डा. जयंतीलाल भंडारी

चूंकि कई विकसित और विकासशील देशों में तेजी से बूढ़ी होती आबादी के कारण उद्योग-कारोबार व सर्विस सेक्टर के विभिन्न कामों के लिए युवा हाथों की कमी हो गई तथा श्रम लागत बढऩे से ये देश कार्यबल संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में भारत को इस मौके को भुनाते हुए तेजी से आगे बढऩा होगा। सरकार ने 2023 तक भारतीय श्रमिक उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न देशों के साथ 13 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। ऐसे समझौतों को और बढ़ाने की रणनीति बनानी होगी...

चूंकि भारत लगातार चालू खाते के घाटे से जूझ रहा है और भारत को विदेशी बचतों को हासिल करने की जरूरत है, इसलिए एफडीआई भारत में विदेशी बचतों के सबसे टिकाऊ स्रोत के रूप में लाभप्रद होगा। भारत की विकास दर के 8.2 प्रतिशत रहने से नई सरकार को व्यय प्रबंधन में मदद मिलेगी...

यह बात ध्यान रखी जानी होगी कि मजबूत बुनियादी सिद्धांतों के बावजूद, भारतीय फार्मा-मेडटेक क्षेत्र सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (एपीआई) और प्रमुख प्रारंभिक सामग्री (केएसएम) पर उच्च स्तर की आयात निर्भरता, उच्च स्तरीय स्कैनिंग और इमेजिंग उपकरणों में कम तकनीकी क्षमताओं जैसी चुनौतियों से ग्रस्त है....

हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, पायथन वर्चुअल रियल्टी, रोबोटिक प्रोसेस, ऑटोमेशन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डाटा एनालिसिस, क्लाउड कम्प्यूटिंग, ब्लॉक चेन और सायबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवाओं को कुशल बनाना होगा...

हम उम्मीद करें कि इस चुनाव के बाद देश में एक ऐसी मजबूत और प्रभावी सरकार का गठन होना जरूरी है जिसके द्वारा प्रवासियों के साथ स्नेह व सहभागिता के नए अध्याय लिखे जा सकेंगे। साथ ही प्रवासी भारतीय अपने ज्ञान व कौशल की शक्ति से भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने, वर्ष 2027 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में भू

हम उम्मीद करें कि सरकार अभी भी देश में गरीब वर्ग के 15 करोड़ से अधिक लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर लाने के लिए गरीबों तक डिजिटलीकरण की सरल पहुंच सुनिश्चित करेगी। डिजिटल आधारित भारत की नई दुनिया में सौ फीसदी विश्वसनीयता बनाए रखने हेतु रणनीतिक प्रयत्न सुनिश्चित किए जाएंगे। साथ ही भारत के आम आदमी की डिजिटल सहभागिता बढ़ाने के लि

निश्चित रूप से भारत को विकसित देश बनाने के लिए वर्तमान विकास मॉडल में सुधार करना होगा। विकास मॉडल में समृद्ध भारत के साथ समावेशी भारत की तस्वीर को हरदम सामने रखना होगा। जहां देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ाते रहना हो

अधिकांश भारतीय खिलौने ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर उपलब्ध कराए जाने चाहिएं, ताकि घरेलू खिलौनों की बिक्री को और बढ़ाया जा सके। यह भी जरूरी है कि सरकार के द्वारा प्रस्तावित की गई पारंपरिक और यांत्रिक खिलौनों दोनों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शीघ्र शुरू की जाए। देश में सुगठित खिलौना प्रशिक्षण और डिजाइन संस्थान की स्थापना को मूर्तरूप देना होगा...

यह अभूतपूर्व खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था नए भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बहुआयामी उपयोगिता देते हुए दिखाई देगी। हम उम्मीद करें कि लोकसभा चुनाव के बाद गठित होने वाली नई सरकार कृषि एवं ग्रामीण विकास के साथ-साथ कृषि सुधारों की डगर पर तेजी से आगे बढ़ेगी...

हमें यह ध्यान रखना होगा कि वर्ष 2047 तक देश को विकसित देश बनाने के लिए सरकार के द्वारा आम आदमी की प्रति व्यक्ति आय और खुशहाली बढ़ाने के लिए जो व्यय किए जाते हैं, वे उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जिस तरह सरकार के द्वारा बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश लाभप्रद होता है। उम्मीद है सरकार रणनीतिक रूप से कारगर प्रयासों की राह पर आगे बढ़ेगी..