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दुनिया में बड़े खतरे की आहट- परमाणु हथियारों पर आई चौंकाने वाली रिपोर्ट, भारत-चीन का नाम भी शामिल

By: Jun 8th, 2026 9:00 pm

दुनिया इस वक्त एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां हर तरफ युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। यूरोप से लेकर मध्य-पूर्व तक तनाव चरम पर है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता टकराव पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। ऐसे माहौल में एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। यह रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के कई देश तेजी से अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को मजबूत कर रहे हैं। भारत समेत कई देशों ने पिछले एक साल में अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाई है। यह खुलासा दुनिया भर में हथियारों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली संस्था SIPRI यानी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की परमाणु क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। आंकड़े बताते हैं कि भारत की परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ने की रफ्तार अब चीन के करीब पहुंचती दिखाई दे रही है। वर्ष 2025 में भारत के पास 180 परमाणु हथियार होने का अनुमान था, जबकि 2026 में यह संख्या बढ़कर 190 हो गई है। यानी एक साल में 10 हथियारों का इजाफा।

हालांकि परमाणु हथियारों के मामले में आज भी अमेरिका और रूस सबसे आगे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जहां बाकी देशों के परमाणु जखीरे बढ़ रहे हैं, वहीं इन दोनों देशों के कुल हथियारों की संख्या में मामूली कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार रूस के पास 2025 में 5459 परमाणु हथियार थे, जो 2026 में घटकर 5420 रह गए हैं। वहीं अमेरिका के पास 2025 में 5177 परमाणु हथियार थे, जो 2026 में घटकर 5042 हो गए हैं। लेकिन इस रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू चीन से जुड़ा है। चीन जिस रफ्तार से अपने परमाणु हथियारों का विस्तार कर रहा है, उसने दुनिया की बड़ी ताकतों की चिंता बढ़ा दी है। रूस और अमेरिका के बाद चीन दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी परमाणु शक्ति बन चुका है। वर्ष 2025 में चीन के पास 600 परमाणु वारहेड थे, जो 2026 में बढ़कर 620 हो गए हैं। यानी सिर्फ एक साल में 20 नए परमाणु हथियार। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले वर्षों में चीन के परमाणु हथियारों की संख्या एक हजार के आंकड़े को पार कर सकती है।

चीन के बाद इस सूची में ब्रिटेन का नाम आता है, जिसके पास 225 परमाणु वारहेड हैं। हालांकि पिछले एक साल में ब्रिटेन के परमाणु जखीरे में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके बाद पांचवें स्थान पर भारत है। भारत के पास 2025 में 180 परमाणु हथियार थे और 2026 में यह संख्या बढ़कर 190 हो गई है। यह संकेत है कि भारत भी बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के बीच अपनी रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने में जुटा है। वहीं भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की बात करें तो उसके परमाणु हथियारों की संख्या में पिछले एक साल के दौरान कोई बदलाव नहीं देखा गया है। 2025 में भी उसके पास 170 परमाणु हथियार होने का अनुमान था और 2026 में भी यह संख्या 170 ही बनी हुई है।इसके अलावा इजरायल और उत्तर कोरिया ने भी अपनी परमाणु क्षमताओं को और मजबूत किया है। हालांकि इन देशों के पास अभी भारत की तुलना में कम परमाणु हथियार हैं, लेकिन उनकी सैन्य रणनीतियां और क्षेत्रीय तनाव वैश्विक चिंताओं को बढ़ाते हैं। यहां ये समझना होगा कि सबसे बड़ी चिंता सिर्फ परमाणु हथियारों की संख्या नहीं है, बल्कि उनका तेजी से आधुनिकीकरण है। रिपोर्ट में ये चेतावनी भी है कि कई परमाणु संपन्न देश अब अपने हथियारों को केवल भंडारण में रखने के बजाय उन्हें मिसाइलों और अन्य लॉन्च सिस्टम पर दोबारा तैनात कर रहे हैं। यानी ऐसे हथियार, जिन्हें कभी अंतिम विकल्प माना जाता था, अब पहले से कहीं अधिक सक्रिय स्थिति में रखे जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया एक नए परमाणु दौर में प्रवेश कर रही है। पुराने हथियार नियंत्रण समझौते कमजोर पड़ रहे हैं, देशों के बीच अविश्वास बढ़ रहा है और नई तकनीकों के साथ परमाणु हथियार पहले से अधिक घातक और सटीक तरीके से बनाए जा रहे हैं। यह रिपोर्ट सिर्फ कुछ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी है। भले ही वैश्विक स्तर पर कुल परमाणु हथियारों की संख्या में बहुत बड़ा बदलाव नहीं दिखता, लेकिन इनके इस्तेमाल की आशंकाएं, इनकी तैनाती और इन्हें लगातार आधुनिक बनाने की होड़ दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर ले जा रही है जहां किसी भी बड़ी चूक की कीमत पूरी मानवता को चुकानी पड़ सकती है। सवाल यह है कि क्या दुनिया हथियारों की इस खतरनाक दौड़ पर लगाम लगा पाएगी, या फिर आने वाले वर्षों में परमाणु खतरा और भयावह रूप ले लेगा।


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