भूपिंदर सिंह

आज के विद्यार्थी के लिए विद्यालय या घर पर आधे घंटे के फिटनेस कार्यक्रम की सख्त जरूरत है। इसमें 15 से 20 मिनट धीरे-धीरे दौडऩा तथा विभिन्न कोणों पर शरीर के जोड़ों की विभिन्न क्रियाओं को पूरा करने के बाद शरीर को कूलडाऊन करना होगा। कम से कम बीस मिनटों तक तेज चलने, दौडऩे व

प्रतिभा खोज के बाद पढ़ाई के साथ-साथ प्रशिक्षण के लिए अच्छी खेल सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए। इसके लिए राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान की तजऱ् पर अपना राज्य क्रीड़ा संस्थान हो। वहां पर हिमाचल प्रदेश के खिलाडिय़ों को वैज्ञानिक आधार पर लंबी अवधि के प्रशिक्षण शिविर लगें तथा प्रदेश के शारीरिक शिक्षकों व पूर्व राष्ट्रीय व

महाविद्यालय स्तर पर खेलों के लिए स्तरीय खेल ढांचे का होना बहुत जरूरी है… हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला और वल्लभ भाई पटेल राज्य विश्वविद्यालय मंडी, दोनों संयुक्त रूप से अंतर महाविद्यालय खेलों का आयोजन कर रहे हैं। कुछ प्रतियोगिताएं तो आयोजित भी हो चुकी हैं। इन खेलों के बारे में इस कॉलम के माध्यम से

इन नियमों का पालन करने के बाद अगर यौगिक क्रियाओं को किया जाता है तो मानव में शारीरिक व मानसिक स्तर पर आश्चर्यजनक रूप से अलौकिकता का सुधार होता है। आज आधुनिकता की इस अंधी दौड़ में इनसान को अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है क्योंकि आज मिट्टी, पानी व हवा, यानी

सरकार इन विश्व स्तरीय प्ले फील्ड का रखरखाव ठीक ढंग से करवाए ताकि देर तक इस पहाड़ी प्रदेश के खिलाड़ी इन सुविधाओं का प्रयोग कर अपने प्रदेश में स्तरीय ट्रेनिंग लेकर पलायन के दर्द से भी बच सकें… हमारे इस पहाड़ी राज्य में अन्य राज्यों के मुकाबले खेलों की तरफ ध्यान कम ही दिया जाता

अच्छी प्रशिक्षण सुविधा के अभाव में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी समय से पहले ही खेल को अलविदा कह जाते हैं और जिनके पास धन व साधन हैं वे अच्छे प्रशिक्षण के लिए हिमाचल प्रदेश से पलायन कर जाते हैं। हिमाचल प्रदेश में बहुत कम प्रशिक्षण केन्द्र हैं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाला खिलाड़ी बनने के लिए स्कूल

पिछली बार हुई भर्ती में विभाग ने नियमों को ठेंगा दिखा कर छह सप्ताह में प्रशिक्षण पूरा किए सर्टिफिकेट कोर्स वाले को प्रशिक्षक भर्ती कर दिया है… पिछले दो वर्षों से सुन रहे हैं प्रशिक्षक कैडर के भर्ती व पदोन्नति नियमों में सुधार कर लिया है, मगर अभी तक जूनियर प्रशिक्षक का स्केल और काम

बर्मिंघम में राष्ट्रमंडल खेल संपन्न हो चुके हैं। भारत बिना निशानेबाजों के भी सम्मानजनक चौथे स्थान पर है। जीते गए पदकों में हिमाचल के खिलाडिय़ों का भी योगदान है। हिमाचल सरकार को राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं के साथ-साथ अन्य राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के पदक विजेताओं को भी नई खेल नीति के अनुसार घोषित

हिमाचल प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह अपनी नई खेल नीति को कागजों से नीचे धरातल पर उतार कर उस पर अमल भी करना होगा। तभी हम प्रतिभा पलायन को रोक सकते हैं। हिमाचल प्रदेश के विद्यालयों व महाविद्यालयों में अच्छी खेल सुविधाओं के साथ-साथ ज्ञानवान प्रशिक्षक व पौष्टिक आहार का भी प्रबंध करना पड़ेगा।

राष्ट्रमंडल खेलों में पिछले दो बार के रजत पदक विजेता हमीरपुर के विकास ठाकुर इस तीसरी राष्ट्रमंडल खेलों में अब देश को स्वर्ण पदक जीतने के लिए कृतसंकल्प हैं। राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान पटियाला में राष्ट्रमंडल खेलों के लिए हुए क्वालीफाई ट्रायल में हिमाचल प्रदेश के ओलंपियन आशीष चौधरी ने अपने प्रतिभागियों को एक तरफा पछाड़ते