कागजों में ही बने हैं पंजाब के 538 किलोमीटर लिंक रोड, जीआईएस मैपिंग से सामने आया गड़बड़झाला

By: Nov 29th, 2022 12:08 am

फर्जी सडक़ों की मरम्मत के लिए करोड़ों के टेंडर हुए और मरम्मत भी कागजों में ही कर दी

मुकेश संगर — चंडीगढ़

पंजाब में संपर्क मार्गों को लेकर एक हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है। राज्य की 538 किलोमीटर लिंक सडक़ें कागजों में ही बनी हैं, असल में इनका अस्तित्व ही नहीं है। हैरानी बात यह है कि इन लिंक सडक़ों की मरम्मत के लिए टेंडर भी होते रहे। इनकी मरम्मत भी सिर्फ कागजों पर ही हुई। इनकी मरम्मत पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए। इस बात का खुलासा तब हुआ जब सडक़ों की मैपिंग नई तकनीक जियोग्राफिक इन्फारमेशन सिस्टम (जीआईएस) के माध्यम से की गई। मैपिंग के जरिए इस बात का पता चला सडक़ों की लंबाई 538 किलोमीटर कम है। ध्यान रहे कि सडक़ों के रखरखाव के लिए नोडल एजेंसी पंजाब मंडी बोर्ड और लोक निर्माण विभाग हैं। राज्य में लिंक सडक़ों की कुल लंबाई 64,878 किलोमीटर है, लेकिन जीआईएस तकनीक से इन लिंक सडक़ों की असल लंबाई 64,340 किलोमीटर ही पाई गई है। गांवों के लिए लिंक सडक़ों का प्रसार काफी बड़ा है। जो नया डाटा तैयार किया जा रहा है, उसे जीआईएस पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है।

इन सडक़ों की मरम्मत हर छह वर्षों के अंतराल पर की जाती है। इस हिसाब से हर साल औसतन 90 किलोमीटर लिंक सडक़ों की मरम्मत कम होती रही। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक करीब 15 लाख रुपए किलोमीटर का खर्चा आता है। रिकार्ड के मुताबिक हर वर्ष 13.50 करोड़ का खर्च इन कागजी सडक़ों की मरम्मत पर खर्च किया जा रहा है। अब मामला सामने आने के बाद इन सडक़ों को मरम्मत की श्रेणी से बाहर निकाला जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि अब दूसरी सडक़ों की भी जीआईएस के माध्यम से मैपिंग करवाई जाएगी, ताकि सडक़ों की असल लंबाई का पता चल सके। पंजाब मंडी बोर्ड के सचिव रवि भगत ने कहा कि नई तकनीक से सडक़ों की सही लंबाई का पता चलेगा। इससे करोड़ों रुपए की बचत होगी। एक प्राइवेट कंपनी से साफ्टवेयर खरीदा गया है, जिससे सडक़ों की मैपिंग करवाई जा रही है। (एचडीएम)