सशक्त पशुपालन अर्थव्यवस्था की नींव रखेगी पॉलिसी

By: Jun 12th, 2026 11:20 pm

‘हिमाचल प्रदेश चराई नीति-2026’ मंजूर, चराई सलाहकार समितियों के मामलों की समीक्षा कर जारी परमिट

स्टाफ रिपोर्टर — शिमला

पशुपालकों की आजीविका में सुधार लाने और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘हिमाचल प्रदेश चराई नीति-2026’ को मंजूरी प्रदान की है। मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में तैयार की गई इस महत्त्वाकांक्षी नीति के तहत अब पारंपरिक और कठोर प्रतिबंधों के स्थान पर वैज्ञानिक और लचीला दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। इस नीति के तहत पशुपालन विभाग के सहयोग से वन विभाग एक व्यापक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करेगा जिसमें अगले छह माह के भीतर पशुपालकों को अपना नाम, पता, पशुओं की संख्या, पारंपरिक चराई मार्ग और पड़ाव स्थलों का पंजीकरण करवाना होगा। इस प्रणाली के माध्यम से पशुपालकों की जानकारी को आधार पर आधुनिक विधि से हिम परिवार और भारत पशुधन पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे उनकी पहचान और विवरण का सत्यापन आसानी से किया जा सकेगा। इस नीति की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि उन पारंपरिक पशुपालकों को भी मान्यता दी जाएगी, जो वर्षों से बिना किसी औपचारिक अनुमति के चराई कार्य करते रहे हैं।

ऐसे पशुपालक अब अपना पंजीकरण करवा सकेंगे, जिसके बाद स्थानीय चराई सलाहकार समितियां उनके मामलों की समीक्षा कर नियमानुसार नए परमिट जारी करेंगी। राज्य के वन क्षेत्रों के संरक्षण और पुनर्जीवन को सुनिश्चित करने के लिए नीति में क्रमबद्ध चराई व्यवस्था (रोटेशनल ग्रेजिंग) का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत चराई सलाहकार समितियां समय-समय पर चराई गतिविधियों की समीक्षा करेंगी। वन संरक्षक और जिला वन अधिकारी की अध्यक्षता में कार्य करने वाली ये समितियां प्रत्येक पांच वर्ष में पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर चराई परमिटों की समीक्षा करेंगी। नीति के अनुसार, ऐसे चराई परमिट जिनका उपयोग नहीं किया जा रहा है या जो अनुपस्थित व्यक्तियों के नाम पर हैं, उन्हें विस्तृत जांच के बाद रद्द किया जाएगा। इसके बाद उपलब्ध चराई क्षमता को ग्राम सभाओं के माध्यम से सक्रिय और वास्तविक पशुपालकों को आबंटित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री सुक्खू कहते हैं

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि चराई नीति-2026 हमारी ‘हरियाली भी, खुशहाली भी’ की सोच को साकार करती है। यह हमारे चरागाहों की रक्षा करती है, पशुपालक परंपराओं का सम्मान करती है और पशुधन पर निर्भर परिवारों के भविष्य को सुरक्षित बनाती है। यह नीति पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि के बीच संतुलन स्थापित करते हुए राज्य में एक समावेशी, टिकाऊ और सशक्त पशुपालन अर्थव्यवस्था की नींव रखेगी।


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