पीके खुराना

उनकी क्लास के कुछ बच्चे स्कूल के बाद ट्यूशन पढऩे चले जाते हैं, कुछ बच्चे डे-केयर सेंटर में चले जाते हैं और स्कूल में जितना समय बिताते हैं, उतना अपने मां-बाप के साथ भी नहीं बिता पाते। वे अलग-अलग बच्चों का, उनके स्वभाव का, उनकी खूबियों का और उनकी समस्याओं का आकलन करती हैं। यही नहीं, पेरेंट-टीचर मीट के समय बच्चों के मां-बाप के साथ घुलमिल कर बच्चों के बारे में और जानकारी लेकर सभी बच्चों की जरूरतों के मु

जब कोई व्यक्ति हमें कोई ऐसी बात बताए जो हमें पहले से मालूम हो तो यह कहने के बजाय कि मुझे पता है, हम अगर कहें कि आप सही कह रहे हैं तो कितना अच्छा होगा? किसी के साथ बहस के समय अगर हम ऐसा करें तो बहस की गर्मी और कड़वाहट खत्म हो जाती है। तब वह बहस के बजाय एक-दूसरे का नजरिया समझने का जरिया बन जाती है। इसी तरह अगर हम किसी को अपनी बात समझा रहे हों तो यह कहने के बजाय कि आपके कोई सवाल हों तो पूछ लीजिए, हम अगर यह कहें कि आपके सवाल क्या हैं, तो सामने वाले को अपनी बात कहने में झिझक नहीं होगी,

निश्चल बैठ कर सांसों पर नियंत्रण और साथ में मौन, मानो सोने पर सुहागा है। मौन रहने का अभ्यास हमें अंतर्मन की यात्रा में ले चलता है, हम बाहरी जगत की ओर से ध्यान हटाकर अपने ही भीतर जाने लगते हैं। पूजा, भजन, कीर्तन आदि क्रियाएं अच्छी हैं, पर ये शुरुआती साधन हैं। आध्यात्मिकता में आगे बढऩे के लिए माइंडफुलनेस, गहरी लंबी सांसें और मौन बहुत लाभदायक हैं। अध्यात्म की अगली सीढ़ी है निश्छल प्रेम, हर किसी से प्रेम, बिना कारण, बिना आशा के हर किसी से प्रेम। मानवों से ही नहीं, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों से भी प्रेम, जीवित लोगों से ही नहीं, जीवन रहित मानी जाने वाली चीजों से भी प्रेम। एक बार जब हम प्रेममय हो गए तो आध्यात्मिकता की गहराइयों में चले जाते हैं...

खुशियों का मूल मंत्र बस इतना-सा ही है। इससे भी आगे बढक़र देखें तो खुशी एक ऐसी जरूरत है जिसके लिए पैसे खर्च नहीं होते। गर्मियों में शीतल हवा में बैठना और सर्दियों में गुनगुनी धूप में बैठकर विटामिन-डी लेना मुफ्त है। पेड़-पौधों, फूलों-पत्तियों का आनंद लेना मुफ्त है। किसी को गले लगाना मुफ्त है। किसी को दो मीठे बोल बोल देना मुफ्त है। किसी की बात सुन लेना मुफ्त है। सैर करना मुफ्त है। कसरत करना मुफ्त है। प्राणायाम मुफ्त है। ध्यान करना मुफ्त है। अपनी छोटी-छोटी सफलताओं पर खुश होना मुफ्त है। अपने बच्चों की देखभाल करना, उन्हें समय देना, उनकी प्यारी-प्यारी बातें सुनना मुफ्त है। अपने लक्ष्य की तरफ टिके रहना मुफ्त है। खुश रहना और खुश रखना मुफ्त है...

पहाड़ के सीने पर सजे ये आलातरीन सैन्य पदक मैदाने जंग में वीरभूमि के सैन्य पराक्रम की तस्दीक करते हैं, मगर इसके बावजूद शौर्य का धरातल सेना में अपने नाम की शिनाख्त ‘हिमाचल रेजिमेंट’ को एक मुद्दत से मोहताज है...

स्पिरिचुअल हीलिंग की प्रक्रिया में कई दिव्य घटनाओं को घटते हुए देखा गया है जिससे व्यक्ति का संपूर्ण व्यक्तित्व और जीवन, दोनों बदल जाते हैं। बहुत से अनुभवी एलोपैथी चिकित्सकों ने भी स्पिरिचुअल हीलिंग को अपनाया है। यह एक अत्यंत शुभ संकेत है क्योंकि वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति के ज्ञान के कारण चिकित्सक शरीर को तो जानता ही है, स्पिरिचुअल हीलिंग के आध्यात्मिक ज्ञान से संपन्न होकर वह चिकित्सक किसी के भी दिल, दिमाग और आत्मा को शक्तिसंपन्न बनाता है...

भोजन के साथ टीवी देखना, अखबार या मैगजीन पढऩा, या अपने मोबाइल पर सोशल मीडिया में व्यस्त रहना गलत है। भोजन खूब चबा-चबाकर खाइये। अच्छी तरह चबाने से हमारे मुंह की लार भोजन में मिल जाती है जिससे भोजना का स्वाद भी बढ़ता है और वह ज्यादा पोषक हो जाता है। ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर, चाय-कॉफी और फल आदि खाने के समय का ध्यान रखिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आपका जब दिल किया तब कुछ खा लिया। भोजन में विंडो सिस्टम अपनाइए, यानी एक खास समय पर खिडक़ी खुली और आपने खाना खाया। यह आपकी सेहत के

इसीलिए कहा गया है कि हमारी असली पूजा तब शुरू होती है जब हम पूजा खत्म करके पूजा-स्थल से बाहर आते हैं और लोगों के साथ व्यवहार में पूजा के उन सूत्रों को व्यावहारिक रूप देते हैं, अमलीजामा पहनाते हैं, वरना पूजा स्थलों में की गई पूजा का कोई अर्थ नहीं है। देखना यह होता है कि हम उन लोगों से कैसा व्यवहार करते हैं जिनसे हमें कोई काम न हो। हम उन लोगों से कैसा व्यवहार करते हैं जिनका सामाजिक-आर्थिक स्त

संतुलित डर और आत्मविश्वास का मेल आपकी सफलता को सुनिश्चित करता है, क्योंकि वह आपके इरादे को पक्का करता है और आरंभिक छोटी-बड़ी कठिनाइयों और असफलताओं से घबराए बिना आगे चलने की प्रेरणा देता है। यही हमारी सफलता का राज है। इसीलिए मैं दोहरा कर कहता हूं कि सफलता का सबसे बड़ा कारक है पक्का इरादा और विपरीत स्थितियों में भी अपना सपना सच करने की लगन। तो आइए, सपने देखें,

इनमें से बहुत सी कंपनियां शोध और समाज सेवा पर नियमित रूप से तथा बड़े खर्च करती हैं। इन कंपनियों के सहयोग से बहुत से क्रांतिकारी आविष्कार हुए हैं। सच तो यह है कि इन कंपनियों के बिना वे आविष्कार संभव ही न हुए होते। आर्थिक शिक्षा हमारी खुशहाली की कुंजी है। आर्थिक रूप से शिक्षित व्यक्ति भ्रष्ट हुए बिना भी, किसी दूसरे व्यक्ति का नुकसान किए बिना भी, कानूनी और वैध तरीकों से तेजी से अमीर बन सकता है। वस्तुत: आॢथक शिक्षा के बिना अमीर बनना तो शायद संभव है, पर अमीर बने रहना संभव नहीं है। लक्ष्मी और सरस्वती में यहां कोई विरोध नहीं है...