बड़ा संदेश देने की तैयारी में बिलासपुर भाजपा, चर्चाओं का दौर

By: Jun 5th, 2026 12:46 am

9 सीटों की जीत के बाद भाजपा में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पद को लेकर चर्चा तेज, फैसले से निकलेगा बड़ा राजनीतिक संदेश

दिव्य हिमाचल ब्यूरो – बिलासपुर
नगर परिषद बिलासपुर के चुनाव में एकतरफा जीत दर्ज कर भाजपा ने जिला मुख्यालय की सियासत में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। कुल 11 में से 9 वार्डों पर जीत हासिल करने के बाद अब पार्टी के भीतर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बहुमत भाजपा के पास है, इसलिए चुनावी लड़ाई खत्म हो चुकी है, लेकिन अब संगठन के भीतर पावर सेंटर तय करने की कवायद शुरू हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नगर परिषद की यह ताजपोशी केवल स्थानीय निकाय तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसके जरिए भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भी अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का संदेश देने का प्रयास करेगी। इस बार परिषद में पहुंचे 11 पार्षदों में 7 नए चेहरे हैं, जबकि केवल 4 सदस्यों को पूर्व का अनुभव है। इसे भाजपा के जनरेशन शिफ्ट मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें पार्टी नए नेतृत्व को आगे लाकर भविष्य की राजनीतिक जमीन तैयार कर रही है। भाजपा की जीत ने यह भी संकेत दिया है कि नगर परिषद में पार्टी केवल चुनाव नहीं जीत रही, बल्कि नेतृत्व की दूसरी पंक्ति भी तैयार कर रही है। नगर परिषद का अध्यक्ष पद इस बार अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है। भाजपा के पास इस वर्ग से दो निर्वाचित पार्षद मौजूद हैं वार्ड नंबर एक से नवनिर्वाचित पार्षद नरेश कुमारी और वार्ड दो से जमुना देवी।

हालांकि राजनीतिक चर्चाओं में वार्ड नंबर-1 से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने वाली नरेश कुमारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। वरिष्ठता, अनुभव और लगातार जनता का विश्वास हासिल करने का रिकॉर्ड उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है। यदि भाजपा नरेश कुमारी को अध्यक्ष पद सौंपती है तो यह संगठन के जमीनी कार्यकर्ता को शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने की पार्टी की नीति का बड़ा उदाहरण माना जाएगा। सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत नरेश कुमारी यदि अध्यक्ष बनती हैं तो भाजपा इसे ग्राउंड टू गवर्नेंस मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर सकती है जहां साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले कार्यकर्ता को नेतृत्व की जिम्मेदारी दी जाती है। अध्यक्ष पद लगभग तय श्रेणी में होने के कारण असली राजनीतिक गणित उपाध्यक्ष पद पर दिखाई दे रहा है। यदि भाजपा अनुभव को प्राथमिकता देती है तो वार्ड नंबर-5 से दूसरी बार जीतकर आए नरेंद्र पंडित का दावा मजबूत माना जा रहा है। वहीं महिला नेतृत्व को और मजबूत करने की रणनीति अपनाई गई तो वार्ड नंबर-7 से विजयी वंदना गौतम का नाम भी प्रमुखता से उभर सकता है।

भाजपा के सामने सामाजिक संतुलन बनाम राजनीतिक अनुभव की चुनौती

नगर परिषद की नई टीम के गठन में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक प्रतिनिधित्व, संगठनात्मक निष्ठा और राजनीतिक अनुभव के बीच संतुलन बनाने की होगी।

वार्ड 7 फिर बना भाजपा का अभेद्य किला

इस चुनाव का सबसे दिलचस्प राजनीतिक तथ्य वार्ड नंबर-7 रहा। यहां भाजपा ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर यह साबित किया कि यह क्षेत्र अब पार्टी का सबसे मजबूत राजनीतिक गढ़ बन चुका है। वंदना गौतम की जीत केवल व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि उस वार्ड में भाजपा की दीर्घकालिक राजनीतिक पकड़ का प्रमाण मानी जा रही है।


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