एंटी चिट्टा मॉडल पर सरकार का जोर

By: Jun 26th, 2026 12:50 am

धर्मशाला के स्कूल शिक्षा बोर्ड के सभागार में सजा कार्यक्रम, विधायक केवल पठानिया रहे मुख्य अतिथि
स्टाफ रिपोर्टर-धर्मशाला
देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश में नशे की समस्या गंभीर होती जा रही है। राज्य में नशे से प्रभावित मरीजों की संख्या राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी बताई जा रही है। देश में जहां नशे की दर 0.7 प्रतिशत है, वहीं हिमाचल प्रदेश में यह 1.07 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा शराब, सिंथेटिक ड्रग्स, भांग और सूंघने वाले नशों का भी व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है, जिससे स्थिति चिंताजनक बन गई है। इस अवसर पर उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल को नशामुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार का ‘एंटी चिट्टा मॉडल’ नशा तस्करों के खिलाफ प्रभावी साबित हो रहा है और इसकी चर्चा अब अन्य राज्यों में भी होने लगी है।

धर्मशाला स्थित स्कूल शिक्षा बोर्ड के सभागार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, स्वास्थ्य विभाग और गूंजन संस्था के संयुक्त तत्वावधान में नशीली दवाओं के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस 2026 तथा टीबी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें उपमुख्य सचेतक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि सरकार बनने के बाद नशे के खिलाफ व्यापक रणनीति तैयार की गई है, जिसके तहत पंचायत स्तर तक मैपिंग कर चिट्टा तस्करों और नशा करने वालों की पहचान की गई है। हिमाचल देश का पहला राज्य है, जहां पंचायतों को रेड, येलो और ग्रीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।


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