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हिमाचल में अब आइलैंड का मजा, प्रदेश के इस जिला में होगा तैयार प्रोजेक्ट

By: Jul 25th, 2026 5:56 pm

अभिषेक सोनी—बिलासपुर

हिमाचल प्रदेश का पहला आइलैंड टूरिज्म प्रोजेक्ट जिला बिलासपुर की गोविंद सागर झील स्थित ज्योरीपत्तन में आगामी एक माह के भीतर पर्यटकों के लिए शुरू कर दिया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से बिलासपुर को इको टूरिज्म, वॉटर स्पोट्र्स, एयरो स्पोट्र्स और एडवेंचर टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

यह जानकारी उपायुक्त राहुल कुमार ने शनिवार को सोसायटी फॉर टूरिज्म, स्पोट्र्स, ट्रेड एंड एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। उपायुक्त ने कहा कि आइलैंड टूरिज्म परियोजना के तहत गोविंद सागर झील के मध्य स्थित प्राकृतिक द्वीपों को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां पर्यटकों के लिए आधुनिक एवं आरामदायक आवास की व्यवस्था होगी, जहां वे प्राकृतिक वातावरण के बीच सुकून भरा समय व्यतीत कर सकेंगे। पर्यटकों को नाश्ता, दोपहर एवं रात्रि भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें स्थानीय व्यंजनों को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा ताकि वे बिलासपुर की समृद्ध खानपान संस्कृति का अनुभव कर सकें। उन्होंने कहा कि पर्यटक यहां प्री-वेडिंग शूट, फिशिंग, स्थानीय दर्शनीय स्थलों का भ्रमण तथा प्रकृति की गोद में विभिन्न साहसिक एवं मनोरंजक गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे। स्थानीय कलाकारों द्वारा लोक संगीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे, जिससे पर्यटक हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं से भी रू-ब-रू हो सकेंगे। स्थानीय हस्तशिल्प, कृषि उत्पादों तथा अन्य पारंपरिक उत्पादों के विक्रय के लिए भी विशेष व्यवस्था की जाएगी। इससे स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और उद्यमियों को अपने उत्पाद सीधे पर्यटकों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

यह परियोजना स्थानीय रोजगार, स्वरोजगार तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि बिलासपुर में गोविंद सागर झील के प्रमुख द्वीपों ज्योरी पत्तन, धररसानी और भोलू को अंडमान एवं निकोबार की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। यह हिमाचल प्रदेश की अपनी तरह की पहली पर्यटन पहल होगी, जो राज्य के पर्यटन क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ेगी। बैठक में मंडी-भराड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित वॉटर स्पोट्र्स गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। हितधारकों ने वॉटर स्पोट्र्स गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर आ रही समस्याओं बारे अवगत करवाया। उपायुक्त ने एसडीएम झंडूता को वॉटर स्पोट्र्स के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि इस संबंध में बीबीएमबी के अधिकारियों के साथ अलग से बैठक आयोजित कर स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले उद्यमियों को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।


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