बिना सरकारी मदद से तैयार कर दिया अमरूद का बागीचा

By: Jul 24th, 2026 12:48 am

बम्म पंचायत के मदन लाल शर्मा ने दो बीघे में रोपित किए 300 अमरूद के पौधे, प्रथम चरण में प्रदर्शनी ट्रायल रहा सफल
निजी संवाददाता-बम्म
हालत और समय कैसा भी हो ऐसे में हौंसले बुलंद हो, दिल में आसमान छूने के अरमान हो, कुछ करने का जज्बा हो और मेहनत का जुनून हो तो बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी आसान हो सकती हैं। ऐसा व्यक्तित्व समाज में समर्पित प्रेरणादायक बन जाता है। ऐसी ही कहानी बिलासपुर जिले की बम्म पंचायत से ब्रह्मली गांव के मदन लाल शर्मा पर चरित्रार्थ साबित हो रही है। जिन्होंने एक बहुत बड़ा सपना अपने दिल में संजोया। उन्होंने अपने दम पर ही बागवानी को अपनाने का फैसला लिया। बिना किसी सरकारी अनुदान या फिर मदद के ही इन्होंने अमरूद के पौधे लगाए और अब इन पौधों ने फल देना शुरू कर दिया है। स्वयं अपनी मेहनत से ही मदन लाल आत्मनिर्भर बने हैं। दिव्य हिमाचल से बातचीत के दौरान मदनलाल शर्मा ने बताया कि गेहूं और धान में कुछ नहीं रखा है। हालांकि वह दोहरी खेती करने पर विश्वास करते हैं। एक वैज्ञानिक सक्षम बागवानी से बुलंदियों को छुआ जा सकता है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में उन्होंने ट्रायल के तौर पर दो बीघे में उत्तम किस्म के 300 पौधा अमरूद रोपित किया, जिसके फल आना शुरू हो गए हंै। यह पौधा एक साल में तीन फसलें देता है, उसके फल बड़े, रसदार और अंदर से गुलाबी रंग के हैं।

उन्होंने बताया कि यह उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उन्होंने मुंबई की एक प्राइवेट बागवानी कंपनी से मंगवाए हैं। इन पौधों की ऊंचाई अधिकतम पांच से छह फुट, चौड़ाई दो मीटर और पौधे की आयु लगभग 15-20 वर्ष है। उन्होंने बताया कि अगर एक पौधा अमरूद फल उत्पादन कम से कम 30 किलो देता है तो न्यूनतम 50 रुपए प्रति किलो की दर से 15 सौ रुपए बनते हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य तीन हजार पौधे लगाने का है, जिन्हें तीन एकड़ जमीन पर लगाकर विकसित किया जाएगा। उत्पादन में इस प्रकार एक पौधा एक हजार पांच सौ रुपए देता है तो तीन हजार पौधों का कुल 45 लाख रुपए एक फसल का बनता है। इस प्रकार एक साल की तीन फसलों का एक करोड़ पैंतीस लाख रुपए बनेंगे। इसके लिए उन्होंने पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है और पानी का प्रबंध किया जा रहा है। उन्होंने वर्षा जल संग्रहण टैंक बनाने की योजना तैयार कर ली है। बाड़बंदी से पौधों की सुरक्षा की जाएगी, इसके लिए दस फुट ऊंची जालीदार बाड़ और ऊपर से 15 ऊंचा हरे रंग की जाली डाली जाएगी, ताकि पक्षी फलों की क्षति न पहुंचा सके। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में प्रदर्शनी ट्रायल सफल रहा है तथा अभी तक बागवानी विभाग से कोई भी सहायता नहीं ली है।


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