गेयटी में ‘हिमगिरि सा चुपचाप गले’ बनी आकर्षण
संघ के चार तपस्वी कार्यकर्ताओं के जीवन -राष्ट्रसेवा को समर्पित है पुस्तक, नई पीढ़ी को प्रेरणा देने का संदेश
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
राजधानी शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में सोमवार को मातृवंदना संस्थान द्वारा प्रकाशित एवं डॉ. रश्मीश सिंह सपेइया द्वारा लिखित पुस्तक ‘हिमगिरि सा चुपचाप गले’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, हिमाचल प्रांत के संघचालक वीर सिंह रांगड़ा ने की, जबकि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार मुख्य अतिथि रहे। गोविंद ठाकुर और वीरेन्द्र सपेइया विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख प्रताप समयाल ने पुस्तक की भूमिका प्रस्तुत करते हुए बताया कि इसमें संघ के चार समर्पित प्रचारकों एवं कार्यकर्ताओं-ठाकुर राम सिंह, चेत राम, कुंज लाल ठाकुर और किशन चंद राजपूत-के जीवन, संघर्ष और राष्ट्रसेवा को समाहित किया गया है।
उन्होंने कहा कि इन मौन तपस्वियों ने हिमाचल में संघ कार्य को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्य वक्ता एवं संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख बनवीर ने कहा कि पुस्तक समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं के त्याग, अनुशासन और सेवा भाव का प्रेरक दस्तावेज है। उन्होंने चारों कार्यकर्ताओं के योगदान को नई पीढ़ी के लिए अनुकरणीय बताया। संघचालक वीर सिंह रांगड़ा ने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के राष्ट्रनिर्माण के विचारों पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि पुस्तक युवाओं में राष्ट्रभक्ति, सेवा, अनुशासन और चरित्र निर्माण की भावना को मजबूत करेगी। अंत में मातृवंदना संस्थान के अध्यक्ष उमेश मोदगिल ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया तथा डॉ. कर्म सिंह ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत की।
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