112 हेक्टेयर के बाद अब 5 कनाल जमीन पर घमासान
शोध और शिक्षा पर खतरे की आशंका, कृषि विवि की जमीन बचाने को शिक्षक संघ मुखर
कार्यालय संवाददाता-पालमपुर
सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय की 112 हेक्टेयर भूमि को टूरिस्ट विलेज परियोजना के लिए हस्तांतरित किए जाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब विश्वविद्यालय के मलां स्थित अनुसंधान केंद्र की लगभग चार से पांच कनाल भूमि को निजी उपयोग के लिए स्थानांतरित किए जाने की तैयारी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कृषि विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (हपौटा) ने इस प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति जताई है। हपौटा के अनुसार संबंधित भूमि विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों में शामिल है, जिसका उपयोग कृषि अनुसंधान, शिक्षा, प्रदर्शन परियोजनाओं तथा अन्य शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक गतिविधियों के लिए किया जाता है। संघ का कहना है कि राज्य कृषि विश्वविद्यालय होने के नाते संस्थान की भूमि और संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि शोध कार्यक्रमों, क्षेत्रीय परीक्षणों, विद्यार्थियों के प्रशिक्षण और किसानों से जुड़े विस्तार कार्यों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि 4 दिसंबर 2025 को कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने मलां स्थित अनुसंधान केंद्र का दौरा किया था।
उस दौरान उन्होंने टिप्पणी की थी कि विश्वविद्यालय की भूमि किसी को देने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि संबंधित क्षेत्र तक पहले से ही राजमार्ग से संपर्क मार्ग उपलब्ध है। हपौटा के अनुसार तत्कालीन कुलपति डॉ. अशोक कुमार पांडा ने भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव का अध्ययन करने के लिए एक समिति गठित की थी। समिति ने अप्रैल 2026 में राइस एंड व्हीट रिसर्च स्टेशन, मलां का निरीक्षण किया और पाया कि भूमि हस्तांतरण से विश्वविद्यालय की अनुसंधान एवं शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि को निजी उपयोग के लिए स्थानांतरित करना विश्वविद्यालय के हित में नहीं होगा। कृषि विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के महासचिव डा. जनार्दन सिंह ने आरोप लगाया कि कृषि मंत्री की टिप्पणी और समिति की सिफारिशों को नजरअंदाज करते हुए लगभग चार से पांच कनाल भूमि को निजी व्यक्तियों को हस्तांतरित करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की भूमि सार्वजनिक संपत्ति है, जो वर्तमान और भविष्य की पीढिय़ों के छात्रों, वैज्ञानिकों तथा किसानों के हितों से जुड़ी हुई है।
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