पीके खुराना

लब्बोलुबाब यह कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। हम कितने ही काबिल हों और कितने ही ऊंचे पद पर हों, हमें दूसरों का साथ चाहिए, सहयोग चाहिए, समर्थन चाहिए, प्रायोजन चाहिए। ऐसा नहीं है कि इनके बिना हम सफल नहीं हो सकते, लेकिन तब सफलता के शिखर छूने में कदरन लंबा समय लग सकता

मान लीजिए कि आप बंगाल के रहने वाले हैं और नौकरी, व्यवसाय या रिश्तेदारी की वजह से आप पंजाब में आकर बस गए हैं तो आपके लिए पंजाब का स्थानीय खाना ज्यादा मुफीद है क्योंकि यह पंजाब की जलवायु के अनुरूप है। इसी तरह अगर कोई पंजाबी बंगाल में जा बसे तो उसे अपने मैन्यु

फिलहाल विशेषज्ञों की राय है कि आपके पासवर्ड में सिंबल, कैरेक्टर, कैपिटल लैटर और नंबर का इस्तेमाल होना चाहिए। इससे पासवर्ड के बिट्स बढ़ते चले जाएंगे और पासवर्ड को तोड़ना आसान नहीं होगा। हमें एक और महत्त्वपूर्ण अंतर जानने की आवश्यकता है। पासवर्ड क्रैक होना और चोरी होना, दो अलग बातें हैं। हमारे यहां पासवर्ड

हमारी टीम अभी आंखों का चश्मा हटाने की दिशा में काम कर रही है। चूंकि यह किसी के जीवन का प्रश्न है, अत: हम इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं कि हमारा हर काम पूरी तरह से जांचा-परखा हुआ हो। बड़ी बात यह है कि बहुत से इलाज घर बैठे करना संभव है, बिना

विकास की अधकचरी योजनाओं से न देश का भला होता है, न समाज का। शिक्षा महंगी है, इलाज महंगा है, न्याय महंगा है, जीवन महंगा है, आदमी सस्ता है, मौत सस्ती है। हमारा संविधान कानूनों का जंगल है, राजनीतिक दल और वकील इसका लाभ लेते हैं। हमारा संविधान राजनीतिक दलों को बहुत सी अनुचित सुविधाएं

हमें अपना दृष्टिकोण बदलना होगा, कार्य-संस्कृति बदलनी होगी, ताकि हम नए ज़माने की सुविधाओं का स्वागत कर सकें और नए ज़माने की आवश्यकताओं के अनुसार नई सुविधाओं का आविष्कार कर सकें। युवाओं में उद्यम की सोच विकसित करना, उन्हें नवीनतम तकनीक से परिचित करवाना, उद्यम में सफलता के लिए सेल्स, मार्केटिंग, एकाउंटिंग आदि की जानकारी

बहुत से लोग जीवन भर धन के पीछे भागते रहते हैं और जीवन का असली आनंद लेने की ओर उनका ध्यान ही नहीं जाता। वे सुख को खुशी समझ लेते हैं। एक मुलायम-गद्देदार सोफे पर बैठा व्यक्ति या मखमली बिस्तर पर लेटा व्यक्ति भी दुखी हो सकता है, अकेलेपन से त्रस्त हो सकता है। सुख,

यह सही है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की ऐतिहासिक जीत से तिलमिलाए मोदी-शाह ने पंजाब को राजनीतिक रूप से नीचा दिखाने के लिए चंडीगढ़ में केंद्र की सेवा शर्तों के नियमों को लागू करने का तुर्रा छोड़ा, लेकिन यह कोई ऐसा मुद्दा नहीं था जिसकी प्रतिक्रिया में पंजाब सरकार इसे बड़े विवाद का

सवाल यह है कि समाधान क्या हुआ? क्या इस घटना के बाद सरकार ने कोई कार्रवाई की? क्या इस घटना के समय जिन विधायकों ने बलजीत यादव के समर्थन की घोषणा की थी, उन्होंने आगे कुछ और किया? सवाल इतना ही नहीं है। सवाल यह है कि ऐसी नौबत ही क्यों आई कि एक विधायक

हमें यह समझना चाहिए कि परिवर्तन दिमाग से शुरू होते हैं, या यूं कहें कि दिमाग में शुरू होते हैं। हम इक्कीसवीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं और सत्रहवीं सदी की मानसिकता से हम देश का विकास नहीं कर सकते। नई स्थितियों में नई समस्याएं हैं और उनके समाधान भी पुरातनपंथी नहीं हो सकते।