एक बीज से पूरा वन

By: Oct 9th, 2025 12:05 am

अपने समय के प्रसिद्धतम और महानतम मुक्केबाज मुहम्मद अली ने एक बार कहा था कि मैं अपने काम में जान लड़ा देता हूं। मैं अगर मुक्केबाज की जगह जमादार भी होता तो मैं संसार का सर्वश्रेष्ठ जमादार होता। कितनी बड़ी बात है यह, और कितनी प्रेरक कि आदमी अगर जमादार भी हो तो अपने काम में जान लड़ा दे, सर्वश्रेष्ठ बन जाए। संदीप जोशी यही कर रहे हैं। वे इतिहास तो पढ़ाते ही हैं, पर उसे यूं पढ़ा रहे हैं कि साथ ही इतिहास बना भी रहे हैं। जब हम जीवन में काम के साथ लक्ष्य जोड़ लेते हैं और लक्ष्य के साथ समाज की भलाई भी जोड़ लेते हैं तो वह काम सिर्फ काम नहीं रह जाता, पूजा बन जाता है, अर्चना बन जाता है, आरती हो जाता है, फिर वहीं मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च है और वहीं ईश्वर हैं। जब ऐसा हो जाता है तो हम ईश्वर को जानें या न जानें, पर ईश्वर हमें जान लेते हैं। समाज की भलाई से जुड़ा लक्ष्य भक्ति है, बल्कि परम भक्ति है। हम आस्तिक हों या नास्तिक, समाज की भलाई से जुड़ा हमारा लक्ष्य हमें फायदा ही देता है क्योंकि सांसारिक रूप में हमें यश मिलता है, सम्मान मिलता है…

किसी समझदार संवेदनशील व्यक्ति का कोई एक छोटा-सा विचार समाज में कैसा परिवर्तन ला सकता है, अगर ये देखना हो तो हमें राजस्थान के जालोर जिले के गांव रेवत के गवर्नमेंट सीनियर सैकेंडरी स्कूल के लेक्चरर संदीप जोशी से सीखने की जरूरत है। एक छोटा सा बीज पृथ्वी की कोख से बाहर आकर पहले पौधा और फिर एक बड़ा और स्वस्थ वृक्ष बन जाता है। इस प्रक्रिया में उस वृक्ष के फलों से और बीज बनते हैं जिनसे पूरा वन उभर आता है जो जीवन में हरियाली ला देता है। संदीप जोशी के एक विचार ने राजस्थान के इन गांवों में इसी हरियाली का आगाज किया है। एक विषय के रूप में स्कूल और कालेज में हम विश्व भर का इतिहास पढ़ते हैं, देश का इतिहास पढ़ते हैं, लेकिन अपने गांव, कस्बे या शहर के इतिहास से अनजान रहते हैं। बच्चे पढ़ाई में इतने मशगूल होते हैं कि कभी मन में शायद यह सवाल भी नहीं उठता कि अपने गांव, कस्बे या शहर का इतिहास जानें। संदीप जोशी को यही कमी खलती थी सो उन्होंने इस समस्या के निराकरण के बारे में सोचना शुरू किया। ‘जहां चाह, वहां राह’ की कहावत यूं ही नहीं बनी। संदीप जोशी ने जब समस्या पर दिमाग केंद्रित किया तो अगला विचार यह आया कि गांव के बड़े बुजुर्गों को पुराना इतिहास पता होता है, जो उन्होंने खुद देखा होता है या अपने पुरखों से सुन रखा होता है। अब एक कदम आगे बढक़र संदीप जोशी ने ग्यारहवीं और बारहवीं क्लास के अपने विद्यार्थियों को होमवर्क के बजाय यह काम देना शुरू किया कि वे गांव के बुजुर्गों के पास बैठें और उनसे गपशप करते हुए स्थानीय इतिहास की जानकारी लें। सन् 2018 की गर्मी की छुट्टियों और दिवाली की छुट्टी में उन्होंने बच्चों को यही होमवर्क सौंपा। स्थानीय इतिहास की जानकारी एक मनोरंजक और ज्ञानवद्र्धक काम तो था ही, इसके साइड इफैक्ट और भी शानदार बन गए।

आठ साल से जारी इस प्रक्रिया में बच्चे परिवार के ही नहीं, बल्कि गांव के अन्य बुजुर्गों के पास घंटों बिताते हैं, उनसे गप्पें लड़ाते हैं, सवाल पूछते हैं, इतिहास के अलावा और बहुत सी बातें सीखते हैं और सबसे बड़ी बात इन बुजुर्गों के अकेलेपन का इलाज मुफ्त हो गया। अब ये बुजुर्ग बोर नहीं होते, उपेक्षित महसूस नहीं करते, उनका जीवन आनंदमय हो गया है, उनका स्वास्थ्य बेहतर हुआ है, उम्र बढऩे लगी है। ये बच्चे घर आकर अपने माता-पिता को नई-नई बातें बता रहे हैं, सबका ज्ञान बढ़ रहा है। ये बच्चे मनोरंजन के लिए सिर्फ मोबाइल और सोशल मीडिया के गुलाम नहीं रह गए हैं और बुजुर्गों से ज्ञान की बातें सीखकर इन बच्चों के मन में बुजुर्गों के प्रति सम्मान बढ़ा है, इस गपशप के कारण तीन-तीन पीढिय़ों के आपसी रिश्ते मजबूत हुए हैं। राजस्थान के जालोर जिले के ही दो गांवों रेवत और कलापुरा में बच्चों और बुजुर्गों के बीच वार्तालाप की यह प्रक्रिया पिछले आठ साल से अनवरत जारी है। स्कूल के प्रिंसिपल छगन पुरी गोस्वामी का कहना है कि इससे एक विषय के रूप में बच्चों में इतिहास के प्रति लगाव बढ़ा है। बहुत से बच्चे जो इतिहास को एक नीरस विषय मानते थे और तिथियां और अंग्रेजी शासकों के नाम याद रखने में गड़बडिय़ां करते थे, वे अब कहीं अधिक सजगता से इतिहास पढ़ते हैं, समझते हैं और पहले जहां वे पूरी मेहनत के बावजूद 60 से 70 प्रतिशत तक नंबर ला पाते थे, अब वे इम्तिहान में सौ में से सौ नंबर भी लेने लग गए हैं। ये बच्चे बुजुर्गों की बताई कहानियां नोटबुक में लिखते हैं, उनके ऑडियो-वीडियो रिकार्ड करते हैं। किसी बुजुर्ग से सुनी एक ही कहानी को हर बच्चा अपने अंदाज में लिखता है। जब सभी बच्चों की कापियां स्कूल में इक_ी हो जाती हैं तो उनमें से एक सरीखी कहानी को स्कूल की बड़ी पोथी में दर्ज कर दिया जाता है। इस तरह पिछले आठ साल में तीन सौ के करीब बच्चों ने अपने-अपने गांव के इतिहास की कहानियां दर्ज की हैं और वे अपने इतिहास पर गर्व करने के काबिल बने हैं। संदीप जोशी का यह विचार आज सिर्फ एक विचार नहीं है, बल्कि इसने उस पूरे इलाके में एक क्रांति सी ला दी है। एक छोटा-सा कदम आज की गौरवशाली यात्रा बनकर सामने आया है और यह यात्रा किसी आध्यात्मिक तीर्थ यात्रा से किसी भी रूप में कमतर नहीं है। इस सारी कहानी से जो एक बड़ी सीख मिलती है, वो ये है कि हम किसी भी पद पर हों, कोई भी काम कर रहे हों, उसे अगर हम एक उद्देश्य दे दें, उसमें एक बड़ा लक्ष्य जोड़ दें तो वही काम एक जबरदस्ती के कत्र्तव्य से आगे बढक़र एक क्रांति बन सकता है।

मैं सिर्फ अध्यापक हूं या मैं देश के जिम्मेदार नागरिक तैयार कर रहा हूं? मैं सिर्फ एक डाक्टर हूं या मैं देश को स्वस्थ नागरिक दे रहा हूं? अपने समय के प्रसिद्धतम और महानतम मुक्केबाज मुहम्मद अली ने एक बार कहा था कि मैं अपने काम में जान लड़ा देता हूं। मैं अगर मुक्केबाज की जगह जमादार भी होता तो मैं संसार का सर्वश्रेष्ठ जमादार होता। कितनी बड़ी बात है यह, और कितनी प्रेरक कि आदमी अगर जमादार भी हो तो अपने काम में जान लड़ा दे, सर्वश्रेष्ठ बन जाए। संदीप जोशी यही कर रहे हैं। वे इतिहास तो पढ़ाते ही हैं, पर उसे यूं पढ़ा रहे हैं कि साथ ही इतिहास बना भी रहे हैं। जब हम जीवन में काम के साथ लक्ष्य जोड़ लेते हैं और लक्ष्य के साथ समाज की भलाई भी जोड़ लेते हैं तो वह काम सिर्फ काम नहीं रह जाता, पूजा बन जाता है, अर्चना बन जाता है, आरती हो जाता है, फिर वहीं मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च है और वहीं ईश्वर हैं। जब ऐसा हो जाता है तो हम ईश्वर को जानें या न जानें, पर ईश्वर हमें जान लेते हैं। समाज की भलाई से जुड़ा लक्ष्य भक्ति है, बल्कि परम भक्ति है। हम आस्तिक हों या नास्तिक, समाज की भलाई से जुड़ा हमारा लक्ष्य हमें फायदा ही देता है क्योंकि सांसारिक रूप में हमें यश मिलता है, सम्मान मिलता है, नए और मजबूत संबंध बनते हैं, पुरस्कार मिलने की संभावना हो जाती है और अंतत: धन भी मिल सकता है, और अगर हम आस्तिक हैं तो यह स्पष्ट है कि हम परमात्मा के प्रिय व्यक्तियों में शामिल हो जाते हैं क्योंकि हमने एक बीज गढ़ा और उसे पुष्पित-पल्लवित करके वृक्ष बनने और वन बनने का अवसर दिया। एक बीज से पूरा वन बन जाए, यह क्या कम है?

स्पिरिचुअल हीलर, सिद्ध गुरु प्रमोद निर्वाण

गिन्नीज विश्व रिकार्ड विजेता लेखक

ई-मेल:indiatotal.features@gmail.com


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