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एक ओर मानसून की एंट्री, दूसरी ओर बज गई खतरे की घंटी, अगले 3 महीने के लिए खतरनाक अलर्ट जारी

By: Jun 4th, 2026 9:00 pm

एक तरफ तपती धरती, झुलसाती गर्मी और आसमान से बरसती आग… तो दूसरी तरफ मानसून की पहली फुहारों के साथ राहत की उम्मीद। देशभर में इन दिनों मौसम का मिजाज बिल्कुल बदला-बदला सा नजर आ रहा है। कहीं पारा रिकॉर्ड तोड़ रहा है तो कहीं बारिश लोगों को राहत दे रही है। इसी बीच एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार 4 जून 2026 यानि आज केरल में दस्तक दे दी है। मानसून की एंट्री के साथ ही करोड़ों लोगों ने भीषण गर्मी से राहत की सांस ली है और किसानों की उम्मीदें भी फिर से हरी होने लगी है लेकिन क्या यह राहत लंबे समय तक कायम रह पाएगी। क्या मानसून की यह दस्तक देश के लिए खुशहाली लेकर आएगी या फिर इसके पीछे छिपा है किसी बड़े संकट की आहट तो नहीं है।

ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जहां एक ओर मानसून ने दस्तक दी है, वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने पूरी दुनिया को चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में अल नीनो का प्रभाव तेजी से बढ़ सकता है। यह वही मौसमी प्रणाली है जो कई देशों में सूखा, लू, बाढ़ और मौसम की चरम घटनाओं को जन्म देती है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या मानसून की यह खुशखबरी अल नीनो के खतरे के आगे फीकी पड़ जाएगी?

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार प्रशांत महासागर में समुद्र का पानी बहुत तेजी से गर्म हो रहा है। प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ती गर्मी ने दुनिया को अल नीनो की दहलीज पर ला खड़ा किया है। जून से अगस्त 2026 के बीच अल नीनो विकसित होने की संभावना 80 फीसदी है, जबकि नवंबर तक यह खतरा बढ़कर 90 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा हो सकता है। कहा जा रहा है कि प्रशांत महासागर की सतह के नीचे का पानी इस बार सामान्य के मुकाबले 6 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म हो चुका है, जो बेहद खतरनाक है। समुद्र में जमा यही अतिरिक्त गर्मी ऊपर की सतह को तपा रही है, जिससे अल नीनो को रफ्तार मिल रही है. यह प्रणाली पूरी दुनिया के बादलों और हवाओं के चक्र को बदलकर मौसम को तहस-नहस कर देती है।

इस बात में कोई दो राय नहीं कि अल नीनो पहले से गर्म हो रही दुनिया में और अधिक गर्मी, चरम मौसमी और विनाशकारी घटनाओं को बढ़ावा देगा। फिलहाल WMO ने गंभीर सूखे और हीटवेव की आशंका को देखते हुए भारत समेत उन सभी देशों को पूरी तरह तैयार रहने की चेतावनी दी है, जिन पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है। संगठन ने कहा है कि कृषि, स्वास्थ्य और ऊर्जा विभागों को मिलकर काम करना होगा। समय पर मिली सटीक वेदर रिपोर्ट और पहले से की गई प्रशासनिक तैयारियां ही इस प्राकृतिक संकट के बीच करोड़ों लोगों की जान और फसलों को सुरक्षित रख सकती हैं। इससे पहले साल 2023-24 में आया अल नीनो इतिहास का पांचवां सबसे शक्तिशाली दौर था, जिसने साल 2024 में वैश्विक तापमान के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।

और इस बार फिर अल नीनो के बढ़ते खतरे ने चिंता बढ़ा दी है। आने वाले तीन महीने भारत के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। एक ओर मानसून की मेहरबानी देश की खेती, जल स्रोतों और अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकती है, तो दूसरी ओर अल नीनो का प्रभाव इन उम्मीदों पर पानी भी फेर सकता है। हालांकि, इंडियन ओशन डायपोल (IOD) और मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) जैसे सक्रिय सिस्टम भारत के लिए राहत की किरण बनकर उभरे हैं, जो कमजोर पड़ते मानसून को भी मजबूती देने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में अब सबकी निगाहें आसमान पर टिकी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि कुदरत इस बार भारत पर कितनी मेहरबान होती है। क्या बारिश खुशहाली की सौगात लेकर आएगी या फिर अल नीनो का असर देश के सामने नई चुनौतियां खड़ी करेगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में मौसम के बदलते मिजाज के साथ सामने आ जाएगा।


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