कुमति-सुमति सबके उर रहहिं

By: Mar 27th, 2025 12:06 am

ब्रह्मचारी की आंखें फटी की फटी रह गईं। जिसके पास फूटी कौड़ी भी नहीं थी, उसे दस सोने की मोहरें मिल चुकी थीं, और एक हजार मोहरें और भी मिल रही थीं। ब्रह्मचारी ने सोचा कि अगर मैंने दस मोहरों से कोई व्यवसाय ही करना है तो ब्रह्मचर्य के व्रत के कोई मायने नहीं हैं। अच्छा घर बनाऊंगा, बड़ा व्यवसाय करूंगा, आज तक जो शिक्षा मिली, इतनी ही काफी है। गुरु जी के पास जाने की जरूरत भी नहीं है। यह प्रस्ताव स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है। थोड़ी-बहुत आनाकानी के बाद ब्रह्मचारी ने महिला का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। अब वह महिला ठठाकर हंस पड़ी और बहुत कोमल स्वर में बोली कि ब्रह्मचारी जी, न तो मैं वैश्या हूं, और न ही आपसे भोग करने की मेरी कोई इच्छा है। मैं तो आपको बस यह समझाना चाहती थी कि पाप का मूल लालच है। बातें करके समझाती तो आप समझ न पाते। साबित करके दिखा दिया, अब यह आपके लिए जीवन भर का सबक है…

इनसान गलतियों का पुतला है। इसके बहुत से कारण हैं। पशु-पक्षियों के बच्चे जन्म के कुछ ही समय बाद आत्मनिर्भर हो जाते हैं। हम मानव लोग पैदा होने के समय तो असहाय होते ही हैं, अक्सर किशोरावस्था पार करने तक भी मां-बाप पर निर्भर होते हैं। जब तक हम पढ़ाई पूरी करके या कोई और हुनर सीख कर नौकरी में या व्यवसाय में नहीं चले जाते, तब तक हम आत्मनिर्भर नहीं हैं। नौकरी में या व्यवसाय में चले जाएं तो भी हमें बुद्धि आ ही जाए, यह भी आवश्यक नहीं है। हमें जीवन मिलता है, पर जीवन के साथ कोई इंस्ट्रक्शन मैनुअल नहीं मिलता कि जीवन कैसे जीना है। हमारी शिक्षा भी हमें कमाई के काबिल तो बना देती है, जीवन के काबिल नहीं बनाती। इसके लिए हमें अलग से शिक्षा की आवश्यकता होती है। आज हम आईक्यू, ईक्यू आदि के दीवाने तो हैं ही, हम इस बारीकी तक भी जाने को तैयार हैं कि हमें टेबल मैनर्स की जानकारी हो ताकि लोग हमसे प्रभावित हों। हमें करिअर में सफल होना सिखाया जाता है। धन कमाने, आगे बढऩे और करिअर में सफलता पाने की चाह में इतने पागल हैं कि बाकी सब भूल गए हैं। जैसे एक भैंस को चारा दिखा दें तो वह हमारे पीछे-पीछे चली आती है, वैसे ही कोई हमें धन का, उन्नति का, पदोन्नति का चारा दिखा दे तो हम कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। चारा मिल जाए तो चरित्र बिक जाता है, ईमान बिक जाता है, देह बिक जाती है। सवाल है कि क्या धन कमाना गलत है? क्या करिअर में सफल होना गलत है? क्या शक्तिशाली होना या सत्ता की चाह रखना गलत है? धन सिर्फ एक साधन है जिससे हम संसार के सुख और सुविधाएं खरीद सकते हैं, यहां तक कि ज्ञान भी खरीद सकते हैं। शिक्षा क्या है?

शिक्षा ज्ञान ही तो है, और शिक्षा पाने के लिए हमें धन की आवश्यकता है। हम बीमार हो जाएं तो इलाज के लिए धन चाहिए। घर बनाना हो तो धन चाहिए। भोजन के लिए धन चाहिए। धन जीवन की प्राथमिक आवश्यकता है, इसलिए धन कमाना गलत नहीं है। हम करिअर में सफल हो जाएं तो हम ऊंचे उठते हैं, सीखने के ज्यादा अवसर मिल जाते हैं। न धन कामना गलत है, न करिअर में सफल होना गलत है। गलत है लालच। गलत है भ्रष्टाचार। हम धन के लालच में कुछ भी करने को तैयार हो जाएं, यह गलत है। हम करिअर में सफलता के लालच में भ्रष्ट हो जाएं, यह गलत है। पुराने जमाने की बात है। एक ब्रह्मचारी ने अपने गुरु जी से सवाल पूछा कि पाप का मूल क्या है? गुरु जी ने कहा कि पास के गांव में चले जाओ। छोटा-सा गांव है, जिस घर के सामने पीपल का पेड़ दिखाई दे, उसका दरवाजा हमेशा खुला रहता है, बिना किसी हिचक के अंदर चले जाना। उस घर में एक अकेली महिला हैं, विदुषी हैं, वो तुम्हारे सवाल का जवाब देंगी। ब्रह्मचारी जब तक उस गांव पहुंचा तब तक शाम हो चुकी थी। सारे दिन के सफर से थका-मांदा ब्रह्मचारी जब घर के अंदर पहुंचा तो घर की मालकिन प्रौढ़ महिला ने आदर सहित ब्रह्मचारी का स्वागत किया और उनके लिए भोजन परोस लाई। ब्रह्मचारी जब भोजन का पहला कौर लेने लगा तो महिला ने कहा कि भोजन करने से पहले एक सच यह जान लीजिए कि मैं एक वैश्या हूं। ब्रह्मचारी बहुत नाराज हो गया। बोला कि आपने पहले क्यों नहीं बताया। मैं एक वैश्या के घर में घुस गया, मेरा तो धर्म भ्रष्ट हो गया। महिला ने बड़ी शांति से जवाब दिया कि संध्या हो चुकी है, आप थके हुए हैं, भोजन तो आवश्यक है ही। मैं बहुत धन कमा लेती हूं। अगर आप भोजन करेंगे तो मैं आपको सोने की दस मोहरें दूंगी। ब्रह्मचारी को महिला की बात तर्कसंगत भी लगी और यह भी सोचा कि सोने की दस मोहरें मिल जाएं तो कोई भी व्यवसाय शुरू कर लूंगा, जीवन आसानी से गुजरेगा। मुझे कौन देख रहा है, भोजन करने में क्या हर्ज है? यह सोच कर ब्रह्मचारी ने भोजन कर लिया।

अब उस महिला ने ब्रह्मचारी को सोने की दस मोहरें दे दीं और फिर कहा कि मैं तो वैश्या हूं। मेरे पास जो लोग आते हैं, ज्यादातर लोग बूढ़े होते हैं। मुझे आनंद नहीं मिल पाता। आप युवा हैं, ब्रह्मचारी भी हैं, यानी, आपकी शक्ति अभी तक संचित है, खर्च नहीं हुई, मुझे आपके साथ सोने में बहुत आनंद मिलेगा। यह सुनकर ब्रह्मचारी आगबबूला हो गया। उसने वैश्या को बहुत खरी-खोटी सुनाई और अपना झोला उठाकर जाने के लिए तैयार हो गया, तो महिला ने ब्रह्मचारी को सौ मोहरें और देने का प्रस्ताव रखा। ब्रह्मचारी और ज्यादा नाराज हो गया। महिला ने प्रेम से उसका हाथ पकड़ा तो ब्रह्मचारी ने महिला का हाथ झटक दिया। अब उस महिला ने उसे कुछ क्षण रुकने के लिए कहा। महिला अंदर के कमरे में गई और उसने ब्रह्मचारी के सामने एक हजार सोने की मोहरों का ढेर लगा दिया और कहा कि अगर आप मेरा प्रस्ताव स्वीकार कर लेंगे तो ये सारी मोहरें आपकी हो जाएंगी। ब्रह्मचारी की आंखें फटी की फटी रह गईं। जिसके पास फूटी कौड़ी भी नहीं थी, उसे दस सोने की मोहरें मिल चुकी थीं, और एक हजार मोहरें और भी मिल रही थीं। ब्रह्मचारी ने सोचा कि अगर मैंने दस मोहरों से कोई व्यवसाय ही करना है तो ब्रह्मचर्य के व्रत के कोई मायने नहीं हैं।

अच्छा घर बनाऊंगा, बड़ा व्यवसाय करूंगा, आज तक जो शिक्षा मिली, इतनी ही काफी है। गुरु जी के पास जाने की जरूरत भी नहीं है। यह प्रस्ताव स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है। थोड़ी-बहुत आनाकानी के बाद ब्रह्मचारी ने महिला का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। अब वह महिला ठठाकर हंस पड़ी और बहुत कोमल स्वर में बोली कि ब्रह्मचारी जी, न तो मैं वैश्या हूं, और न ही आपसे भोग करने की मेरी कोई इच्छा है। मैं तो आपको बस यह समझाना चाहती थी कि पाप का मूल लालच है। बातें करके समझाती तो आप समझ न पाते। साबित करके दिखा दिया, अब यह आपके लिए जीवन भर का सबक है। ब्रह्मचारी की आंखों से आंसू बहने लगे। उसने महिला के पांव पकड़ लिए। दस मोहरें भी वापस कर दीं। जो ब्रह्मचारी एक क्षण पहले व्यभिचार के लिए तैयार था, वह अब पश्चाताप के आंसू बहाकर निर्मल हो गया था। सच कहा गया है कि कुमति-सुमति सबके उर रहहीं। हम सब के भीतर अच्छाई और बुराई दोनों हैं। हम ही रावण हैं, हम ही राम हैं। हम अपने जीवन में कौनसा रास्ता चुनते हैं, यह हमारी स्वतंत्रता है। आइए, हम सही राह पहचानें, सही राह चुनें और जीवन सफल बनाएं।

स्पिरिचुअल हीलर, सिद्ध गुरु प्रमोद निर्वाण

गिन्नीज विश्व रिकार्ड विजेता लेखक

ई-मेल: indiatotal.features@gmail.com


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App or iOS App