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कालापानी का काली मंदिर : कैलाश जाने से पहले भक्त करते हैं माता के दर्शन, यात्रा के लिए लेते हैं आशीर्वाद

By: Jun 25th, 2026 9:00 pm

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में, हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों के बीच एक ऐसा स्थान है, जो आस्था, प्रकृति और रहस्य तीनों का अनोखा संगम माना जाता है। यह जगह है कालापानी का प्राचीन काली मंदिर। समुद्र तल से करीब 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। कहा जाता है कि यहीं से काली नदी की शुरुआत होती है। लोगों की मान्यता है कि मंदिर के पास बहने वाली एक छोटी सी पवित्र धारा ही आगे चलकर काली नदी का रूप ले लेती है। यही काली नदी आगे जाकर भारत और नेपाल के बीच प्राकृतिक सीमा भी बनाती है।

मंदिर परिसर में बहते इस जल को लोग देवी काली का आशीर्वाद मानते हैं और श्रद्धा के साथ इसे अपने साथ ले जाते हैं। कालापानी का यह काली मंदिर आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक अहम पड़ाव भी है। जो भी यात्री इस दुर्गम और दिव्य यात्रा पर निकलते हैं, वे यहां रुककर माता काली के दर्शन जरूर करते हैं और आगे की यात्रा के लिए आशीर्वाद लेते हैं। चारों तरफ फैली बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां, ठंडी हवाएं और शांत वातावरण इस जगह को और भी विशेष बना देते हैं। मंदिर के पास ही व्यास गुफा भी स्थित है। मान्यता है कि महान ऋषि वेद व्यास ने इसी गुफा में बैठकर कठोर तपस्या की थी और यहीं से उन्होंने ज्ञान की अलौकिक रोशनी से मानवता को मार्ग दिखाया। इसी कारण यह स्थान सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि एक पवित्र तपोभूमि भी माना जाता है। ऐसी मान्यता भी है कि अपने वनवास के दौरान पांडवों ने इस क्षेत्र में कुछ समय बिताया था।


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