मिड डे मील की थाली से मजबूत हो रही आजीविका, 20 हजार से अधिक परिवारों को मिला रोजगार का सहारा

By: Jun 25th, 2026 8:00 pm

प्रदेश के 14,423 सरकारी स्कूलों में 4.95 लाख विद्यार्थियों को मिल रहा पौष्टिक भोजन

कार्यालय संवाददाता-शिमला

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में परोसी जाने वाली मिड डे मील की थाली अब केवल बच्चों के पोषण का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि यह हजारों परिवारों की आर्थिक मजबूती का भी आधार बन चुकी है। शिक्षा, पोषण और रोजगार को एक साथ जोडऩे वाली यह योजना प्रदेश के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही है। प्रदेश के 14423 सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत 4,95,780 विद्यार्थियों को वर्ष में 240 दिनों तक मिड डे मील उपलब्ध कराया जाता है। इस व्यापक व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 20,815 कुक एवं हेल्पर कार्यरत हैं, जो प्रतिदिन बच्चों के लिए ताजा और पौष्टिक भोजन तैयार करते हैं। इस योजना पर हर वर्ष लगभग 115 करोड़ रुपये खर्च हो रहे है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह योजना विशेष रूप से महिलाओं के लिए रोजगार का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। अनेक महिलाएं स्कूलों में कुक के रूप में कार्य कर परिवार की आय में योगदान दे रही हैं। इससे उन्हें घर के नजदीक रोजगार मिलने के साथ-साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता का अवसर भी प्राप्त हुआ है। कई परिवारों के लिए यह आय का नियमित स्रोत बन गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।

मिड डे मील योजना का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और स्कूलों में नामांकन तथा उपस्थिति बढ़ाना है। इसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। स्कूलों में बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ी है और पोषण स्तर में भी सुधार दर्ज किया गया है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को इस योजना से सीधा लाभ मिल रहा है। ्रशिक्षा विभाग ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी कदम तेज किए हैं। विभाग की ओर से विद्यार्थियों को रोल नंबर के अनुसार बैठाकर भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में शिक्षा निदेशालय द्वारा सभी जिला उपनिदेशकों तथा खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेजे गए हैं। शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक बी.आर. शर्मा ने बताया कि मिड डे मील योजना बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

त्रिकोणीण मॉडल से जनहितकारी पहल

प्रदेश में शिक्षा, पोषण और रोजगार के इस त्रिकोणीय मॉडल ने मिड डे मील योजना को एक ऐसी जनहितकारी पहल बना दिया है, जो एक ओर बच्चों के स्वस्थ भविष्य की नींव रख रही है तो दूसरी ओर हजारों परिवारों की आजीविका को भी संबल प्रदान कर रही है। हिमाचल में यह योजना सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास का एक सफल उदाहरण बनकर सामने आई है।

—-जय


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