बरसात सिर पर, फिर भी नहीं जागा उद्योग विभाग

By: Jun 20th, 2026 12:02 am

गगरेट औद्योगिक क्षेत्र के नाले की सफाई अधर में, उद्योगपतियों ने उपायुक्त जतिन लाल से लगाई गुहार

स्टाफ रिपोर्टर-गगरेट
बरसात के मौसम में संभावित आपदा से बचाव को लेकर जिला प्रशासन भले ही सभी विभागों को समय रहते नालों और खड्डों की सफाई के निर्देश दे चुका है, लेकिन उद्योग विभाग पर इन निर्देशों का कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा। पिछले वर्ष भारी बारिश के दौरान कई उद्योगों में तबाही का कारण बने गगरेट औद्योगिक क्षेत्र के बरसाती नाले की अब तक सफाई नहीं करवाई गई है।

ऐसे में उद्योगपतियों को आशंका है कि कहीं विभाग फिर से किसी बड़ी आपदा का इंतजार तो नहीं कर रहा। गगरेट औद्योगिक क्षेत्र के बीच से गुजरने वाला बरसाती नाला हर साल उद्योगों के लिए परेशानी का सबब बनता रहा है। गत वर्ष समय पर गाद नहीं हटाए जाने के कारण नाले का पानी पलटकर कई उद्योगों में घुस गया था, जिससे लाखों रुपए का नुकसान हुआ था। इस घटना से सबक लेने के बजाय उद्योग विभाग का इस बार भी बरसात से पहले नाले की सफाई को लेकर गंभीरता न दिखाना विभागीय शिथिलता को उजागर कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जिला उद्योग केंद्र द्वारा औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित इकाइयों से इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट फंड के तहत चार रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से शुल्क भी वसूला जाता है। इसके बावजूद उद्योगों की सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं पर समय रहते खर्च न होना उद्योगपतियों की समझ से परे है। उद्योगपतियों ने विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ-साथ उपायुक्त जतिन लाल से भी हस्तक्षेप की मांग की है।

एक साल बाद भी नहीं बना बॉक्स कलवर्ट

पिछली बरसात के बाद उद्योग विभाग ने बाढ़ संरक्षण मंडल के साथ मिलकर नाले का निकास सोनभद्र नदी की ओर करने के लिए बॉक्स कलवर्ट निर्माण का आश्वासन दिया था। उम्मीद थी कि इससे नाले के अवरुद्ध होने की स्थिति में भी पानी का बहाव बना रहेगा और तबाही की आशंका कम होगी। हालांकि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी इस परियोजना पर कोई ठोस काम शुरू नहीं हो पाया है। इससे उद्योगपतियों में विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

उद्योगपतियों को सता रही फिर से नुकसान की आशंका

मानसून दस्तक देने की तैयारी में है, लेकिन बरसाती नाले की सफाई और स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों को आशंका है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो नुकसान होगा।


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