भुंतर में कार सवारों से चरस मिलने की जांच CBI को, HC ने कुल्लू पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

By: Jul 14th, 2026 12:01 am
Himachal High Court :

याचिकाकर्ता को आई गंभीर चोटों की भी होगी जांच

विधि संवाददाता — शिमला

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भुंतर (कुल्लू) पुलिस द्वारा कार सवारों से चरस और चार लाख की नकदी बरामदगी के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली और घटनाक्रम के समय में भारी अंतर (लगभग सात घंटे की देरी) को संदिग्ध माना। कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम और याचिकाकर्ता को आई गंभीर चोटों के मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को जिम्मा सौंप दिया है। यह आदेश न्यायाधीश राकेश कैंथला की एकल पीठ ने जामयांग तेसरिंग और अन्य द्वारा पुलिस स्टेशन भुंतर में दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के पश्चात दिया है। पुलिस के अनुसार, 22 फरवरी 2026 को शाम करीब छह बजकर50 मिनट पर भुंतर के सिउंड में एक नाके के दौरान मणिकर्ण की तरफ से आ रही कार को रोका गया था। कार में तीन लोग कृकायडेन रेगजिऩ, जामयांग तेसरिंग और तेनजिऩ क्याब सवार थे। पुलिस का दावा था कि तलाशी के दौरान कार से 28 ग्राम चरस और एक सूटकेस से 500 के नोटों में कुल चार लाख की नकदी बरामद हुई थी, जिसे ज़ब्त कर एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने एफआईआर को पूरी तरह से मनगढ़ंत, दुर्भावनापूर्ण और पुलिस की अवैध व जबरन वसूली की मांगों को न मानने का नतीजा बताया था।

याचिकाकर्ता जामयांग तेसरिंग 29 जनवरी, 2026 को ही अमरीका से भारत आया था और अपने साथियों के साथ नया स्टार्टअप शुरू करने के लिए जगह देखने मनाली व मणिकर्ण साहिब गए थे। उसका आरोप था कि जब वे मैक्लोडगंज लौट रहे थे, तो पुलिस ने उन्हें रोका और चार लाख कैश देखकर उनके बैग छीनने की कोशिश की। विरोध करने पर पुलिस ने उनके बैग में खुद ही एक पैकेट (चरस) डाल दिया। याचिकाकर्ताओं को शाम साढ़े छह बजे से रात डेढ़ बजे तक बिना खाना-पानी के मौके पर ही प्रताडि़त किया गया। इसी बीच पुलिस द्वारा धक्का दिए जाने के कारण जामयांग तेसरिंग सडक़ पर आ गए और एक तेज रफ्तार मिनी बस (टेंपो ट्रैवलर) ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि शुरुआती चरण में कोर्ट मिनी ट्रायल चलाकर एफआईआर को पूरी तरह रद्द नहीं कर सकती, क्योंकि गाड़ी से प्रतिबंधित सामग्री की बरामदगी दिखाई गई है। लेकिन, अदालत ने पुलिस केस डायरी के रिकार्ड को देखकर कई गंभीर खामियां पाईं।

पुलिस की केस डायरी में इस बात का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं था कि आरोपियों को लगभग सात घंट मौके पर ही क्यों रोककर रखा गया। केस डायरी के अनुसार, पुलिस का ई-साक्ष्य ऐप काम नहीं कर रहा था, जिसके कारण इस पूरी कार्रवाई की कोई रिकॉर्डिंग नहीं की गई। याचिकाकर्ता जामयांग तेसरिंग को किन परिस्थितियों में गाड़ी से टक्कर लगी और वे कैसे घायल हुए, पुलिस इसकी सही तस्वीर पेश करने में पूरी तरह नाकाम रही। अदालत ने कहा कि इन संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए इस मामले में स्थानीय पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता। न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि एक स्वतंत्र एजेंसी इसकी जांच करे।


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