कर्मचारियों में तनाव एवं कार्य प्रबंधन

कर्मचारियों को शांत होकर, दबाव रहित अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक करना चाहिए। इसके साथ ही वे पूरी नींद लें, संगीत सुनें, ध्यान लगाएं, व्यायाम करें, परिवार तथा समाज के लोगों से मिलें-जुलें, परिजनों सहित घूमने निकलें तथा सभी से बतियाना भी बहुत आवश्यक है। इससे चिंताएं तथा परेशानियां दूर होती हैं…

वर्तमान समय में कार्यस्थलों पर कर्मचारियों में तनाव एक बहुत ही आम समस्या हो चुकी है। इस भौतिकवादी जीवन में व्यक्ति की आशाएं, अपेक्षाएं, महत्वाकांक्षाएं, भागदौड़, पारिवारिक समस्याएं, निराशाएं, असंतोष, असंतुलन, मानसिक एवं शारीरिक बोझ, आर्थिक संसाधनों की कमी, अनहोनी का भय, कार्यस्थल की घटनाएं, अधिकारियों का दबाव, ऑफिस में कार्य की अधिकता, घर तथा संस्थान में सामंजस्य न बना पाना, निजी जीवन की घटनाएं, मानहानि का डर इत्यादि अनेकों कारण व्यक्ति में तनाव को पैदा करते हैं। यह तनाव बिना किसी कारण से व्यक्ति के मन मस्तिष्क में अपना स्थान बना लेता है तथा कई बार मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक अवसाद का रूप लेकर भयंकर रूप ले लेता है। व्यक्ति के शरीर एवं मन को मिलने वाली चुनौतियां, जब वह इनका सामना करने में स्वयं को अक्षम, असहाय, असमर्थ तथा असफल पाता है तब उसमें तनाव पैदा होता है। यह  तनाव या दबाव कई बार व्यक्ति को आत्मघाती कदम उठाने के लिए भी विवश कर देता है।

 कई बार ऐसे व्यक्तियों को अपने कार्यस्थल पर नकारात्मक तथा विपरीत व्यवहार, अधिकारियों के साथ नोंक-झोंक, सहकर्मियों के साथ लड़ाई-झगड़ा करते देखा जाता है। परिस्थिति को नियंत्रण न कर पाना, आत्म संयम न रखना, गुस्सा करना, मारपीट करना, थप्पड़ मार देना, लात-घूंसे मार देना, गोली चला देना आदि अनेकों घटनाएं देश और दुनिया में देखी-सुनी गई हैं। कार्यस्थल पर कर्तव्य निर्वहन में चुनौती, परेशानी, दबाव, दूसरे कर्मचारी को दबाना तथा जवाबदेही भी इसके कारण हैं। कार्य स्थलों पर उन कर्मचारियों द्वारा अनापेक्षित तथा अमर्यादित व्यवहार होना, आत्मसम्मान, स्वाभिमान को बनाए रखने की चिंता, दूसरे को नीचा दिखाने, दबाव बनाने या अनचाहा अनुग्रह करना भी इसका एक कारण है। कार्यस्थल पर महिलाओं का मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न या महिलाओं के द्वारा पुरुषों पर दोषारोपण करना भी तनाव का कारण होता है जो कभी-कभी उनको आत्महत्या या फिर दूसरे की हत्या करने तक के लिए भी उकसा देता है। व्यक्ति का घमंड एवं अहंकार भी तनाव को जन्म देता है। देश और दुनिया में कार्य स्थलों, सेना, पुलिस, राजनीतिक क्षेत्र में अनेकों इस प्रकार की घटना देखी और सुनी गई हैं जो दबाव के कारण मानसिक अवसाद तथा मनोविज्ञानिक के दबाव में परिवर्तित हो जाती हैं। कार्य स्थलों पर इस प्रकार की घटनाएं बहुत ही चिंता का विषय हैं। जिस कर्मचारी या अधिकारी से शांतिपूर्वक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए जनसेवा की भावना से कार्यों की आशा की जाती है, यदि वह मानसिक या मनोवैज्ञानिक कारणों से इस तनाव की परिधि में आ जाए तो वह अपने अपेक्षित कार्यों का निर्वहन न कर अपने लिए या फिर समाज के लिए घातक हो सकता है। पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला केे बैजनाथ के हलेड़ उच्च विद्यालय में  मुख्याध्यापक उन्चास वर्षीय राकेश कुमार द्वारा प्रशासनिक कार्यों से परेशान होकर मानसिक दबाव में आत्महत्या का एक मामला सामने आया है जो कि चिंतनीय विषय है।

 अपने सुसाइड नोट में प्रशासनिक कार्यों का दबाव होना कारण बताया है। निश्चित रूप से इस आत्महत्या के पीछे किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, शारीरिक, मनोवैज्ञानिक या अन्य कारण भी हो सकते हैं जो कि गहन जांच का विषय है, लेकिन यदि आत्महत्या प्रशासनिक कार्यों के बोझ के दबाव में की गई हो तो यह  हमारी कार्यप्रणाली तथा कार्य व्यवस्था पर एक प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। अध्यापक या मुख्याध्यापक का मुख्य कार्य अध्यापन तथा पाठशाला प्रशासन का संचालन है। कक्षा-कक्ष में विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पूरा करवाना, सह-पाठ्य क्रियाएं आयोजित करवाना, विद्यार्थियों की दृष्टि से उनके सर्वांगीण विकास के लिए गतिविधियों का आयोजन करना तथा भविष्य की चुनौतियों के लिए उनको तैयार करना अध्यापक के मूल कार्य हैं। कोविड-19 के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में कर्मचारियों तथा कार्यालयों व विभागों की कार्यप्रणाली में परिवर्तन स्वरूप विभिन्न परिस्थितियां पैदा हो गई हैं जो संस्थाओं में प्रत्येक कार्य ऑनलाइन माध्यम से हो रहा है। ईमेल के माध्यम से पत्राचार हो रहा है। अधिकारियों द्वारा कार्यों को सुनिश्चित करना उनका उत्तरदायित्व है। अब सारा कार्य पेपरलेस वर्क की श्रेणी में आता है।

 सरकार द्वारा अधिकारियों को, अधिकारियों द्वारा निचले स्तर पर कार्यरत लोगों से कार्य करवाना उनकी प्रशासनिक जवाबदेही भी है। कोविड-19 के कारण उपजी परिस्थितियों, प्रशासनिक निर्देशों, प्रक्रियाओं तथा कार्यशैली में परिवर्तनों के कारण प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी प्रभावित हुआ है। इन परिस्थितियों में यह भी सही है कि कंप्यूटर की इस क्रांति में ऑनलाइन पत्राचार ने भी अधिकारियों तथा कर्मचारियों का कार्य बोझ अत्यधिक बढ़ा दिया है। ऐसी परिस्थिति में यह आवश्यक है कि पत्राचार कम हो, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उस पर अमल अवश्य रूप से होना चाहिए। कर्मचारियों तथा अधिकारियों को भी अपने कार्यों में नियमितता लाकर उनको निपटाने में देर भी नहीं करनी चाहिए क्योंकि रुका हुआ कार्य भी कई बार मानसिक तनाव को जन्म देता है। यह व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक दशा पर निर्भर करता है कि वह विभिन्न प्रकार के दबाव को किस तरह से झेल पाता है या उसका प्रबंधन कर पाता है। वर्तमान में सभी को कार्यों का दबाव या तनाव का प्रबंधन करने की अति आवश्यकता है। अपने घर के कार्यों, सामाजिक कार्यों तथा प्रशासनिक कार्यों में सामंजस्य बनाने में कर्मचारी कुशल होना चाहिए। कर्मचारियों को शांत होकर, दबाव रहित अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक करना चाहिए। इसके साथ ही वे पूरी नींद लें, संगीत सुनें, ध्यान लगाएं, व्यायाम करें, परिवार तथा समाज के लोगों से मिलें-जुलें, परिजनों सहित घूमने निकलें तथा सभी से बतियाना भी बहुत आवश्यक है। इससे चिंताएं तथा परेशानियां दूर होती हैं। शांत तथा सेवा भाव से अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन कर अपने निजी जीवन तथा व्यावसायिक कार्यों को समयबद्ध रूप से कार्य करना एक कुशल कर्मचारी एवं अधिकारी की विशेषता है।

प्रो. सुरेश शर्मा

लेखक घुमारवीं से हैं

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