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Himachal Lifestyle: 5 दिन क्यों कपड़े नहीं पहनती हैं यहां की महिलाएं, हिमाचल से कनेक्शन

By: Feb 8th, 2026 1:43 pm

दिव्य हिमाचल डिजिटल डेस्क

प्रकृति की गोद में बसा हिमाचल जितना खूबसूरत है, उतनी ही रहस्यमय है यहां की जिंदगी। यहां हर कोस पर जैसी पानी बदल जाता है, वैसे ही यहां की वाणी और रीति-रिवाजों में भी परिवर्तन देखने को मिल जाता है। रहस्यों से भरे हिमाचल में संस्कृति के बेजोड़ उदाहरण और प्रथाएं देखने को मिल जाती हैं। इन प्रथाओं का पालन करना ही हिमाचलियों का कर्तव्य है, तभी तो हिमाचल देश के अन्य राज्यों से अलग स्थान रखता है।

हिमाचल का कुल्लू जिला देवी-देवताओं की आस्था का अद्भुत नमूना है, जिस पर हर प्रदेशवासी को गर्व है। खैर, आज हम बात करेंगे कुल्लू जिला के मणिकर्ण की, जहां एक अनोखी परंपरा है। यह परंपरा है मणिकर्ण घाटी के पिणी गांव की। गांव में साल में पांच दिन ऐसे आते हैं, जिनमें महिलाएं कपड़े नहीं पहनतीं। यहां तक कि पुरुषोंं को भी एक सख्त दौर से गुजरना पड़ता है। यह पांच दिन आते हैं सावन महीने में, जिन्हें एक त्योहार की तरह मनाया जाता है।

क्यों कपड़े नहीं पहनतीं महिलाएं?
पिणी गांव में सावन के दौरान शादीशुदा महिलाओं के पांच दिन कपड़े न पहनने की परंपरा है। यहां के लोग एक देव परंपरा का पालन कर रहे हैं। दरअसल, कई साल पहले यहां राक्षसों को बोलबाला था, जो यहां की जनता पर बड़ा अन्याय करते थे। राक्षसों का आतंक इतना था कि ये सुंदर कपड़ों में सजी-धजी महिलाओं को उठा ले जाते थे। राक्षसों के खौफ से महिलाएं डरी-सहमी रहती थीं। फिर एक दिन लाहुआ घोंट नाम के एक देवता ने राक्षसों को मार दिया और जनता को सुख-चैन के दिन लौटा दिए। गांव वालों का दावा है कि राक्षसों को मारने के बाद देवता ने ग्रामीणों को कुछ नियमों का पालन करने के लिए कहा था, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी घटनाएं न हों। इनमें से एक नियम था कि सावन में पांच दिन महिलाएं कपड़े न पहनें, क्योंकि ऐसा करने से राक्षस उनकी तरफ आकर्षित नहीं होंगे। उसी परंपरा के चलते महिलाएं पांच दिन तक बिना कपड़ों के रहती हैं और घर से बाहर तक नहीं निकलतीं। हालांकि वक्त के साथ परंपरा में बदलाव भी हुआ है। अब महिलाएं सावन में पांच दिन ऊन से बने एक पट्टू से शरीर को ढक लेती हैं। हालांकि गांव की सभी महिलाओं को ऐसा करने के लिए अब बाध्य नहीं किया जाता है, लेकिन फिर भी कई महिलाएं इस पंरपरा को बखूवी निभा रही हैं।

पांच दिन पुरुषों पर भी सख्ती
सावन के पांच दिनों में परंपरा निभाने वाली महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती हैं। साथ ही गांव में बाहरी लोगों के आने की भी अनुमति नहीं होती। देवता के यह नियम पुरुषों पर भी सख्ती से लागू होते हैं। पुरुष सावन के पांच दिन न तो शराब पी सकते हैं और न ही मांस आदि खा सकते हैं। परंपरा की पवित्रता बनाए रखने के लिए पति-पत्नी एक-दूसरे से अलग रहते हैं। हंसी मजाक भी नहीं करते। यानी कि इस परंपरा को पूरी श्रद्धा और देवता के नियम अनुसार मनाया जाता है।


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