दो माह तक मछली का स्वाद नहीं चख पाएंगे शौकीन, आज से शिकार बंद

By: Jun 16th, 2026 12:04 am

मत्स्य विभाग ने बनाई टीमें, जगह-जगह देंगी दबिश, बड़े जलाशयों में लगाए कैंप, हर गतिविधि पर नजर, मनमानी करने पर होगी कार्रवाई

कार्यालय संवाददाता-बिलासपुर
मछली के शौकीन अब दो माह तक मछली का स्वाद नहीं चख पाएंगे। मत्स्य विभाग की ओर से मतस्य आखेट पर दो माह तक का प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध 16 जून से 15 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान प्रदेश के जलाशयों में मत्स्य आखेट नहीं होगा। यदि कोई व्यक्ति इसमें संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। मतस्य विभाग की ओर से मत्स्य आखेट पर नजर बनाए रखने के लिए टीमों का गठन भी कर दिया गया है। संबधित अधिकारियों, कर्मचारियों को भी निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार मतस्य विभाग की ओर से प्रदेश के सामान्य जलाशयों, नदी-नालों तथा उनकी सहायक धाराओं में मछलियों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए मतस्य आखेट पर प्रतिबंध का निर्णय लिया है। निर्धारित अवधि के तहत जलाशयों में मछली पकडऩे पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

इस अवधि के दौरान प्रदेश के सभी सामान्य जल स्रोतों में किसी भी प्रकार के मत्स्य आखेट तथा मछली बिक्री की अनुमति नहीं होगी। बता दें कि प्रदेश में लगभग 13 हजार मछुआरे प्रत्यक्ष रूप से मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और अपनी आजीविका के लिए इस व्यवसाय पर निर्भर हैं। प्रदेश के पांच प्रमुख जलाशयों गोबिंदसागर, पाँगडैम, चमेरा, कोलडैम तथा रणजीत सागर का कुल क्षेत्रफल लगभग 43785 हेक्टेयर है, जहां 6300 से अधिक मछुआरे कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 2400 किलोमीटर लंबाई वाले सामान्य जलस्रोतों में भी 6300 से अधिक मछुआरे मत्स्य आखेट से जुड़े हुए हैं। इन सभी परिवारों को निरंतर रोजगार उपलब्ध करवाने तथा प्रदेशवासियों को प्रोटीनयुक्त आहार सुनिश्चित करने में मत्स्य विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यही नहीं केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं के तहत भी मछुआरों को इस अवधि के दौरान आर्थिक राशि मुहैया करवाई जाती है। ताकि इस अवधि के दौरान इन्हें किसी तरह की समस्या न झेलनी पड़े। विभागीय अधिकारियों की मानें तो बिलासपुर जिले में कुल 19 कैंप स्थापित किए गए हैं। जिनमें गोविंदसागर में 16 तथा कोलडैम में तीन कैंप शामिल हैं। इसके अतिरिक्त एक उडऩदस्ता भी तैनात किया गया है। पोंगबांध क्षेत्र में सात कैंप तथा एक उडऩदस्ता और चंबा क्षेत्र में चमेरा तथा रणजीत सागर जलाशयों में कुल पांच कैंप तथा एक उडऩदस्ता कार्य करेगा। ये सभी दल जल एवं सडक़ मार्ग से नियमित गश्त कर मत्स्य संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। मछली के शौकीन अब दो माह तक मछली का स्वाद नहीं चख पाएंगे। मत्स्य विभाग की ओर से मतस्य आखेट पर दो माह तक का प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध 16 जून से 15 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान प्रदेश के जलाशयों में आखेट नहीं होगा। यदि कोईसंलिप्त पाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।

16 जून से प्रदेश के जलाशयों में मतस्य आखेट पर प्रतिबंध रहेगा। 15 अगस्त तक यह प्रतिबंध रहेगा। इस दौरान विभिन्न गतिविधियों पर नजर रखने के लिए मतस्य विभाग की ओर से टीमों का गठन किया गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों को भी निर्देश दिए गए हैं। यदि इस दौरान कोताही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विवेक चंदेल, निदेशक, मतस्य विभाग


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