ट्रांसजेंडर कानून पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अलग-अलग अदालत में सुनवाई पर रोक, केंद्र की याचिका पर नोटिस जारी

By: Jun 16th, 2026 12:06 am

दिव्य हिमाचल ब्यूरो— नई दिल्ली

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार की उन याचिकाओं पर नोटिस जारी किए, जिनमें विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित कई मामलों को स्थानांतरित करने की मांग की गईहै। इन याचिकाओं में ‘ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026’ की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी मोहन की एक अवकाशकालीन पीठ ने निर्देश दिया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित सभी संबंधित मामलों की कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक रहेगी। पीठ ने उन याचिकाकर्ताओं को भी नोटिस जारी किए, जिन्होंने उच्च न्यायालयों में ‘ट्रांसजेडर (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026’ को चुनौती दी है और केंद्र की स्थानांतरण याचिकाओं पर उनसे जवाब मांगा है।

पीठ ने टिप्पणी की कि वह या तो सभी याचिकाओं को उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरित कर सकती है या उन्हें एक साथ जोडक़र फैसले के लिए किसी एक विशेष उच्च न्यायालय को सौंप सकती है। केंद्र सरकार ने राजस्थान, कर्नाटक, केरल और दिल्ली उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकाओं को स्थानांतरित करने की मांग की है। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय से आग्रह किया कि यदि मामलों को उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरित किया जाता है, तो उनकी सुनवाई तीन जजों की पीठ को करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 का नालसा फैसला, जो ‘ट्रांसजेडर संशोधन अधिनियम, 2026’ की चुनौतियों का आधार है, उसे दो जजों की पीठ ने सुनाया था।


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