अगर आपको आगे बढ़ना है तो अपनी मानसिकता पर काम करना ही होगा : रेड्डी

By: Jun 14th, 2026 3:37 pm

धर्मशाला। नीतीश कुमार रेड्डी ने आईपीएल 2026 में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए गेंद और बल्ले से कमाल का प्रदर्शन किया था। अपनी उसी लय को उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ पहले वनडे में भी जारी रखा। उन्होंने चार ओवरों की गेंदबाज़ी की, जिसमें 31 रन देकर दो अहम विकेट लिए और भारतीय टीम को जीत दिलाई। हार्दिक पंड्या की गैरमौजूदगी में वह टीम के मुख्य तेज़ गेंदबाज़ी ऑलराउंडर हैं। वनडे में यह उनके लिए नई भूमिका है, लेकिन इसके लिए रेड्डी पूरी तरह तैयार थे। उन्हें पता था कि उन्हें कभी भी ज़िम्मेदारी निभाने के लिए बुलाया जा सकता है।

धर्मशाला में मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेड्डी ने कहा, “मैं हमेशा ख़ुद से कहता हूं कि एक ऑलराउंडर के तौर पर मुझे अपनी टीम के लिए दोनों भूमिकाएं निभानी होंगी, तभी टीम अच्छी स्थिति में होगी। मेरी सोच बिल्कुल स्पष्ट है। मुझे बस मैदान पर उतरना है। कप्तान मुझे गेंद दे या टीम को कुछ रनों की ज़रूरत हो, मुझे उस ज़रूरत को पूरा करना है।” शनिवार को उनका सबसे बड़ा विकेट रहमानुल्लाह गुरबाज़ का था, जो 102 रन बनाने के बाद रेड्डी की तेज़ रफ़्तार इनस्विंगिंग यॉर्कर पर आउट हो गए।

रेड्डी ने कहा, “आईपीएल जैसे टी 20 टूर्नामेंट में ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम की वजह से मैं पूरे चार ओवर नहीं फेंक पाता था। इसलिए मैं ख़ुद को तैयार कर रहा था ताकि जब कप्तान मुझे गेंद दे, तो मुझे पता हो कि क्या करना है। मेरे पास कुछ प्लान होने चाहिए। अगर मैचों में लगातार गेंदबाज़ी करने का मौक़ा नहीं मिल रहा है, तो कम से कम प्रैक्टिस में अपनी तैयारी जारी रखूं, ताकि सही समय पर तैयार रह सकूं।

उन्होंने कहा, “ऑलराउंडर्स के लिए यह थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि हम हमेशा टी 20 में चार ओवर फेंकने की उम्मीद करते हैं। पहले अगर एक या दो ओवर में रन पड़ भी जाते थे, तो भी कम से कम दो ओवर बाक़ी रहते थे। आप वापसी कर सकते थे और अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकते थे। पहले ऐसा होता था, लेकिन अब अगर आप एक या दो ओवर ख़राब फेंकते हैं, तो हो सकता है कि कुछ ऑलराउंडर्स या गेंदबाज़ों के लिए टूर्नामेंट वहीं ख़त्म हो जाए।

“मेरा मानना है कि जब वापसी का मौक़ा हो, तो एक ख़राब ओवर के बाद आपको वापसी करनी होती है और अच्छा प्रदर्शन करना होता है। खिलाड़ी की सोच ही सब कुछ तय करती है। मेरा मानना है कि गेंदबाज़ों और ऑलराउंडर्स को चार ओवर मिलने चाहिए। कम से कम उन्हें वह अनुभव तो मिलना ही चाहिए।”

एक गेंदबाज़ के तौर पर रेड्डी में जो सुधार हुआ है, जैसे उनकी रफ़्तार बढ़ी है, उसका श्रेय हाल ही में तेज़ गेंदबाज़ी और हाई परफॉर्मेंस कोच स्टेफ़न जोन्स के साथ की गई उनकी मेहनत को जाता है। उन्होंने कहा, “हम सभी में हुनर है। इसीलिए हम यहां हैं। लेकिन बात उस सोच की है, जो आप मैदान पर दिखाते हैं। आपको मज़बूत बने रहना होगा, क्योंकि वनडे में 20 ओवर के बाद गेंद पुरानी हो जाती है और आपको पांच फ़ील्डर्स के अंदर होने के बावजूद सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाज़ी करनी होती है। आपको वापसी करनी होती है और ऑफ स्टंप के ऊपरी हिस्से पर गेंद डालनी होती है।

“आपको पता होना चाहिए कि प्लान क्या है, और यह सब हालात पर निर्भर करता है। आपको हालात का अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करना होता है, ख़ुद को बेहतर बनाना होता है और विकेट लेने होते हैं। हम इसी तरह ख़ुद को तैयार करते हैं।”

“दबाव तो हर जगह होता है। मेरा मतलब है कि सिर्फ़ इस सेटअप में ही नहीं, बल्कि आईपीएल में भी दबाव होता है। लेकिन मेरा हमेशा से मानना है कि भारत में बहुत टैलेंट है और अगर आप वहां खेल रहे हैं, तो आपको अपनी सोच पर काम करना होगा। इसलिए जब आप दबाव को अच्छे से संभालते हैं, तभी रन बना सकते हैं और विकेट ले सकते हैं। जो भी दबाव को संभालता है और मैदान पर अपनी सोच को सही रखता है, वही आगे बढ़ता है।”


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