राज्य के तीन पारंपरिक उत्पादों को GI टैग, रणसिंगा, वुड कार्विंग क्राफ्ट-हस्तनिर्मित गलीचा अब राष्ट्रीय स्तर पर होंगे संरक्षित

By: Jun 16th, 2026 12:07 am

रणसिंगा, वुड कार्विंग क्राफ्ट और हस्तनिर्मित गलीचा अब राष्ट्रीय स्तर पर होंगे संरक्षित

स्टाफ रिपोर्टर — शिमला

हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला को बड़ी पहचान मिली है। राज्य के तीन पारंपरिक उत्पादों हिमाचल रणसींगा, हिमाचल वुड कार्विंग क्राफ्ट व हिमाचल हैंडमेड गलीचा को आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय ने स्थानीय उत्पादक समूहों, कारीगर संगठनों और अन्य हितधारकों के सहयोग से इन उत्पादों के लिए जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करवाया। हिमाचल रणसिंगा राज्य का एक पारंपरिक वाद्य यंत्र है, जो धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों का अभिन्न हिस्सा रहा है। हिमाचल वुड कार्विंग क्राफ्ट अपनी बारीक नक्काशी, पारंपरिक डिजाइनों और कलात्मक शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। हस्तनिर्मित गलेचा राज्य की विशिष्ट हस्तकरघा एवं वस्त्र परंपरा का प्रतीक है।

वहीं डा. विवेक पठानिया ने कहा कि इन तीन हिमाचली उत्पादों का जीआई पंजीकरण राज्य की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने और पारंपरिक कारीगरों के लिए सतत आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। इस प्रक्रिया में योगदान देने वाले कुशल दीप व हिमांशु बालियान के प्रयासों की भी सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की नकल और नाम के दुरुपयोग पर रोक लगेगी तथा असली हिमाचली उत्पादों को अलग पहचान मिलेगी। साथ ही बेहतर ब्रांडिंग, बाजार तक पहुंच और उपभोक्ताओं के बीच विश्वास बढऩे से कारीगरों की आय और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App or iOS App