रिश्तों की बारात
हम धन की निंदा नहीं करते, धन को बुरा नहीं मानते, हम सब गृहस्थ संन्यासी हैं और हमने न घर छोड़ा है, न परिवार छोड़ा है, न दुनिया छोड़ी है। हम सब अपनी-अपनी नौकरी या व्यवसाय में लगे हैं। हम मानते हैं कि धन का दुरुपयोग बुरा है, धन का लालच बुरा है, धन के लिए धोखा देना, झूठ बोलना या ठगना बुरा है, खुद धन बुरा नहीं है, अमीर होना बुरा नहीं है, गरीबी कोई गुण नहीं है, अमीरी कोई दुर्गुण नहीं है। धन हो तो अच्छी शिक्षा लेना, दुनिया देखना, जोखिम लेना और किसी की सहायता करना आसान हो जाता है। धन हमें अपने ढंग से जीने की स्वतंत्रता देता है, धन हमें समय के सदुपयोग की स्वतंत्रता देता है, धन हमें अपने मनचाहे निर्णय लेने की स्वतंत्रता देता है। खुद से, परिवार से, रिश्तेदारों, दोस्तों, सहकर्मियों और जान-पहचान वालों से हमारा रिश्ता, धन और समय के साथ हमारा रिश्ता महत्वपूर्ण है, पर परमात्मा के साथ हमारा रिश्ता इन सबसे ऊपर है। जब हम हर जीव में परमात्मा का प्रकाश देखते हैं तो हम प्रेममय हो जाते हैं और हमारे दृष्टिकोण में दयालुता अपने आप आ जाती है…
यह सच ही है कि हमारा दिमाग हमारा सबसे बड़ा दोस्त है और हमारा दिमाग ही हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है। हमारे पूर्वज जब जंगलों में रहते थे तो उनका जीवन बहुत कठिन था। हर ओर से खतरा ही खतरा था। भोजन के साधन और विकल्प सीमित थे। जीवन हर रोज संकट में होता था। शेर, चीता, भेडिय़ा आदि ही नहीं, सांप और बिच्छू भी घातक हो सकते थे। जानवर अपना भोजन बन सकता हो तो मार लो, और खतरनाक हो तो भाग लो। हमारे पूर्वजों के साथ ‘फाइट ऑर फ्लाइट’ की यह स्थिति इतने लंबे समय तक रही कि वह हमारे जन्म-जन्मांतर के संस्कार का हिस्सा बन गई। मनोविज्ञान कहता है कि यदि हमारे सामने कोई ऐसा काम आ जाए जो कठिन है या नापसंद है, तो हमारा दिमाग उसे न करने के बहाने गढ़ लेता है और हमें समझ भी नहीं आता कि हमारे अपने दिमाग ने ही हमें किस तरह से गलत रास्ते पर डाल दिया। हमारे सामने कोई कठिन काम आ जाए तो हमारा दिमाग हमें कहेगा कि पांच मिनट सैर करके तरोताजा हो जाएं ताकि काम को अच्छे से अंजाम दे सकें, या यह कि हमारी दराज में बहुत खिचपिच हो गई है, थोड़ा इसे साफ कर लें, फिर तसल्ली से काम शुरू कर देंगे, आदि-आदि। इसी तरह हमारा दिमाग हमें बहका कर दूसरी तरफ मोड़ देता है और सारा दिन बीत जाने पर हमें याद आता है कि असली काम तो हमने किया ही नहीं।
हमारा दिमाग एक घोड़े की तरह है। लगाम हो तो यह हमारे काबू में रहता है और बेलगाम हो जाए तो हम किसी काम के नहीं रहते। यही कारण है कि दिमाग को काबू में रखने के लिए हमें कुछ चीजों से अपने रिश्ते का विश्लेषण करते रहना चाहिए। ‘सहज संन्यास मिशन’ में हम इसे ही ‘रिश्तों की बारात’ कहते हैं। ये रिश्ते हैं, खुद से रिश्ता, परिवार से रिश्ता, रिश्तेदारों, सहकर्मियों, दोस्तों और जान-पहचान वालों से रिश्ता, वृहत्तर समाज से रिश्ता, समय से रिश्ता, धन से रिश्ता, और परमात्मा से रिश्ता। अपने आप से हमारा खुद का रिश्ता हमारे पूरे जीवन को परिभाषित करता है। हम खुद को प्यार करें, अपनी कमियों और गलतियों से सबक सीखें पर खुद में हीनभावना न आने दें, आत्मविश्वास से लबरेज रहें तो बहुत से काम आसान हो जाते हैं। हम काम शुरू करने से पहले ही हार नहीं मानते, काम में कहीं अटक जाएं तो निराश नहीं होते बल्कि चुनौतियों और समस्याओं के समाधान ढूंढते हैं। आत्मविश्वास हो तो हमें किसी से सीखने में या सहायता मांगने में हिचक नहीं होती। इसमें कोई शक नहीं कि हमारा परिवार हमारा सबसे बड़ा सहारा है और हमारे परिवार के सदस्य निस्वार्थ भाव से हमारी सहायता करते हैं, हमारी कमियों और गलतियों का बुरा माने बिना हमें सही राह दिखाते हैं। पशु-पक्षियों और जानवरों के बच्चे बहुत जल्दी आत्मनिर्भर हो जाते हैं, लेकिन मनुष्यों के बच्चे बहुत लंबे समय तक मां-बाप और परिवार पर निर्भर रहते हैं। परिवार से हमारा रिश्ता स्वस्थ हो तो हमें अकेलापन महसूस नहीं होता, आत्मविश्वास बढ़ जाता है और हमारे लिए जोखिम लेना भी आसान हो जाता है।
हमारे बहुत से रिश्तेदार और दोस्त हमारे शुभचिंतक होते हैं। हमारा व्यवहार संतुलित हो तो हमारे रिश्तेदार, दोस्त, सहकर्मी और जान-पहचान वाले लोग भी आड़े समय हमारे काम आते हैं। यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि वृहत्तर समाज से हमारा रिश्ता हमारे रिश्तेदारों, दोस्तों, सहकर्मियों और जान-पहचान वाले दीगर लोगों से हमारे रिश्ते को प्रभावित करता है। जब हम अपना स्वार्थ छोडक़र दूसरों के काम आने की आदत अपना लेते हैं और अपने संपर्क में आने वाले लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं, तो दूसरे लोग भी हमारे आड़े वक्त में हमारे काम आते हैं। अक्सर दूसरों के साथ हमारा व्यवहार ही यह तय करता है कि हम जीवन में कितने सफल होंगे। समय के साथ हमारा रिश्ता हमारी सफलता या असफलता का बहुत बड़ा कारक है। हम अपने समय की कीमत समझते हैं या नहीं, हम अपने समय का सदुपयोग करते हैं या नहीं, हम अपने समय के मामले में सजग हैं या नहीं, हमारे जीवन की दशा-दिशा तय करने में इसका बहुत बड़ा हाथ है। हम अपने लक्ष्य के प्रति सजग हों और उपलब्ध समय का पूरी संजीदगी से उपयोग करें तो सफलता हमारे कदम चूमती है। समय बर्बाद करने वाली आदतों से खुद को बचा कर रखना और समय बर्बाद करने वाले लोगों से खुद को बचा कर रखना हमारी जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। इस मामले में हम जितने स्पष्ट होंगे, लोग हमारे समय का उतना ही आदर करेंगे। समय के साथ हमारे रिश्ते की ही तरह धन के साथ हमारा रिश्ता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सहज संन्यास परंपरा के हम संन्यासी लोग भी धन के महत्व को नहीं नकारते। हम धन की निंदा नहीं करते, धन को बुरा नहीं मानते, हम सब गृहस्थ संन्यासी हैं और हमने न घर छोड़ा है, न परिवार छोड़ा है, न दुनिया छोड़ी है। हम सब अपनी-अपनी नौकरी या व्यवसाय में लगे हैं। हम मानते हैं कि धन का दुरुपयोग बुरा है, धन का लालच बुरा है, धन के लिए धोखा देना, झूठ बोलना या ठगना बुरा है, खुद धन बुरा नहीं है, अमीर होना बुरा नहीं है, गरीबी कोई गुण नहीं है, अमीरी कोई दुर्गुण नहीं है। धन हो तो अच्छी शिक्षा लेना, दुनिया देखना, जोखिम लेना और किसी की सहायता करना आसान हो जाता है। धन हमें अपने ढंग से जीने की स्वतंत्रता देता है, धन हमें समय के सदुपयोग की स्वतंत्रता देता है, धन हमें अपने मनचाहे निर्णय लेने की स्वतंत्रता देता है। खुद से, परिवार से, रिश्तेदारों, दोस्तों, सहकर्मियों और जान-पहचान वालों से हमारा रिश्ता, धन और समय के साथ हमारा रिश्ता महत्वपूर्ण है, पर परमात्मा के साथ हमारा रिश्ता इन सबसे ऊपर है। जब हम हर जीव में परमात्मा का प्रकाश देखते हैं तो हम प्रेममय हो जाते हैं और हमारे दृष्टिकोण में दयालुता अपने आप आ जाती है। हम ब्रह्मांड से जुड़ जाते हैं और इस ब्रह्मांड के संसाधनों का आदर करना सीख लेते हैं। हम परमात्मा के प्रति समर्पित हो जाते हैं और हमारा हर काम ही पूजा हो जाता है। परमात्मा के प्रति समर्पण पूरा हो जाए तो रिश्तों की यह बारात सार्थक हो जाती है और जीवन सफल हो जाता है। जीवन का अंतिम लक्ष्य भी तो यही है। जहां हमें भौतिक संसाधनों की जरूरत रहती है, वहीं जीवन का अंतिम लक्ष्य तो मोक्ष प्राप्त करना ही है।
स्पिरिचुअल हीलर
सिद्ध गुरु प्रमोद निर्वाण, गिन्नीज विश्व रिकार्ड विजेता लेखक
ई-मेल: indiatotal.features@gmail.com
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