सेब सीजन…फागू में बनेगा मुख्य नियंत्रण कक्ष
मालभाड़ा किलोग्राम और टन के आधार पर होगा निर्धारित; ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर बनाई विशेष योजना, प्रशासन ने की तैयारियां
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
सेब सीजन-2026 को सुचारू और सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन शिमला ने तैयारियां तेज कर दी हैं। उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित वर्चुअल समीक्षा बैठक में परिवहन, यातायात प्रबंधन, मालभाड़ा निर्धारण, नियंत्रण कक्षों की स्थापना, श्रमिकों की उपलब्धता और पैकेजिंग सामग्री सहित विभिन्न व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। उपायुक्त ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य कर बागवानों को किसी प्रकार की असुविधा न होने देने के निर्देश दिए। बैठक में निर्णय लिया कि सभी एसडीएम अपने-अपने क्षेत्रों में सेब उत्पादकों, ट्रक ऑपरेटरों और पिकअप यूनियनों के साथ बैठक कर परिवहन वाहनों की आवश्यकता का आकलन करेंगे। आवश्यकता पडऩे पर बाहरी जिलों और राज्यों से ट्रकों की व्यवस्था की जाएगी। सेब तुड़ाई और ढुलाई के लिए पर्याप्त श्रमिक भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। उपायुक्त ने बताया कि मालभाड़ा निर्धारण के लिए एसडीएम, डीएसपी, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) तथा एचआरटीसी प्रतिनिधि की समिति गठित की जाएगी।
इस बार परिवहन शुल्क बॉक्स के बजाय किलोग्राम अथवा टन के आधार पर तय होगा। निर्धारित दरों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। मुख्य नियंत्रण कक्ष 15 जुलाई तक फागू में स्थापित किया जाएगा, जिसका संचालन एसडीएम ठियोग करेंगे। यहां टेलीफोन, फैक्स और सीसीटीवी कैमरों सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। चालकों और क्लीनरों को पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। पंजीकरण शुल्क पिकअप एवं चार पहिया वाहनों के लिए 200 रुपए, ट्रक एवं छह पहिया वाहनों के लिए 500 रुपये तथा ट्राला एवं बड़े वाहनों के लिए 1000 रुपए निर्धारित किया है। यातायात प्रबंधन के तहत ट्रकों को शिमला शहर में प्रवेश नहीं मिलेगा और उन्हें ढली-मेहली बाईपास मार्ग से भेजा जाएगा। भट्टाकुफर फल मंडी में केवल नमूना बॉक्स ही दर निर्धारण के लिए लाए जाएंगे। छराबड़ा तथा कोटी (मशोबरा के निकट) में पुलिस द्वारा कूपन जारी किए जाएंगे तथा बिना कूपन किसी वाहन को मंडी में प्रवेश नहीं मिलेगा।
2.30 लाख मीट्रिक टन सेब उत्पादन का अनुमान
जिला शिमला में वर्ष 2026-27 के दौरान 2,30,989.984 मीट्रिक टन सेब उत्पादन का अनुमान है, जबकि वर्ष 2025-26 में 4,40,684 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया था। प्रशासन ने बागवानों को निर्बाध परिवहन और बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।
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