भारत के लिए बेहतर आर्थिक संभावनाएं
एक अप्रैल 2026 से नए श्रम कानून लागू होने से उद्योग-कारोबार व निर्यात बढऩे का परिदृश्य उभरकर दिखाई देगा। निश्चित रूप से वर्ष 2026 में भारत के लिए बेहतर आर्थिक संभावनाएं हैं, हालांकि राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करना होगा…
नए साल 2026 की आर्थिक संभावनाओं पर प्रकाशित विभिन्न वैश्विक आर्थिक संगठनों की रिपोर्टों के मुताबिक नया साल 2026 भारत के लिए बेहतर आर्थिक संभावनाओं वाला वर्ष होगा। जहां केयर एज रेटिंग्स के मुताबिक आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में भारत की अर्थव्यवस्था सात फीसदी की दर से बढ़ सकती है, वहीं एक्सिस बैंक की रिपोर्ट के अनुसार आगामी वर्ष में भारत की विकास दर 7.5 फीसदी के ऊंचे स्तर पर पहुंचते हुए दिखाई दे सकेगी। जहां भारत वर्ष 2025 में 4.18 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, वहीं अब भारत नए साल 2026 से तेज रफ्तार के साथ अगले ढाई से तीन साल में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की डगर पर आगे बढ़ेगा। वैश्विक निवेश फर्म इन्वेसको के मुताबिक साल में भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में रेखांकित होते हुए दिखाई देगा। भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चिताओं के बीच आर्थिक और वित्तीय सुधारों के साथ बढऩा होगा। गौरतलब है कि नए वर्ष 2026 में घरेलू बाजार की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभप्रद होगी। नए वर्ष में भारत का घरेलू बाजार 10 फीसदी से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ेगा और इस तेज गति से वर्ष 2030 तक भारत का घरेलू बाजार लगभग 237 अरब डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच सकता है। नए वर्ष 2026 में महंगाई घटने, टैक्स सुधार और ब्याज दर में कमी से घरेलू बाजार को रफ्तार से बढऩे के आधार मिलेंगे। रिजर्व बैंक का कहना है कि वर्ष 2026 में महंगाई में कमी बनी रहेगी।
जिस तरह नए ऐतिहासिक वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) सुधारों के तहत 5 फीसदी और 18 फीसदी स्लैब वाले दो-स्तरीय जीएसटी को स्लैब लागू किया गया है, उसका लाभ वर्ष 2026 से उभरकर दिखने लगेगा। निश्चित रूप से नए वर्ष 2026 में जीएसटी सुधार देश के हर नागरिक के लिए एक बड़ा उपहार दिखाई देंगे। इसके साथ ही एक अप्रैल 2026 से लागू किया जाने वाला नया इनकम टैक्स कानून महज कुछ धाराओं के बदलाव ही नहीं, बल्कि पूरी टैक्स व्यवस्था के कायापलट के साथ अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया है। इससे मध्यम वर्ग के लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। मध्यम वर्ग के द्वारा उत्पादों की खरीदी पर अधिक धन खर्च करने से मांग बढ़ेगी और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के द्वारा 5 दिसंबर को रेपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती के बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत हो गई है और इसमें अब मार्च 2026 में और कमी होने की संभावना है। ऐसे में सस्ते कर्ज से वर्ष 2026 में ग्रामीण मांग के साथ-साथ शहरी मांग में सुधार होने से स्थानीय और घरेलू बाजार तेजी से आगे बढ़ सकंेगे। वैश्विक वित्तीय सलाहकार फर्म ग्लोबल वेल्थ मैनेजर की नई रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2026 में खपत के स्तर में सुधार के मामले में भारत दुनिया का सबसे आकर्षक बाजार होगा। निश्चित रूप से नए वर्ष 2026 में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। इसमें कोई दोमत नहीं है कि वर्ष 2026 को जो बेहतर कृषि परिदृश्य विरासत में मिला है, उससे नए वर्ष में ग्रामीण अर्थव्यवस्था रफ्तार से बढ़ेगी, देश में कृषि क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ेगा। इसके साथ-साथ देश में कृषि उन्नयन, खेती में नवाचार को प्रोत्साहन देने, लागत को कम करते हुए उत्पादन के साथ ही किसानों की आय बढ़ाने का अभूतपूर्व अभियान आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे सकेगा। ज्ञातव्य है कि नए वर्ष 2026 में खाद्यान्न उत्पादन पिछले वर्ष में हुए खाद्यान्न उत्पादन 37.70 करोड़ टन से अधिक के स्तर पर पहुंचते हुए दिखाई देगा।
नए वर्ष में मनरेगा की जगह लागू वीबी-जी राम जी से भी ग्रामीण रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। नि:संदेह नए वर्ष 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था के तहत बढ़ते उद्योग-कारोबार, सर्विस सेक्टर, बुनियादी ढांचा, शेयर बाजार और मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति के कारण देश में जीएसटी और इनकम टैक्स संग्रहण में तेज वृद्धि होगी। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच जीएसटी संग्रह पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले बढक़र 14.75 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसी प्रकार मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में बीते हुए वर्ष से अधिक आयकर रिटर्न और अधिक आयकर प्राप्ति का परिदृश्य उभरकर दिखाई दे रहा है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दिसंबर तक 8.44 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए गए हैं। यदि हम मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की ओर देखें तो पाते हैं कि भारत के द्वारा वर्ष 2025 में ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ किए गए एफटीए का 2026 में कार्यान्वयन शुरू होगा। साथ ही नए वर्ष में अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, पेरू, चिली, आसियान, मैक्सिको, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, इजराइल, भारत गल्फ कंट्रीज काउंसिल सहित अन्य प्रमुख देशों के साथ भी एफटीए आकार लेते हुए दिखाई देंगे। इन सबके साथ-साथ नए वर्ष में मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और चार यूरोपीय देशों आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टाइन के समूह यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) के बीच हुए एफटीए के लाभ वर्ष 2025 की तुलना में अधिक मिलते हुए दिखाई देंगे।
इन सबके साथ-साथ नए वर्ष 2026 में कई और अच्छी आर्थिक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। वर्ष 2026 में भारतीय शेयर बाजार रफ्तार से आगे बढ़ेगा। वर्ष 2026 में बड़ी संख्या में विदेशी निवेशकों का रुझान भारत की ओर बढ़ेगा। वर्ष 2026 में रिजर्व बैंक डॉलर की तुलना में रुपए की कीमत गिरने से बचाने के लिए बैंकिंग सिस्टम में 3 लाख करोड़ रुपए की नकदी डालेगा। एक अप्रैल 2026 से नए श्रम कानून लागू होने से उद्योग-कारोबार व निर्यात बढऩे का परिदृश्य उभरकर दिखाई देगा। निश्चित रूप से वर्ष 2026 में भारत के लिए बेहतर आर्थिक संभावनाएं हैं, लेकिन भारत को अपनी मजबूत आर्थिक गति को बनाए रखने के लिए वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच घरेलू खपत बढ़ाने, रोजगार सृजन और राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण के साथ आर्थिक सुधारों की डगर पर आगे बढऩा होगा।
डा. जयंती लाल भंडारी
विख्यात अर्थशास्त्री
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