अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं संभालो

By: Dec 2nd, 2022 12:07 am

क्या सरकार ऐसे जुनूनी शौकिया प्रशिक्षकों को खेल विभाग में कम से कम पांच वर्षों के लिए प्रतिनियुक्ति पर लाकर या उन्हीं के विभाग में उन्हें खेल प्रबंधन व प्रशिक्षण देने का अधिकार देकर प्रदेश की इन करोड़ों रुपए से बनी खेल सुविधाओं का सदुपयोग कर राज्य में खेलों को गति नहीं दे सकती है…

हिमाचल प्रदेश का जलवायु यूरोप से मिलता जुलता है जो खेल प्रशिक्षण के लिए बहुत ही उत्तम है। गर्मियों में भारत सहित एशिया व अफ्रीका के कई देश अपने अच्छे खिलाडिय़ों की ट्रेनिंग के लिए यूरोप व अमेरिका का रुख करते हैं। इसलिए हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य में विश्व स्तरीय प्ले फील्ड बनाना जरूरी हो जाता है और उससे भी जरूरी है इन सुविधाओं का सही उपयोग व रख रखाव। हिमाचल प्रदेश में अन्य राज्यों के मुकाबले खेलों की तरफ ध्यान कम ही दिया जाता है। इसका मुख्य कारण है यहां पर खेल मैदानों का अभाव। पहाड़ी भूभाग होने के कारण यहां पर खेल ढांचे के लिए रखा धन केवल भूमि को समतल करने में ही खत्म हो जाता है। बहुत अधिक धन व श्रम से ही यहां खेल सुविधाओं को खड़ा किया गया है, मगर सही उपयोग के बिना यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल ढांचा भी यूं ही बर्बाद किया जा रहा है। प्रदेश के पास आज से दो दशक पहले तक खेल ढांचे के नाम पर सैकड़ों साल पहले राजा महाराजाओं द्वारा मेले व उत्सवों के लिए बनाए गए चंद मगर बेहतरीन चंबा, मंडी, नादौन, सुजानपुर, जयसिंहपुर, कुल्लू, अनाडेल, रोहडू, रामपुर, सराहन, सोलन, चैल, नाहन आदि जगहों पर मैदान थे। इन मैदानों पर हिमाचल प्रदेश की खेल गतिविधियां कई दशकों से मेलों-उत्सवों व राजनीतिक रैलियों से बचे समय में चलती रही हैंं।

वैसे तो हिमाचल प्रदेश की तरक्की में विभिन्न सरकारों का योगदान रहा है, मगर हिमाचल प्रदेश में पहली बार नई सदी के शुरुआती वर्षों में प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल ढांचे को खड़ा करने की शुरुआत की और आज हिमाचल प्रदेश में जो कई खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्ले फील्ड एथलेटिक्स, क्रिकेट, हाकी, तैराकी व इंडोर खेलों के लिए उपलब्ध है। हिमाचल प्रदेश के आधारभूत खेल ढांचे में सुधार हो, इसके लिए इस कॉलम के माध्यम से पिछले कई सालों से लिखा जा रहा है और इसका काफी फायदा भी हुआ है। क्रिकेट में अनुराग ठाकुर के प्रयासों ने हिमाचल प्रदेश को क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर लाकर खड़ा कर दिया है जो काबिलेतारीफ है । आज अनुराग ठाकुर भारत के खेल मंत्री हैं। उनसे हिमाचल प्रदेश की खेल सुविधाओं को समृद्ध करने के लिए नियमानुसार कहें तो बहुत कुछ मिल सकता है। बिलासपुर के ृलुहणू का खेल परिसर पूर्व मंत्री व कोट कलूहर के विधायक ठाकुर रामलाल के प्रयत्नों से सामने आया है। एथलेटिक्स सभी खेलों की जननी है। इसी से सब खेल निकले हैं और इसके प्रशिक्षण के बिना किसी खेल में दक्षता नहीं मिल सकती है। प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल की सरकार के समय हिमाचल प्रदेश में विश्व स्तरीय खेल ढांचे को खड़ा किया गया। हिमाचल प्रदेश में आज हमीरपुर, बिलासपुर व धर्मशाला में तीन सिंथेटिक ट्रैक बन कर तैयार हैं।

शिलारू के साई सैंटर में दो सौ मीटर का प्रैक्टिस ट्रैक बन कर तैयार है। सरस्वतीनगर में काम हो रहा है। किसी किसी राज्य के पास अभी तक एक भी ट्रैक नहीं है। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर व धर्मशाला सिंथेटिक ट्रैकों पर लोग टहलते नजर आते हैं । भर्ती वाले दौड़ाकों के लिए बाहर कच्चे पर केवल ट्रायल के लिए स्वीकृत किया जा सकता है। शेष ट्रेनिंग बाहर के अन्य मैदानों व सडक़ों पर हो सकती है। सिंथेटिक ट्रैक पार्क बन चुके हैं। वहां आम लोगों का प्रवेश वर्जित कर देना चाहिए, केवल एथलीट के लिए ही प्रवेश रखना चाहिए। तभी इन प्ले फील्ड को लंबे समय तक खिलाडिय़ों के लिए उपलब्ध करवाया जा सकता है। कल जब हिमाचल प्रदेश के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट होंगे और प्रशिक्षण के लिए उखड़ा हुआ ट्रैक होगा तो फिर पहाड़ की संतान को पिछडऩे का दंश झेलना पड़ेगा। इसलिए इस बरबादी को अभी से रोकना होगा। तभी हम अपनी आने वाली पीढिय़ों से न्याय कर सकेंगे। हिमाचल सरकार इन विश्व स्तरीय खेल सुविधाओं पर ध्यान नहीं दे रही है। प्रदेश को भी हिमाचल में ट्रेनिंग कर पहाड़ की संतानें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कुछ लोगों के जुनून ने बिना सुविधाओं के मिट्टी पर ट्रेनिंग कर राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दस्तक दी थी। तभी यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधा आने वालों को मिल पाई हैं। हिमाचल प्रदेश में इस समय हर जिला स्तर सहित कई जगह उपमंडल स्तर पर भी इंडोर स्टेडियम बन कर तैयार हैं, मगर उन स्टेडियमों में बनी प्ले फील्ड का उपयोग प्रशिक्षण के लिए खिलाडिय़ों को ठीक से करना नहीं मिल रहा है।

वहां पर अधिकतर शहर के लाला व अधिकारी अपनी फिटनेस करते हैं। ऊना व मंडी में तरणताल बने हैं मगर वहां पर भी कोई प्रशिक्षण कार्यक्रम आज तक शुरू नहीं हो पाया है। हिमाचल प्रदेश में तैराक ही नहीं हैं। यहां पर भी प्रशिक्षण न होकर गर्मियों में मस्ती जरूर हो जाती है। ऊना में हाकी के लिए एस्ट्रो टर्फ बिछी हुई है, मगर उस की तो पहले ही दुर्गति हो गई है। हिमाचल प्रदेश सरकार का युवा सेवाएं एवं खेल विभाग अभी तक करोड़ों रुपए से बने इस खेल ढांचे के रखरखाव में नाकामयाब रहा है। उसके पास न तो चौकीदार हैं और न ही मैदान कर्मचारी, पर्याप्त प्रशिक्षकों की बात तो बहुत दूर की बात है। नयी खेल नीति में लिखा है कि सरकार विभिन्न खेल संघों, पूर्व खिलाडिय़ों व प्रशिक्षकों से इन सुविधाओं का उपयोग कराने के लिए खेल अकादमियों का गठन करायेंगी। हिमाचल प्रदेश के कई पूर्व खिलाड़ी जो खेल आरक्षण से सरकारी नौकरी में हैं अपनी डयूटी को ईमानदारी से करने के बाद सबेरे व शाम उभरते खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। कई खेलों में कई सरकारी नौकर जो पूर्व खिलाड़ी रहे हैं ईमानदारी से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये हुये हैं। क्या सरकार ऐसे जुनूनी शौकिया प्रशिक्षकों को खेल विभाग में कम से कम पांच वर्षों के लिए प्रतिनियुक्ति पर लाकर या उन्हीं के विभाग में उन्हें खेल प्रबंधन व प्रशिक्षण देने का अधिकार देकर हिमाचल प्रदेश की इन करोड़ों रुपए से बनी खेल सुविधाओं का सदुपयोग कर राज्य में खेलों को गति नहीं दे सकती है। सरकार इन विश्व स्तरीय प्ले फील्ड का रखरखाव ठीक ढंग से करवाये ताकि हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ी इन सुविधाओं का प्रयोग देर तक करें और राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन कर सकें। हिमाचल में खेलों के लिए यह नीति लाभप्रद होगी।

भूपिंद्र सिंह

अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

ईमेल: bhupindersinghhmr@gmail.com


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