बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर के कारण
जब बच्चे का खाने, वजन या शरीर की बनावट के साथ रिश्ता अस्वस्थ हो जाता है, तो उसे ईटिंग डिसऑर्डर कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ईटिंग डिसऑर्डर किसी एक वजह से नहीं होता, बल्कि कई कारण मिलकर इसे जन्म देते हैं। बच्चों में कैसे विकसित होती है ये समस्या, क्या होते हैं कारण और लक्षण, पेरेंट्स को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान, इसके बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण बच्चों में मानसिक और शारीरिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं में से एक गंभीर समस्या है ईटिंग डिसऑर्डर। यह सिर्फ खाने-पीने की आदतों से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि बच्चे की मानसिक स्थिति और आत्मविश्वास पर भी गहरा असर डालती है। जानिए क्या है ईटिंग डिसऑर्डर, इसके मुख्य कारण और लक्षण, ये बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत को कैसे करता है प्रभावित।
क्या होता है ईटिंग डिसऑर्डर
जब बच्चा खाने, वजन या शरीर की बनावट को लेकर अधिक चिंतित हो जाता है, तो उसे ईटिंग डिसऑर्डर कहा जाता है। इस स्थिति में बच्चा अपनी पहचान और आत्म मूल्य को वजन और दिखावट से जोडऩे लगता है। खाने को लेकर डर, तनाव या वजन बढऩे की चिंता इसके सामान्य संकेत हो सकते हैं।
किन कारणों से बढ़ती है यह समस्या
विशेषज्ञों के मुताबिक ईटिंग डिसऑर्डर किसी एक वजह से नहीं होता, बल्कि कई कारण मिलकर इसे जन्म देते हैं।
मानसिक तनाव और एंग्जायटी।
डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं।
परिवार में पहले से ऐसी समस्या होना। सोशल मीडिया पर ‘परफेक्ट बॉडी’ का दबाव।
घर में खाने या वजन को लेकर गलत बातें।
माता-पिता को बच्चे के व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए। कुछ लक्षण इस समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।
ईटिंग डिसऑर्डर के सामान्य लक्षण
बार-बार कैलोरी गिनना। कुछ खाद्य पदार्थ पूरी तरह छोड़ देना। छिपकर खाना या खाने को लेकर झूठ बोलना। जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करना। अपने शरीर या वजन को लेकर लगातार नाराज रहना।
खाने के समय चिंता या घबराहट महसूस करना।
बच्चे से कैसे करें बात
माता-पिता को बच्चे से प्यार और समझदारी के साथ बात करनी चाहिए। उसे डांटने या शर्मिंदा करने की बजाय सहयोग और भरोसा देना ज्यादा जरूरी है। आप बच्चे को इस तरह से अपनी बात कह सकते हैं कि अच्छा खाना और खुद का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। हमें लगता है कि तुम्हें थोड़ी मदद की जरूरत है और हम तुम्हारे साथ हैं।
घर पर अपनाएं ये आसान उपाय
खाने को अच्छा या खराब न कहें।
जंक फूड या खराब खाने की बजाय संतुलित और पौष्टिक भोजन की आदत पर जोर दें।
बच्चों के शारीरिक विकास के लिए क्या हेल्दी है, इसे उन्हें समझाएं और सिखाएं।
बच्चे को बताएं कि भूख लगने पर खाना और पेट भरने पर रुकना सामान्य और स्वस्थ आदत है।
खुद बनें अच्छा उदाहरण, बतौर पेरेंट्स खुद भी हेल्दी खान-पान और नियमित व्यायाम की आदत अपनाएं।
परिवार के साथ समय बिताएं। साथ में खाना बनाना और खाना बच्चे में सकारात्मक आदतें विकसित करता है।
एक्सपट्र्स की सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार, ईटिंग डिसऑर्डर बच्चे की गलती नहीं होती। सही समय पर प्यार, समर्थन और प्रोफेशनल मदद से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। माता-पिता की समझदारी और सतर्कता बच्चे को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका निभाती है।
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