हिमाचल में मौसम का नया अलर्ट, मानसून से पहले बाढ़ की चेतावनी, 2 जिलों पर मंडराया ज्यादा खतरा
हिमाचल प्रदेश में प्री-मानसून ने दस्तक दे दी है और झमाझम बारिश का दौर शुरू हो चुका है। तपती गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन इस राहत के साथ ही देवभूमि पर एक बड़ा संकट भी मंडराने लगा है। मौसम विभाग की मानें तो राज्य में मानसून 25 जून तक एंट्री करेगा, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि मानसून के आने से पहले ही हिमाचल में ‘फ्लैश फ्लड’ यानी अचानक आने वाली बाढ़ की चेतावनी जारी कर दी गई है। प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। प्रदेश के कई जिलों में बीते कल यानि गुरुवार को तेज बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ। गुरुवार रात में ऊंचे पहाड़ों पर ताजा बर्फबारी, ओलावृष्टि और तेज बारिश हुई। सोलन के कसौली में सबसे ज्यादा 105 मिमी बादल बरसे। धर्मपुर में 86.6 मिमी, पालमपुर में 40 मिमी, सोलन में 34.6 मिमी, नाहन में 26.7 मिमी और शिमला में 20 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। हमीरपुर के नेरी में 81KM प्रति घंटा की रफ्तार से तेज तूफान चला। कुल्लू जिला के आनी क्षेत्र में बीते कल बाढ़ जैसा मंजर देखने हो मिला, जहां लगातार बारिश के बाद शमशर नाला उफान पर आ गया और बाढ़ जैसे हालात बन गए. नाले में भारी मात्रा में पानी और मलबा आने से लोगों में दहशत फेल गई। इतना ही नहीं चंबा के भरमौर में बीती शाम को तेज बारिश के बाद रजेरा के गढ़ नाला में बाढ़ आ गई। इसमें 20 भेड़-बकरियां बह गई। इससे पशुपालक को लाखों रुपए का नुकसान हुआ। राज्य के अलग अलग भागों में पेड़ गिरने, मलबे में गाड़ियां दबने की घटनाएं भी पेश आई है।
और अब इसी बीच हिमाचल प्रदेश में फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग (IMD) ने शिमला और मंडी जिला में अगले कुछ घंटों के दौरान बाढ़ का पूर्वानुमान लगाया है। मौसम विभाग (IMD) ने आज भी कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिला में भारी ओलावृष्टि व तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी कर रखा है। इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है। लाहौल स्पीति और किन्नौर को छोड़कर अन्य सभी जिलों में यलो अलर्ट की चेतावनी दी गई है। IMD के मुताबिक राज्य में अगले चार दिन भी बारिश जारी रहेगी। इससे तापमान में तीन से चार डिग्री की गिरावट आएगी। राज्य में 17 जून तक बारिश से राहत के आसार नहीं है। 13 से 15 जून तक भी चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिला में आंधी-तूफान का यलो अलर्ट दिया गया है। इसे देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
हिमाचल में बीते सालों में बरसात ने जो तबाही मचाई उसके झख्म आज तक भर नहीं पाए है। ऐसे में प्रदेश को दोबारा ऐसे हालातों का सामना न करना पड़े इसके लिए प्रशासन भी अब अलर्ट हो गया है। और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तयारी में जुट गया है। इसी कड़ी में प्रदेश में आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 15 जून 2026 को राज्यव्यापी मेगा मॉक एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाली इस 10वीं राज्य स्तरीय मेगा मॉक एक्सरसाइज में भूकंप, क्लाउड बस्र्ट और वनाग्नि जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों का परीक्षण किया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. हरीश कुमार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, पुस्तकालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों को इस अभ्यास में भाग लेना अनिवार्य होगा। 15 जून को सुबह 10:30 बजे संस्थानों में निकासी ड्रिल और उसके बाद हेड काउंट एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी, जिसे 15 मिनट के भीतर पूरा करना होगा। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान किसी प्रकार का प्रदर्शनात्मक अभ्यास नहीं किया जाएगा। सभी संस्थानों को मॉक ड्रिल से संबंधित गतिविधियों का उचित दस्तावेजीकरण कर विभाग द्वारा विकसित सेफ्टी ऐप पर अपलोड करना होगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों और कर्मचारियों को आपदा के समय सतर्कता, बचाव उपायों तथा त्वरित प्रतिक्रिया के बारे में जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य संभावित प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जनहानि और नुकसान को न्यूनतम करना तथा संस्थानों की आपदा से निपटने की क्षमता को मजबूत बनाना है।
मौसम विभाग की चेतावनी अपनी जगह है और प्रशासन की तैयारियां अपनी जगह। लेकिन ऐसे हालातों में सबसे बड़ा बचाव है हमारी खुद की सतर्कता।
कुदरत के इस अलर्ट के बीच, घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सावधान होने की जरूरत है। क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही इस मौसम में भारी पड़ सकती है। अगर आप हिमाचल के नदी-नालों के पास रहते हैं या इन दिनों पहाड़ों का रुख कर रहे हैं, तो कुछ ऐसी बातें हैं जो आपकी जान बचा सकती हैं। नदी, खड्ड या बरसाती नालों के किनारे जाने से पूरी तरह बचें। क्यूंकि पहाड़ी इलाकों में पानी का स्तर मिनटों में बढ़ जाता है। अगर आपके घर खड़ या नदी नालों को नजदीक है तो बारिश के दौरान आप वहां न रहें और किसी सुरक्षित जगह पर शरण लें। कभी भी पैदल या गाड़ी से बहते हुए पानी को पार करने की कोशिश न करें। इसके आलावा इमरजेंसी किट तैयार रखें: एक वाटरप्रूफ बैग में जरूरी दवाइयाँ, टॉर्च, माचिस/लाइटर,संभालकर रखें। बिजली गुल होने की स्थिति से निपटने के लिए अपने मोबाइल और पावर बैंक को हमेशा चार्ज रखें। और स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग (IMD) की चेतावनियों और अपडेट्स को लगातार सुनते रहें।
देखिए पहाड़ों का हुस्न जितना खूबसूरत है, मानसून में इसका मिजाज उतना ही खतरनाक हो जाता है। कुदरत ने हमें आगाह कर दिया है, अब बारी हमारी है कि हम अपनी सुरक्षा को लेकर कितने संजीदा हैं। इस मानसून में खुद भी महफूज रहिए और अपनों का भी ख्याल रखिए।
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