाद पैसे की बजाय गालियां दें तो कैसे सहन योग्य है! दुख होता है जब हिमाचल जैसे शांतिप्रिय प्रदेश व समाज में ऐसे विषैले तत्त्व प्रवेश करते हैं। पर्यटकों को साफ-साफ और सीधे अर्थों में समझ लेना चाहिए कि हिमाचल देवभूमि है, रणभूमि नहीं, जो इधर पर्यटक का तगमा सिर पर लगाकर आप जो दिल में आए वो करेंगे।

 पर्यटक एक दिन आता है, दो दिन आते हैं, लेकिन यहां कोई बसता भी है। यहां किसी के घर भी हैं, पर्यटकों के लिए हिमाचल ज्यादा कुछ नहीं, हसीन वादियां और ठंडे पहाड़ हैं। अरे इधर किसी के घर भी हैं, किसी के प्राण यहां बसते हैं। कल को अगर हिमाचल के लोग चंडीगढ़ या पंजाब, हरियाणा व दिल्ली में जाकर इनके घरों व सड़कों पर हुड़दंगबाजी मचाए, तलवारें लहराए तो कैसा लगेगा। पर्यटकों को हिमाचल आने से पहले समझ लेना चाहिए कि हिमाचल के लोग भले ही शांति व सादगी स्वरूप के हैं, मगर मूर्ख नहीं हैं, कि पर्यटक जो मर्जी आए वो करें। पहले मंडी में युवक की उंगलियां काट दीं तो अब मनाली में तलवारें लहरा कर लोगों पर हमले कर दिए तो कभी पुलिस के साथ मारपीट करने लग जाते हैं। आखिर आप पर्यटक हैं तो घूमो-फिरो, आनंद लीजिए, आपको कोई कुछ नहीं बोलेगा, आखिर आप मेहमान हैं, लेकिन मेहमान बनकर दूसरों के घर में जाकर ऐसा रवैया अपनाना भारतीय व हिमाचली संस्कृति का हिस्सा कभी भी नहीं रहा है। हाल ही में धर्मशाला व कांगड़ा में कुदरत का कहर बरपा जिसके पीछे प्राकृतिक असुंतलन एक बड़ा कारण है और वह किसी और की देन नहीं बल्कि इन्हीं पर्यटकों का तगमा सिर पर लिए घूमने वाले तथाकथित बुद्धिजीवियों की ही है। हिमाचल के लोग बाहर जाते हैं तो अपनी संस्कृति की अमिट छाप वहां छोड़ कर जाते हैं, लेकिन ये बाहर से आने वाले लोग अपने संस्कार यहां सड़कों पर बयां और नीलाम कर रहे हैं।

 खुशी है, भले ही देर से लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार व पुलिस ने अब सख्त रवैया अपना लिया है, जिससे अब हिमाचल आने वाले प्रत्येक संदिग्ध की खैर नहीं। हिमाचल के सीमांत क्षेत्रों में पुलिस विभाग की चौकसी व हर एक गाड़ी की चैकिंग प्रदेश को एक बार फिर शांतिमय बनाने के मार्ग में एक बड़ा कदम है। इस कदम से इन आसामाजिक तत्त्वों पर लगाम लगेगी। हिमाचल आने वाले प्रत्येक पर्यटक से प्रदूषण फैलाने का टैक्स वसूलना चाहिए। साथ में ही आपदा प्रबंधन के अंतर्गत भी रकम वसूली जानी चाहिए, ताकि इनकी वजह से, हो न हो, कभी प्रदेश में आपदा या कोई अन्य संकट उत्पन्न हो जाए तो जरूरतमंदों की सहायता हो सके। तब जाकर इन्हें अक्ल आएगी कि क्या होता है पैसे के दम पर हुड़दंगबाजी मचाना! हिमाचल प्रदेश सरकार को भी आवश्यक है कि अपनी पर्यटन नीति में बदलाव करे तथा एक मानक नियमावली पर्यटकों के लिए जारी हो। जो इन मानकों को पूरा करेगा तथा विशेष टैक्स अदा करेगा, वही हिमाचल आ पाएगा अन्यथा हिमाचल प्रदेश को गूगल पर ही देखे। अगर सच में सरकार इस प्रकार की नीति अपनाती है तो सही मायने में यह प्रदेश के बाशिंदों के लिए एक उपहार स्वरूप शांति निर्माण के क्षेत्र में बड़ा पग सिद्ध होगा, इससे कोई मुकर नहीं सकता।

प्रो. मनोज डोगरा

लेखक हमीरपुर से हैं

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