प्रो. मनोज डोगरा, लेखक हमीरपुर से हैं

कई दफा लोग साक्षर होने के दावा करते हैं, मगर बात करने के ढंग से वे अक्सर अपना वास्तविक परिचय दे दिया करते हैं, जिससे ऐसी शिक्षा का औचित्य नहीं है… मैं एक कॉलेज में बैठा चाय पी रहा था। तभी कुछ युवा फटे कपड़े पहनकर आए। मैंने सोचा कुछ पैसे देकर सहायता करता हू,

उनके द्वारा संचार क्रांति में किए गए कार्यों के लिए देश आज भी उन्हें याद कर रहा है तथा करता रहेगा… देश में एक समय था जब मोबाइल फोन की मात्र कल्पना की जाती थी, लेकिन उस कल्पना को साकार कर स्वप्न को संकल्प में तब्दील करने वाले देश व प्रदेश के दुर्गम से दुर्गम

दूसरी तरफ  अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार के मामलों में लोग सरकार और प्रशासन को कोसते हैं। परंतु इसमें इनका दोष भी नहीं है। दोष तो इसमें उन लोगों का है जो पेपर लीक करते हैं या इन धांधलियों में शामिल होते हैं। सरकार को आवश्यकता है कि वह कड़े

बाबा भूतनाथ, देव कमरूनाग जी व राज माधव राय, इन तीनों की अनुमति के बाद ही मंडी का शिवरात्रि महोत्सव शुरू होता है। इस मेले में सामान्यतः 200 से अधिक देवता आकर मेले की शोभा बढ़ाते हैं… हिमाचल भारत की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए आधुनिकता के साथ समन्वय करते हुए नए कीर्तिमान रचने के

ठाकुर राम सिंह जी काल की प्राचीन अवधारणा के अनुसार इतिहास लेखन के पक्ष में थे। उनका कहना था कि भारत ही ऐसा राष्ट्र है जहां प्रकृति का इतिहास और मानव इतिहास काल के खंडों में विद्यमान है। उनका कहना था कि इतिहासकारों को इस पर बहुत सावधानी से तथ्यपूर्ण सामग्री संकलित कर इन दोनों

‘बोतलों में भर कर जहर बिक रहा है। यह कथन सुनने कहने में थोड़ा अटपटा जरूर लगता होगा, लेकिन यही वर्तमान में प्रदेश की स्थिति है। एक तरफ जहां नशा माफियाओं पर नियंत्रण लगाने की बातें कही जाती हैं तो दूसरी तरफ जहरीली अवैध शराब बेची जा रही है जिसकी प्रशासन व आबकारी विभाग को

इस संक्रमण से बचने के लिए सख्त निगरानी की जरूरत है, नहीं तो सामाजिक संक्रमण जैसी स्थिति में देश के लिए खतरे की घंटी बज सकती है। भारत की सरकार व प्रशासन संक्रमण से बचाव के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और संक्रमित क्षेत्र से आने वाले लोगों को लेकर बहुत सतर्क हैं। लेकिन साथ में लोगों

विरोधी भी उनकी वाकपटुता और तर्कों के कायल रहे। 1994 में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में भारत का पक्ष रखने वाले प्रतिनिधिमंडल की नुमाइंदगी अटल जी को सौंपी थी… भारत का एक ऐसा दिव्य रत्न जो सदैव ‘अटल’ ही रहा, चाहे परिस्थितियां अनुकूल हो या प्रतिकूल। यह रत्न रूपी शख्सियत

जनरल रावत सीमाओं पर पहुंचे तो जवानों का साहस बढ़ाया, गांव पहुंचे तो लोगों के बेटे हो गए, दिल्ली से पाकिस्तान के सरपरस्तों को सीधा सा जवाब दिया, सीधी भाषा में बताया कि हिंदुस्तान पर उठी हर आंख निकाल ली जाएगी। स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से लेकर परम विशिष्ट सेवा मेडल तक, 11 गोरखा राइफल्स से

प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध अभी भी कहीं न कहीं कागजों और भाषणों में ही नजर आता है। इस पर कड़े नियम अपनाने की आवश्यकता है क्योंकि प्लास्टिक ही गंदगी की मूल जड़ है… स्वच्छ भारत और स्वच्छता अभियान, एक देश को स्वच्छ बनाने का संकल्प और दूसरा देश को स्वच्छ भारत के रूप में देखने