पांवटा में सूखी नदियों पर खनन माफिया का कब्जा
यमुना, बाता और गिरि नदी का सीना छलनी; कम जलस्तर का फायदा उठाकर दिन-रात चल रहा अवैध खनन
कार्यालय संवाददाता-पांवटा साहिब
पांवटा साहिब क्षेत्र में इन दिनों भीषण गर्मी और सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि यमुना, बाता और गिरि नदियों का जलस्तर सामान्य से काफी नीचे चला गया है। नदियों में पानी कम होने से बड़े हिस्से उजागर हो गए हैं, जिसका फायदा उठाकर अवैध खनन माफिया सक्रिय हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार दिन और रात दोनों समय नदियों में मशीनों और ट्रकों की आवाजाही जारी है। इससे नदी किनारे बसे गांवों में चिंता और तनाव का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल पांवटा साहिब ही नहीं, बल्कि इससे सटे उत्तराखंड के क्षेत्रों में भी अवैध खनन खुलेआम किया जा रहा है।
सीमा क्षेत्रों में निगरानी की कमी के कारण खनन माफिया बेखौफ होकर रेत और बजरी का दोहन कर रहा है। अवैध खनन के चलते नदियों के भीतर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे प्राकृतिक जलधारा प्रभावित हो रही है। लगातार हो रहे खनन से नदी तटों का कटाव भी तेजी से बढ़ रहा है। कई स्थानों पर तटवर्ती खेतों की उपजाऊ मिट्टी नदी में बह रही है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं पुलों और तटबंधों के आसपास से भी सामग्री निकाले जाने से इन ढांचों की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि रेत और बजरी की अंधाधुंध निकासी से नदियों की जलधारण क्षमता घट रही है, जिसका सीधा असर भू-जल स्तर पर पड़ रहा है। इसके अलावा नदी तंत्र से जुड़े जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि गर्मी और कम जलस्तर के इस दौर में नदियों पर विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने पुलिस और खनन विभाग की संयुक्त गश्त बढ़ाने तथा रात के समय औचक निरीक्षण करने की मांग की है।
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