कोई मिल गया…

पीके खुराना By: Jul 29th, 2021 12:07 am

जीवन में उतार-चढ़ाव आएंगे, कठिनाइयां आएंगी, अमीरी-गरीबी आएगी। तब दोनों कितना धीरज रखते हैं, कितना विश्वास रखते हैं खुद पर और अपने पार्टनर पर, इससे शादी या बच जाती है या टूट जाती है। रिश्ते धीरे-धीरे पकते हैं, धीरे-धीरे मजबूत होते हैं। हमारे समाज में यह आम प्रथा है कि बच्चे हो जाएं तो घर में मुहब्बत की बात नहीं करनी, रोमांस की बात नहीं करनी। बच्चों के सामने मां-बाप को रिजर्व्ड रहना पड़ता है, मां-बाप के सामने बेटे-बहू को रिजर्व्ड रहना पड़ता है…

हर युवक और युवती के दिल में जीवन साथी को लेकर कई अरमान होते हैं, कई सपने होते हैं। बदलते ज़माने के साथ लव मैरिज का चलन बढ़ा है, लेकिन तलाकों की संख्या भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ी है और कई बार तो शादी के कुछ ही समय बाद तलाक हो जाता है। जीवन साथी का रिश्ता जितना अहम है, उतना ही संवेदनशील भी है क्योंकि दो अलग परिवारों में पले व्यक्ति आपस में रिश्ता बनाते हैं और उनमें से बहुत से लोगों को एक-दूसरे के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं होती। वैवाहिक रिश्ते मजबूत हों, इसमें विज्ञान, मनोविज्ञान और जीवन-दर्शन, तीनों की अहम भूमिका है। पहले मनोविज्ञान की बात करते हैं। सबसे पहले भावी दूल्हा-दुल्हन के स्वभाव, आदतें, जरूरतें, लक्ष्य और जीवन-मूल्यों की बात होनी चाहिए। दोनों की आवश्यकताएं अलग हो सकती हैं, करिअर के गोल अलग हो सकते हैं, जीवन को लेकर दोनों की सोच अलग हो सकती है, सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक विचारों में बड़ा अंतर हो सकता है। दो अलग परिवारों, यानी दो अलग संस्कृतियों में पले दो वयस्कों के लिए अपनी आदतें एकदम से बदलना तकलीफदेह हो सकता है। यही नहीं, अक्सर हम सामने वाले को बिना कुछ बताए उससे उम्मीदें लगा लेते हैं, जो आगे क्लेश का कारण बनता है। इसलिए यह आवश्यक है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को अच्छी तरह जान लें।

 विज्ञान की भूमिका इतनी सी है कि दोनों को एक-दूसरे की मैडिकल हिस्ट्री का पता होना आवश्यक है। इसी तरह दोनों के ब्लड ग्रुप का मिलान आवश्यक है ताकि उनकी संतान स्वस्थ हो। शादी के समय दूल्हा-दुल्हन सात फेरे लेते हैं, उसे सप्तपदी कहा जाता है। ये जो सात फेरे हैं, ये जीवन का विज्ञान हैं। पहले चार फेरों में दूल्हा आगे चलता है और दुल्हन उसके पीछे आती है। हर फेरे में दूल्हा एक नया वचन देता है। दुल्हन उन वचनों से संतुष्ट होती है और स्वीकार करती है कि दूल्हा उसका पति बनने के योग्य है, तब वह आगे आ जाती है और दूल्हे को अपनी ओर से वचन देती है। पहला फेरा लेते हुए दूल्हा अग्नि के चारों ओर अपनी दुल्हन के आगे-आगे चलता हुआ कहता है ‘ओम ईशा एकापधि भव’, जिसका अर्थ है कि तुम्हारे पति के रूप में मैं तुम्हें शारीरिक, मानसिक और आत्मिक सुख दूंगा। दूसरे फेरे के समय दूल्हा वचन देता है ‘ओम ऊर्जवे द्विपदी भव’, जिसका अर्थ है कि मैं वायदा करता हूं कि हम साथ-साथ उन्नति करेंगे और हमारे आपसी रिश्तों में और मजबूती आती रहेगी, ये रिश्ते विकसित होकर परिपक्व होते रहेंगे, मैच्योर होते रहेंगे, इवाल्व होते रहेंगे। इसका मतलब ये है कि दूल्हा कहता है कि वैवाहिक जीवन के दौरान हम एक-दूसरे को और अच्छी तरह से समझेंगे और अपने व्यवहार में वो बदलाव लाएंगे जिसकी जरूरत होगी। ये दूसरे फेरे में यह हालांकि दूल्हे का वचन है, लेकिन ये दूल्हा-दुल्हन दोनों के लिए बहुत बड़ी सीख है। तीसरे फेरे में दूल्हा कहता है ‘ओम, रायशपोशाया त्रिपदी भव’, जिसका अर्थ है कि मैं वचन देता हूं कि तुम मेरे साथ धन-धान्य से परिपूर्ण जीवन व्यतीत करोगी और मैं तुम्हारी जरूरतों का ध्यान रखूंगा। चौथे फेरे में दूल्हे का वचन होता है ‘ओम, मायो भव्याया चतुष्पदी भव’, जिसका अर्थ है कि खुद मैं खुश रहूंगा और तुम्हें खुश रखूंगा।

 दूल्हे की ओर से समाज के प्रमुख लोगों और नाते-रिश्तेदारों के सामने दिए गए इन चार वचनों से संतुष्ट होकर दुल्हन अपने आगे चल रहे व्यक्ति को अपने पति के रूप में स्वीकार कर लेती है और फिर अपने मन में कहती है कि मैं आपके वचनों से संतुष्ट हूं और मैं भी दिलोजान से चाहती हूं कि हमारा गृहस्थ जीवन सुखमय रहे, इसके लिए अब मैं भी आपको कुछ वचन देती हूं। यह सोचकर दुल्हन अब आगे आ जाती है और दूल्हा पीछे हो जाता है। दुल्हन के आगे आने का भी एक अर्थ है। वो अर्थ यह है कि घर औरत से चलता है, बल्कि घर बनता ही औरत से है, वरना वह घर नहीं है, मकान है। होम नहीं है, हाउस है। इंटों का जमावड़ा है। पांचवें फेरे में आगे चलते हुए दुल्हन वचन देती है ‘ओम प्रजाभ्य पंचपदी भव’, यानी मैं वचन देती हूं कि मैं हमारे बच्चों का ध्यान रखूंगी। प्यार से और धीरज से उनका पालन-पोषण करूंगी। उन्हें अच्छे गुण दूंगी। छठे फेरे में दुल्हन कहती है ‘ओम ऋतुभ्य शत्पदी भव’, जिसका अर्थ है कि मैं वचन देती हूं कि मैं हमेशा तुम्हें प्यार करूंगी, तुम्हारी जवानी में भी और बुढ़ापे में भी। मैं हमेशा तुम्हारा साथ दूंगी, तुम्हारी अमीरी में भी और तुम्हारी गरीबी में भी, सुख में भी और दुख में भी हम मिलकर सुख का आनंद लेंगे और दुख भी मिलकर बांटेंगे। सातवें फेरे में दुल्हन कहती है ‘ओम सखे सप्तपदी भव’, जिसका अर्थ है कि मैं हमेशा तुम्हारी सहचरी रहूंगी। इस वचन का भावार्थ यह है कि मैं तुम्हारी सबसे अच्छी दोस्त और सलाहकार रहूंगी, तुम्हें न्यायपूर्ण रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती रहूंगी। स्त्री कहती है कि मैं हमेशा तुम्हें न्यायपूर्ण रास्ते पर चलने की प्रेरणा दूंगी, गलत काम, अनैतिक काम, गैरकानूनी काम और समाज को अमान्य काम करने से मना करूंगी ताकि तुम कभी कठिनाई में कोई गलत कदम न उठाओ या पैसे के लालच में या ताकत के घमंड में विजय माल्या न बन जाओ, आसाराम न बन जाओ। मैं तुम्हें सही रास्ता दिखाउंगी, मैं तुम्हारी रोशनी बनूंगी। मैं बच्चों की ही नहीं, तुम्हारी भी गुरू हूं। मैं गुरू बनकर दिखाउंगी। पति उसके इस रूप को स्वीकार करता है। उसे अपनी धर्मपत्नी के रूप में स्वीकार करता है और अपने घर की, और दिल की चाबी पत्नी को सौंप देता है। जीवन में उतार-चढ़ाव आएंगे, कठिनाइयां आएंगी, अमीरी-गरीबी आएगी। तब दोनों कितना धीरज रखते हैं, कितना विश्वास रखते हैं खुद पर और अपने पार्टनर पर, इससे शादी या बच जाती है या टूट जाती है। रिश्ते धीरे-धीरे पकते हैं, धीरे-धीरे मजबूत होते हैं।

 हमारे समाज में यह आम प्रथा है कि बच्चे हो जाएं तो घर में मुहब्बत की बात नहीं करनी, रोमांस की बात नहीं करनी। बच्चों के सामने मां-बाप को रिजर्व्ड रहना पड़ता है, मां-बाप के सामने बेटे-बहू को रिजर्व्ड रहना पड़ता है। समझने वाली बात यह है कि हम सब्जियां खाते हैं और स्वादिष्ट हो तो चटखारे लेकर खाते हैं। सब्जियों में जो टेस्टमेकर है वो है ग्रेवी, या अगर बिना ग्रेवी की सब्जी है तो मसाला है टेस्टमेकर। हैरानी है कि हम जीवन में ग्रेवी की जरूरत को भूल जाते हैं। मसालेदार जीवन, रसमय जीवन, सेक्समय जीवन, रोमांटिक जीवन ही सुखमय जीवन है। जीवन से रोमांस खत्म मत होने दीजिए, जीवन की ग्रेवी बनाए रखिए, जीवन का मसाला बनाए रखिए। यह आपकी शादी का फेविकोल है। इस फेविकोल को सूखने मत दीजिए। शाइस्तगी रखिए। आप भी, बच्चे भी। पर खुद को समय दीजिए। अपने पार्टनर को समय दीजिए। अकेलेपन का सुख उठाइए, रोमांस बनाए रखिए, शादी का फेविकोल बनाए रखिए। कभी शारीरिक संपर्क से, कभी बातों से, कभी इशारों से। जीवन का आनंद इसी में है।

पी. के. खुराना

राजनीतिक रणनीतिकार

ईमेल : [email protected]

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