फायदा किसी और का, तो सारा खर्च हम क्यों करें
किशाऊ बांध परियोजना को लेकर C ने पूर्व भाजपा सरकार पर साधा निशाना
वरिष्ठ संवाददाता — शिमला
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना को लेकर कुछ टिप्पणियां सामने आ रही है, जिसमें अधूरी जानकारियां हंै। उन्होंने कहा कि परियोजना में युमना और टौंस नदी पर एक बांध बनना था। पूर्व भाजपा सरकार ने एक समझौता किया और सहमति दी, जिसके अनुसार इस बांध से इस बांध से पैदा होने वाली 422 मेगावाट बिजली दो राज्यों हिमाचल और उतराखंड को मिलेगी और इसका पैसा हम वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में कांग्रेस सरकार आई और केंद्र के साथ हुई पहली बैठक में ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने भी कहा कि हमें आगे बढऩा चाहिए, लेकिन मैंने साफ मना कर दिया कि हरियाणा और दिल्ली को पानी चाहिए, तो पूरा पैसा वे वहन करें।
बकौल सीएम मैंने अधिकारियों को कहा था कि जब तक सौ फीसदी खर्च भारत सरकार वहन करेगी, तब ही मैं सहमति हूंगा। केंद्र के साथ तीन चार बैठकों के बाद गृह मंत्री के साथ उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस परियोजना से प्रदेश को 211 मेगावाट बिजली मुफ्त मिलेगी। उन्होंने कहा कि अगर वर्तमान में हम 211 मेगावाट का बिजली प्रोजेक्ट अन्य को देते हैं, तो सिर्फ 12 प्रतिशत रायल्टी और एक फीसदी लाडा को मिलाकर कुल 13 प्रतिशत ही मिलना था।
पूर्व सरकार ने संपदा लुटाई
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि पूर्व सरकार ने प्रदेश की संपदा को बेचा है। 5000 करोड़ की जगह एक करोड़ में दे दी गई। उन्होंने कहा कि मेडिकल डिवाइस पॉर्क, जिसकी वे चर्चा कर रहे थे, उसमें हमें 100 करोड़ मिलना था। उन्होंने कहा कि एक रुपए स्क्वेयर मीटर के हिसाब से उद्योगों को जगह के अलावा तीन रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से 10 वर्षो के लिए बिजली देनी थी। सीएम ने कहा कि जो बिजली हम सात रुपए सर्दियों में खरीदते हंै, उसे तीन रुपए में क्यों दें। सीएम ने कहा कि मैं इस प्रकार के समझौते मुख्यमंत्री होते हुए नहीं कर सकता, जो प्रदेश की संपदा और 75 लाख जनता के अधिकार को खाने की कोशिश करें।
हमने पैसा नहीं लगाया
सीएम सुक्खू ने कहा कि यह ऐतिहासिक जीत इसलिए भी है, क्योंकि 211 मेगावाट के लिए हमने कोई पैसा नहीं लगाया। उन्होंने कहा कि पांच वर्षों बाद इस परियोजना से 600 करोड़ रुपए की आय प्रदेश को होगी, जबकि उतराखंड ने पहले ही सहमति जता दी थी और उन्हें खर्च वहन करना पड़ेगा। उन्होंने कहा किय यह तो अभी एक शर्त है और अभी एमओयू साइन होना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 14 वर्ष बाद भी बीबीएमवी का एरियर नहीं मिल रहा है और उस लड़ाई को लड़ रहे हंै।
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